'फिल्म में किसी वर्ग का अपमान नहीं..' घूसखोर पंडत विवाद खत्म! निर्माता ने बदला नाम,सुप्रीम कोर्ट ने मामले का किया निपटारा
मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर पिछले कई दिनों से कंट्रोवर्सी हो रही है. अब मेकर्स ने इसके टाइटल को बदलने का फैसला लिया है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया है.

फिल्म 'घूसखोर पंडत' के खिलाफ दर्ज याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर अब और कानूनी विवाद न किया जाए. ऐसा निर्माता की तरफ से दिए गए इस आश्वासन के बाद किया कि इस फिल्म में किसी भी वर्ग का अपमान नहीं किया गया है, जिस नाम को लेकर विवाद था, उसे भी वापस ले लिया गया है.
12 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्माता को कड़ी फटकार लगाई थी.कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी वर्ग को अपमानित करने या सामाजिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. निर्माता को नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने पूछा था कि वह फिल्म का नाम बदलकर क्या रखने वाला है?.
ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया नाम की संस्था के सचिव अतुल मिश्रा की तरफ से दाखिल याचिका में फिल्म को लेकर आपत्ति जताई गई थी. फ़िल्म के निर्माता नीरज पांडे की तरफ से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले को लेकर कुछ याचिकाओं की सुनवाई की थी. निर्माता फिल्म का नाम बदलने को तैयार है.
हलफनामा में पूछे गए थे ये सवाल
हालांकि, निर्माता की इस दलील से जस्टिस बी वी नागरत्ना और उज्जवल भुइयां की बेंच संतुष्ट नहीं हुई थी. जस्टिस नागरत्ना ने कहा था, "पहले हमें यह बताइए कि आप नाम बदलकर क्या रखने वाले हैं? आप हलफनामा देकर यह भी बताइए कि आपकी फिल्म में किसी वर्ग के बारे में कोई आपत्तिजनक बात है या नहीं?".
इसके बाद जस्टिस नागरत्ना ने कहा था, "संविधान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है. लेकिन किसी भी वर्ग को अपमानित करना गलत है." अब निर्माता की तरफ से कहा गया है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कोई दलील नहीं देना चाहते. वह याचिकाकर्ता की तरफ से जताई गई चिंता का सम्मान करते हैं और आवश्यक सुधार के लिए तैयार हैं.
फिल्म निर्माता की तरफ से कहा गया कि उन्होंने विवादित नाम वापस ले लिया है. अभी नया नाम तय नहीं हुआ है. पुराने नाम से जुड़ा प्रचार हर जगह से हटा लिया गया है. निर्माता ने यह भी बताया कि फिल्म में किसी भी वर्ग का अपमान नहीं किया गया है. कहानी के मुख्य किरदार को लोग 'पंडत' कह कर बुलाते हैं. निर्माता की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने मामले का निपटारा कर दिया.
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Source: IOCL

























