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ऑस्ट्रेलिया के पास है सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार, फिर भी क्यों नहीं बनाया पाया परमाणु बम?

हाल ही में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम को लेकर डील हुई है. लेकिन क्या आपको पता है कि जिस देश में यूरेनियम का अथाह भंडार है, वहां पर एक भी परमाणु बम आखिर क्यों नहीं है? चलिए जानें.

पीएम मोदी बीते दिन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे, जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम डील साइन हुई है, जो कि दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहा है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 2014 में हुआ यूरेनियम समझौता दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ था. ऑस्ट्रेलिया लंबे वक्त तक भारत को यूरेनियम देने से इनकार करता रहा, लेकिन इस समझौते ने राह खोल दी. दुनिया के कुल यूरेनियम का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले ऑस्ट्रेलिया के पास सुरक्षित है, ऐसे में सवाल है कि आखिर ऑस्ट्रेलिया ने आज तक अपना खुद का कोई परमाणु बम क्यों नहीं बनाया? चलिए जानें.

दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम का खजाना

आंकड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया के पास करीब 17 लाख टन यूरेनियम का विशाल स्टॉक मौजूद है, जो दुनिया के कुल भंडार का लगभग एक तिहाई है. यह खनिज मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक डैम खदान में पाया जाता है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम डिपॉजिट माना जाता है. इसके अलावा नॉर्दर्न टेरिटरी की रेंज और जाबिलुका समेत पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के इलाकों में भी इसकी भारी मौजूदगी है. इसके बाद भी ऑस्ट्रेलिया ने कभी भी इस बारूद का इस्तेमाल हथियार बनाने के लिए नहीं किया और हमेशा खुद को इस विनाशकारी दौड़ से दूर रखा.

अब तक परमाणु हथियार क्यों नहीं बना सका ऑस्ट्रेलिया?

ऑस्ट्रेलिया के हथियार न बना पाने के पीछे बेहद मजबूत अंतरराष्ट्रीय सिद्धांत और मानवीय उसूल रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया शुरू से ही परमाणु हथियारों के प्रसार के खिलाफ वैश्विक अभियानों का एर बड़ा समर्थक रहा है. हमेशा से उसका मानना है कि ये हथियार पूरी तरह से मानवता के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा हैं. इसी सोच के तहत ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं. इस अंतरराष्ट्रीय कानून से बंधे होने के कारण ऑस्ट्रेलिया नैतिक और कानूनी रूप से कभी भी अपने देश की धरती पर परमाणु हथियारों का निर्माण या परीक्षण भी नहीं करता है.

यह भी पढ़ें: Pm Modi Australia Visit: समंदर पार से आ रहा है भारत का नया 'पावरहाउस'! यूरेनियम भंडार वाले इस देश से क्या है PM मोदी की महा-डील?

यूरेनियम निर्यात की बेहद कड़ी शर्तें

ऑस्ट्रेलिया अपने विशाल यूरेनियम भंडार का इस्तेमाल बेहद सीमित और रचनात्मक कामों के लिए ही करता है. वह इस बहुमूल्य धातु का निर्यात दुनिया के दूसरे देशों को जरूर करता है, लेकिन इसके लिए उसने बेहद कड़े और सख्त नियम बना रखे हैं. ऑस्ट्रेलिया सिर्फ उन्हीं देशों को यूरेनियम बेचता है जो कि इस बात की लिखित और कानूनी गारंटी देते हैं कि इसका इस्तेमाल सिर्फ बिजली बनाने या फिर चिकित्सा के क्षेत्र में ही होगा. अगर किसी देश पर जरा भी शक हो कि वह इसका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्य के लिए कर सकता है, तो ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम देने से साफ इनकार कर देता है.

खुद के देश में नहीं है कोई न्यूक्लियर पावर प्लांट

आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार रखने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया के पास अपना एक भी चालू न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं है. यानि कि वह खुद बिजली बनाने के लिए भी परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल नहीं करता है. यह देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक रूप से कोयला, गैस और तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा के विकल्पों पर निर्भर है. इसके पीछे वहां के कड़े पर्यावरण कानून और परमाणु ऊर्जा के प्रति स्थानीय जनता का भारी विरोध और चिंताएं मुख्य वजह हैं. 

यह भी पढ़ें: Australia Uranium: ऑस्ट्रेलिया किन-किन देशों को बेचता है यूरेनियम, जानें क्या है इसकी कीमत?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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