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Mundari Tribe: अफ्रीका का यह कबीला करता है गौ माता की रक्षा, जानें क्यों है गाय से इनका इतना जुड़ाव?

Mundari Tribe: अफ्रीका की एक जनजाति गायों को अपनी जान से भी बढ़कर मानती है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की कहानी.

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  • दूध, गोबर-मूत्र उपयोग, गायों संग गहरा भावनात्मक संबंध।

Mundari Tribe: दुनिया भर के कई समुदायों के लिए मवेशी भोजन और इनकम का एक बड़ा स्रोत है. लेकिन दक्षिण सूडान की मुंडारी जनजाति के लिए गाय सिर्फ पशुधन से कहीं ज्यादा हैं.  जनजाति की संपत्ति, सामाजिक स्थिति, परंपरा, विवाह और यहां तक की दैनिक दिनचर्या भी उनके मवेशियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है. यह जानवर इतने मूल्यवान है कि जनजाति के सदस्य कथित तौर पर दिन-रात उनकी रखवाली करते हैं और अक्सर चोरों और जंगली जानवरों से बचाने के लिए AK-47 राइफल जैसे आधुनिक हथियार भी साथ रखते हैं.

गाय धन का सबसे बड़ा प्रतीक 

मुंडारी लोगों के बीच गाय का मालिक होना समृद्धि की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है. उन समाजों के उलट जहां पर धन को पैसे या फिर संपत्ति से मापा जाता है मुंडारी लोग किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए उसके पास मौजूद मवेशी की संख्या को जानते हैं. जिस भी व्यक्ति के पास मवेशियों का सबसे बड़ा झुंड होता है उसे समुदाय के अंदर काफी ज्यादा सम्मान और प्रभाव दिया जाता है. 

शादी में गाय की भूमिका 

शादी के दौरान भी मवेशी काफी जरूरी होते हैं. पारंपरिक रूप से दूल्हे के परिवार को दुल्हन के परिवार को ब्राइड प्राइस के रूप में गाय देनी होती है. शामिल परिवारों के आधार पर एक शादी के लिए लगभग 20 से 40 गाय की जरूरत हो सकती है. जनजाति के अंदर बिना मवेशी वाले व्यक्ति को अक्सर परिवार बसाने या फिर पूर्ण सामाजिक दर्जा प्राप्त करने में असमर्थ माना जाता है.

गाय का इस्तेमाल 

मुंडारी लोग दूध के अलावा कई दूसरी चीजों के लिए भी अपने मवेशियों पर निर्भर रहते हैं. गाय के गोबर को जलाकर राख बनाई जाती है जिसे लोगों और मवेशियों दोनों पर लगाया जाता है. यह राख त्वचा को तेज धूप से बचाने में मदद करती है और साथ ही मच्छरों और कीड़ों को भी दूर रखती है. जनजाति पारंपरिक स्वच्छता प्रथाओं के लिए गाय के मूत्र का भी इस्तेमाल करती है. इसमें चेहरा और बाल धोना शामिल है. 

गाय को परिवार के सदस्यों की तरह माना जाता है 

मुंडारी और उनके मवेशियों के बीच का संबंध काफी ज्यादा आर्थिक ना होकर भावनात्मक भी है. हर गाय को उसका अपना नाम दिया जाता है और मालिक हर जानवर को अलग-अलग पहचानते हैं. शाम को जनजाति के सदस्य अलाव के चारों तरफ इकट्ठा होते हैं और अपनी पसंदीदा गायों को समर्पित गीत गाते हैं. 

गाय की मौत एक बड़ी त्रासदी 

अगर बीमारी या फिर किसी दुर्घटना की वजह से कोई गाय मर जाती है तो परिवार के लोग काफी दुखी होते हैं और अक्सर कई दिनों तक रोते रहते हैं. कुछ लोग शोक के तौर पर कुछ समय तक खाना-पीना भी छोड़ देते हैं.

यह भी पढ़ेंः नाली का पानी पीने के बाद भी जानवरों का पेट क्यों खराब नहीं होता, कितना मजबूत होता है इम्यून सिस्टम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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