क्या है BRICS में होने वाला गाला डिनर, कहां से शुरू हुई यह परंपरा?
18th BRICS Summit: भारत में जल्द ही 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं क्या होता है ब्रिक्स गाला डिनर और कहां से हुई इस परंपरा की शुरुआत.

- भारत 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
- गाला डिनर अनौपचारिक कूटनीति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है।
- यह परंपरा 2009 में रूस से शुरू हुई, विश्वास बनाने में सहायक है।
18th BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगी. विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए कार्यक्रम के मुताबिक ब्रिक्स लीडर्स शाम 4:25 मिनट पर भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी का दौरा करेंगे. इसके बाद एक पारिवारिक फोटो और एक संयुक्त वृक्षारोपण समारोह होगा. पहले दिन का समापन शाम 7: 30 पर भारत मंडपम के लेवल 3 पर प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित रात्रि भोज के साथ होगा. आइए जानते हैं कि यह ब्रिक्स गाला डिनर क्या है और यह परंपरा कैसे शुरू हुई?
ब्रिक्स गाला डिनर क्या है?
ब्रिक्स गला डिनर ब्रिक्स की अध्यक्षता करने वाले देश द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह है. यह आमतौर पर शिखर सम्मेलन के पहले दिन के बाद आयोजित किया जाता है और सरकार या फिर राज्य के प्रमुखों और सदस्य देशों के दूसरे बड़े प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है. यह आयोजन एक औपचारिक भोजन से काफी ज्यादा है. यह नेताओं को आधिकारिक बैठकों के संरचित वातावरण से दूर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, अनौपचारिक बातचीत और कूटनीति का मौका देता है.

यह परंपरा कहां से शुरू हुई?
यह परंपरा 2009 में येकातेरिनबर्ग रूस में पहले आधिकारिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से शुरू हुई थी. मेजबान देश के रूप में रूस ने आने वाले नेताओं के लिए एक औपचारिक राजकीय भोज का आयोजन किया था. यह प्रथा बाद में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ जुड़ गई.
रात्रि भोज में क्या होता है?
इस रात्रि भोज के मेनू का चयन स्थानीय पाक परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है और इसमें पारंपरिक, क्षेत्रीय या फिर खास तौर से तैयार किए गए व्यंजन शामिल हो सकते हैं. रात्रि भोज के साथ अक्सर संस्कृतिक प्रदर्शन भी होते हैं. लोक संगीत, शास्त्रीय प्रदर्शन, नृत्य और दूसरी कलात्मक प्रस्तुतियां मेजबान देश को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करने की अनुमति देता है.
औपचारिक कूटनीति से विराम
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय मामलों, विकास, प्रौद्योगिकी, व्यापार और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा होती है. दिन भर की औपचारिक बैठकों के बाद गाला डिनर काफी ज्यादा आरामदायक वातावरण देता है.
नेता अनौपचारिक रूप से बातचीत कर सकते हैं, विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और व्यक्तिगत संबंध बना सकते हैं. यह बातचीत मुद्दों पर काफी ज्यादा खुले तौर पर चर्चा करने के अवसर पैदा करके औपचारिक कूटनीति को पूरक कर सकती हैं.

रात्रि भोज कूटनीतिक रूप से क्यों जरूरी है?
गाला डिनर सॉफ्ट पावर का एक बड़ा उदाहरण है. भोजन, कला, संगीत और आथित्य के जरिए से मेजबान देश अंतरराष्ट्रीय नेताओं के सामने अपनी सांस्कृतिक और विश्व दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है. यह तनाव कम करने का माहौल भी देता है. जब देश बड़े नीतिगत मुद्दों पर सहमति नहीं जाता पाते हैं तो अनौपचारिक बातचीत से नेताओं को कैमरों और औपचारिक बातचीत के दबाव के बिना एक दूसरे की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है.
अनौपचारिक रूप से आयोजित किए जाने पर कुछ राजनयिक बातचीत आसान हो जाती है. नेता पर्सनल बातचीत के दौरान संवेदनशील विषयों पर चर्चा कर सकते हैं जिन्हें औपचारिक सत्र में संबोधित करना मुश्किल होगा. इसी के साथ रात्रि भोज खुद समझौते को नहीं बनाता, ऐसे अनौपचारिक आदान-प्रदान विश्वास बनाने और बाद की बातचीत के दौरान आम सहमति के लिए स्थिति को बनाने में मदद कर सकते हैं.
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परंपरा कैसे विकसित हुई?
2009 के बाद से ब्रिक्स के फॉर्मेट में काफी बदलाव आया है. मूल ब्रिक समूह में ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे. दक्षिण अफ्रीका 2011 में शामिल हुआ और इसके बाद ब्रिक को ब्रिक्स में बदल दिया गया. इसी के साथ समूह की सांस्कृतिक और राजनयिक गतिविधि में एक मजबूत अफ्रीकी आयाम आया. ब्रिक्स के विस्तार ने शिखर सम्मेलन में प्रतिनिधित्व की विविधता को और भी आगे बढ़ा दिया है. मिस्र, इथोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया सहित देश अब भाग लेते हैं.
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