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Ayodhya Ram Mandir: क्या सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है अयोध्या का राम मंदिर ट्रस्ट? होश उड़ा देगी यह हकीकत

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोगों के मन में है सवाल उठ रहा है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट सरकार के प्रति जवाबदेह है या नहीं? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

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  • अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट कानूनी रूप से एक स्वतंत्र संस्था है।
  • यह ट्रस्ट केंद्र या राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं आता।
  • गृह मंत्रालय ने पुष्टि की, ट्रस्ट RTI अधिनियम के तहत नहीं।
  • हालांकि, अनियमितताओं पर उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की।

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में दान की रकम के कथित गबन के बाद मंदिर के मैनेजमेंट और कामकाज की देखरेख करने वालों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार या फिर उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह है? हैरानी की बात यह है कि कानूनी तौर पर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करता है. साथ ही किसी भी सरकार के प्रशासनिक कंट्रोल में ट्रस्ट नहीं है. 

ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करता है 

कानूनी तौर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है जो अयोध्या में राम मंदिर परिसर के मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार है. इसके रोज के काम, वित्तीय फैसले और आंतरिक मैनेजमेंट को पूरी तरह से इसके ट्रस्टी संभालते हैं. यानी कि ना तो केंद्र सरकार और ना ही उत्तर प्रदेश सरकार ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज या फिर वित्तीय फसलों की सीधे तौर पर निगरानी करती है. संस्थान को चलाने का अधिकार स्थायी ट्रस्टी के पास ही होता है.

गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट की कानूनी स्थिति साफ की 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही केंद्रीय सूचना आयोग को बता दिया है कि ट्रस्ट कोई सरकारी संस्था नहीं है. मंत्रालय के मुताबिक ट्रस्ट एक स्वतंत्र कानूनी इकाई है ना कि कोई सार्वजनिक प्राधिकरण. इस वजह से यह किसी भी मंत्रालय या फिर राज्य सरकार के सीधे प्रशासनिक कंट्रोल में नहीं आता. 

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आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर 

ट्रस्ट की स्वतंत्रता स्थिति का एक बड़ा नतीजा यह है कि इसे आमतौर पर सूचना का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जाता. यही वजह है कि ट्रस्ट के लिए आरटीआई आवेदनों का जवाब उस तरह देना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है जैसा सरकारी विभागों या फिर सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के लिए होता है.

स्वतंत्र प्रबंधन का मतलब कानून से छूट नहीं 

हालांकि ट्रस्ट सरकार से स्वतंत्र रूप से काम करता है लेकिन यह भारतीय कानून से ऊपर नहीं है. ट्रस्ट और इसके कामकाज से जुड़े किसी भी व्यक्ति पर आपराधिक कानून लागू होते हैं.  मंदिर में दान की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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