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IMF Funding Source: दुनिया के देशों को कर्ज बांटता रहता है IMF, उसके पास कहां से आता है इतना पैसा?

IMF Funding Source: आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए 11,322 करोड़ रुपये के बेलआउट पैकेज को मंजूरी दी है. आइए जानें कि यह संस्था अपने पास इतने पैसे आखिर कहां से जुटाती है.

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  • आईएमएफ का पैसा सदस्य देशों के कोटा से आता है.
  • कर्ज देने पर आईएमएफ ब्याज वसूलता है.
  • जरूरत पड़ने पर आईएमएफ अन्य स्रोतों से उधार लेता है.
  • आईएमएफ देशों की आर्थिक नीतियों पर भी नजर रखता है.

IMF Funding Source: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में पाकिस्तान के लिए 1.32 बिलियन डॉलर यानी करीब 11,322 करोड़ रुपये के नए सहायता पैकेज को हरी झंडी दे दी है. 9 मई को हुई बोर्ड की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर दुनिया के तमाम देशों को मुश्किल वक्त में कर्ज बांटने वाली इस संस्था के पास इतना धन आता कहां से है. आइए, आईएमएफ की तिजोरी के असली स्रोतों और इसके कामकाज के तरीके को विस्तार से समझते हैं.

क्या है आईएमएफ की सबसे बड़ी ताकत?

आईएमएफ के खजाने का सबसे बड़ा और प्राथमिक स्रोत मेंबर कोटा है. इसे आप एक तरह की सदस्यता फीस मान सकते हैं जो हर सदस्य देश को देनी पड़ती है. विश्व अर्थव्यवस्था में किसी देश की स्थिति और उसके आकार के आधार पर उसका कोटा तय किया जाता है. यह कोटा न केवल संस्था को पैसा उपलब्ध कराता है, बल्कि आईएमएफ के भीतर उस देश की वोटिंग पावर और उसकी अहमियत भी तय करता है. जिस देश की अर्थव्यवस्था जितनी बड़ी होती है, उसका कोटा और निर्णय लेने की शक्ति भी उतनी ही अधिक होती है.

कहां से होती है मोटी कमाई?

आईएमएफ केवल फंड इकट्ठा नहीं करता, बल्कि यह एक बैंक की तरह अपने कर्ज पर ब्याज भी वसूलता है. जब भी कोई सदस्य देश अपनी आर्थिक जरूरतों या संकट से निपटने के लिए आईएमएफ से उधार लेता है, तो उसे उस पर ब्याज देना पड़ता है. यह ब्याज दरें आईएमएफ के राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती हैं, जिससे संस्था अपने प्रशासनिक खर्चों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का संचालन करती है. कर्ज देने की यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सख्त शर्तों के साथ जुड़ी होती है.

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न्यू अरेंजमेंट्स टू बोरो का विकल्प

कभी-कभी दुनिया में ऐसा आर्थिक संकट आता है जब सदस्य देशों द्वारा दिया गया कोटा फंड कम पड़ने लगता है. ऐसी स्थिति में आईएमएफ 'न्यू अरेंजमेंट्स टू बोरो' (NAB) का सहारा लेता है. इसके तहत आईएमएफ उन देशों या संस्थाओं से कर्ज लेता है जो आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हैं और कर्ज देने की स्थिति में हैं. यह एक तरह का सुरक्षा जाल है जो यह सुनिश्चित करता है कि वैश्विक मंदी के समय आईएमएफ के पास धन की कोई कमी न हो.

और क्या है फंड जुटाने का तरीका?

नाब (NAB) के अलावा आईएमएफ के पास फंड जुटाने का एक और तरीका 'बायलेटरल बोरोइंग एग्रीमेंट्स' (BBA) है. इसमें आईएमएफ सीधे तौर पर सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते करता है. यह व्यवस्था तब की जाती है जब कोटा और नाब दोनों से मिली राशि वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए नाकाफी लगने लगती है. इन समझौतों के जरिए आईएमएफ अपनी ऋण देने की क्षमता को अस्थायी रूप से बढ़ा लेता है, ताकि वह संकटग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं को डूबने से बचा सके.

कितने देशों के साथ काम करता है आईएमएफ?

आईएमएफ केवल पैसा देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर नजर रखने वाले प्रहरी की तरह काम करता है. साल 1944 में 44 देशों के साथ शुरू हुई इस संस्था में आज 191 सदस्य शामिल हैं. यह हर साल अपने सदस्य देशों की आर्थिक स्थिति की गहन समीक्षा करता है और रिपोर्ट जारी करता है. आईएमएफ देशों को ऐसी नीतियों के सुझाव देता है जिससे उनकी आर्थिक हालत स्थिर बनी रहे और भविष्य में कर्ज लेने की नौबत न आए.

तीन फॉर्मेट में देता है कर्जा?

आईएमएफ किसी भी देश को आंख मूंदकर पैसा नहीं देता, बल्कि इसके लिए तीन अलग-अलग ऋण फॉर्मेट बनाए गए हैं. पहला है 'रैपिड फाइनेंसिंग अरेंजमेंट', दूसरा 'एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी' और तीसरा 'स्टैंड बाय अरेंजमेंट्स'. कर्ज का चुनाव संबंधित देश की जरूरत और उसके संकट की प्रकृति के आधार पर किया जाता है. हर फॉर्मेट की अपनी अलग शर्तें और ब्याज दरें होती हैं. जब तक कोई देश आईएमएफ की आर्थिक सुधारों वाली कड़ी शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक लोन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती है.

क्या था आईएमएफ की स्थापना का उद्देश्य?

आईएमएफ की स्थापना के पीछे का मुख्य उद्देश्य 1930 की महामंदी जैसी स्थितियों को दोबारा आने से रोकना था. जब किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने लगता है या वह अपना अंतरराष्ट्रीय भुगतान करने में असमर्थ होता है, तब आईएमएफ 'लास्ट रिसॉर्ट' यानी अंतिम विकल्प के रूप में सामने आता है. यह वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देने और वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करने का काम करता है, ताकि दुनिया का व्यापारिक पहिया कभी न थमे.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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