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एशिया में इस गरीब देश की करेंसी है भारत से भी मजबूत, डॉलर के सामने रखता है कुछ औकात

Indian Rupee Slides All Time Low: भारतीय रुपये में आ रही गिरावट रुकने का नाम नहीं ले रही है, लेकिन एशिया में एक ऐसा गरीब देश है, जिसकी करेंसी भारत के मुकाबले बढ़ रही है. चलिए उसके बारे में जानें.

भारतीय रुपया लगातार गिरावट की ओर बढ़ रहा है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर हो गया है. रुपये ने 88.33 का नया रिकॉर्ड बनाया है, जबकि शुक्रवार को यह 88.30 के स्तर पर था. विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की कीमत अभी भी अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं के मुकाबले कमजोर बनी हुई है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ट्रेड वॉर के चलते आने वाले समय में रुपया और दबाव में रह सकता है. 

एक रिपोर्ट के अनुसार रुपये की कीमत अगले कुछ समय में 87.65 से 88.45 के बीच रहने की संभावना है, यानी और गिरावट की संभावना बनी हुई है. लेकिन क्या आपको पता है कि एशिया में एक गरीब देश ऐसा भी है, जिसकी करेंसी भारत से भी मजबूत है, चलिए उसके बारे में जानें. 

किस देश की करेंसी भारत से मजबूत

भारत का पड़ोसी मुल्क है अफगानिस्तान, जहां की करेंसी अफगानी (AFN) ने विदेशी मुद्रा बाजार में आश्चर्यजनक प्रदर्शन कर रही है. आमतौर पर युद्ध, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता के कारण कमजोर मानी जाने वाली अफगानी ने भारतीय रुपये (INR) को पीछे छोड़ दिया और डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत की. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति न केवल अफगानिस्तान की मौद्रिक नीतियों का परिणाम है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहायता और माइग्रेंट रेमिटेंस (वो पैसा जो कि प्रवासी अपने देश में भेजते हैं) का भी असर है.

अफगानी की मजबूती के कारण

अफगानी की कीमत में तेजी के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जाते हैं.

केंद्रीय बैंक की सख्त नीति: अफगानिस्तान के केंद्रीय बैंक ने मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित किया, जिससे अफगानी स्थिर और मजबूत बनी.

विदेशों से प्रेषण: देश में रहने वाले प्रवासियों और विदेशों से आने वाली धनराशि ने स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ाई.

अंतरराष्ट्रीय सहायता: विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिलने वाली वित्तीय मदद ने अफगानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया.

मुद्रास्फीति नियंत्रण: केंद्रीय बैंक ने प्रभावी नीतियों के जरिए महंगाई पर नियंत्रण रखा, जिससे करेंसी की स्थिरता बनी रही.

इन्हीं नीतियों का परिणाम है कि अफगानी की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई और हाल के महीनों में लगभग 1 अफगानी 1.26–1.29 भारतीय रुपये के स्तर पर स्थिर रही. यह स्थिति भारतीय रुपये के मुकाबले अफगानी को अधिक मूल्यवान बनाती है.

भारतीय रुपये की तुलना

भारतीय रुपया इस समय अफगानी की तुलना में कमजोर है. मुद्रा विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण उसकी स्थिरता पर असर पड़ा है. इस वजह से अफगानी, जो एक संघर्षग्रस्त देश की करेंसी है वह भारतीय रुपये से अधिक मजबूत नजर आ रही है. 

यह भी पढ़ें: भारत में अवैध घुसपैठ पर अब होगी जेल, लेकिन इस देश में मिलती है कोड़े मारने की सजा; सबसे कठोर है कानून

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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