सनम बक्शी: इंडियन कंटेंपरेरी आर्ट को एक नया आयाम देने वाली आर्टिस्ट
ऐसे भी आर्टिस्ट होते हैं जो लगातार बेहतरीन काम करते रहते हैं, लेकिन सुर्ख़ियों में आने से कतराते हैं। सनम बक्शी कलाकारों की इसी श्रेणी में आती हैं.

Sanam Bakshi: क्रिएटिव क्षेत्रों में आमतौर पर दो तरीके के कलाकार देखने को मिलते हैं. एक तरफ वह, जो अपने काम के ज़रिए अथवा उसके इतर अक्सर ख़बरों और चर्चाओं में बने रहना पसंद रहते हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी आर्टिस्ट होते हैं जो लगातार बेहतरीन काम करते रहते हैं, लेकिन सुर्ख़ियों में आने से कतराते हैं। सनम बक्शी कलाकारों की इसी श्रेणी में आती हैं.
डेवलपमेंट की पढ़ाई
एक सेल्फ मेड इंडस्ट्रियलिस्ट के घर जन्मी सनम ने पेंसिल्वेनिया के प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल ऑफ बिज़नेस से रियल-एस्टेट डेवलपमेंट की पढ़ाई की है. नई दिल्ली में दूर तक फैली, घनी मगर बेहद क़रीने से सजी हरियाली के बीच बनी एक शानदार हवेली में रहने और पले-बढ़े होने के बावजूद भी सनम एक इलूसिव आर्टिस्ट हैं. सनम की माने तो उन्होंने अपना ज़्यादातर बचपन अपनी छत पर एकांत में बिताया ताकि वह सुकून से पेंटिंग कर सकें और ड्रॉइंग एवं क्ले-मॉडलिंग की ट्यूशन प्राप्त कर सकें.
सनम के बनाए आर्ट पीस
छोटी सी उम्र में ही आर्ट को लेकर अपने पैशन को पहचान लेने वाली सनम ने पिछले दो दशकों में ड्रॉइंग और पेंटिंग से लेकर स्टेन्ड-ग्लास आर्ट, धातु की मूर्तियां, टेपेस्ट्री, संगमरमर के मुहार, वुड- कट्स और फर्नीचर आदि कई क्षेत्रों में काफ़ी शानदार काम किया है. राजनीति, नौकरशाही से लेकर उद्योग, फ़ैशन एवं सिनेमाजगत तक में सनम की कलाकारी के क़द्रदानों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है। दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले इन चमकते सितारों के चमचमाते अल्ट्रा-लग्ज़री घरों अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सनम के बनाए चुनिंदा आर्ट पीस प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए हैं। हालांकि इस सब के बावजूद भी सनम मानती हैं कि वह अभी भी सीख रही हैं और उनकी क्रिएटिव जर्नी को अभी और कई बड़े मुक़ाम हासिल करने हैं।

रियल-एस्टेट डेवलपमेंट
एक प्रभावशाली कलाप्रेमी परिवार से जुड़े होने और आइवी लीग यूनिवर्सिटी में रियल-एस्टेट डेवलपमेंट की पढ़ाई ने उन्हें दिल्ली जैसे शहरों में, आवासीय और वाणिज्यिक, दोनों तरह के स्थानों को अपनी कला से सजाने के लिए तैयार किया है और एक कलाकार के रूप में मज़बूत आधार दिया है। सनम की महत्वाकांक्षाओं के बारे में बात की जाए तो वह और भी ज्यादा दिलचस्प हैं। सनम अपनी कला की समझ को विशेषज्ञों की कुशल कार्यक्षमता के साथ जोड़कर, ऐसे शहरों और क़स्बों को विकसित करना चाहती हैं जहां वास्तुशिल्प के लिहाज़ से अद्वितीय इमारतें हों- जैसा कि गाउडी ने बार्सिलोना में किया था और औरबिंदो ने ओरोविल में। सनम के काम पर सिर्फ़ एक नज़र डालने भर से ही आर्ट की बारीकियां समझने वाला कोई भी व्यक्ति जान सकता है कि वह अपने लक्ष्य के बेहद क़रीब हैं।
प्रिंट और टेक्नोलॉजी
डिजिटल प्रिंट और टेक्नोलॉजी के आने के साथ, कलाकार जहां धीरे-धीरे हमारे फोन केस और कवर, वॉल आर्ट प्रिंट आदि को डिजाइन करने का रास्ता अपना रहे हैं वहीं सनम जैसे कलाकार यह साबित कर रहे हैं कि तकनीकी विकास, एक सच्चे कलाकार को पारंपरिक कला से दूर नहीं कर सकती। सनम की तकनीक पारंपरिक है, लेकिन उनकी रचनाएं कई मायनों में मॉडर्न और काफ़ी अलग हैं.
लार्जर-देन-लाइफ
सनम के काम के कुछ लार्जर-देन-लाइफ नमूनों को देखने के बाद कई कलाप्रेमियों का कहना था कि उन्हें यूं लगा कि मानो जैसे उन्हें कोई आध्यात्मिक अनूभूति हुई है। सनम के काम पर ग़ौर करने के बाद यह बात काफ़ी हद तक सच मालूम पड़ती है. प्राचीनकालीन यूरोपियन चर्च की खिड़कियों की याद दिलाता हुआ (मगर अल्ट्रा-मॉडर्न थीम की झलक लिए) उनकी स्टेन्ड-ग्लास पेंटिंग से निकलता हुआ प्रकाश और रंगों का विस्मयकारी समन्वय हो या फिर स्टील और पीतल से बनाई गई मूर्तियों में जीवन का दर्शन, उनके द्वारा डिज़ाइन की गई एक भूमिगत सुरंग की संगमरमर से ढकी दीवारों की ज्यामिति की समरूपता और मोहक शांति हो अथवा चित्रों में सहेजा हुआ उनका सादापन, किसी भी आर्ट-लवर के लिए एक स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस से कम नहीं है.

कड़ी मेहनत और गहन ध्यान की जरूरत के बावजूद, सनम ने स्टेन्ड- ग्लास आर्ट परंपरा को एक नई और सुदृढ़ पहचान दी है. प्राचीन रोम और मिस्र से शुरू होने वाले और हज़ारों सालों से कला के लिए इस्तेमाल हो रहे स्टेंड-ग्लास, कला के सबसे बेहतरीन प्रारूपों में से एक है. गुजरात में इसे 18वीं शताब्दी की शुरुआत में देखा जा सकता है लेकिन भारत में इसके प्रमुख पुनरुद्धार का श्रेय सनम जैसे कर्मठ कलाकारों को दिया जा सकता है. अपने क्रिएटिव थिकिंग प्रोसेस के बारे में पूछे जाने पर सनम कहती हैं वह महीनों तक आकार और रंग के रचनात्मक रहस्यों में लीन रहना पसंद करती हैं, तब तक, जब तक कि वह वास्तव में वह नहीं पा जाती जिसे वह ढूंढ रही हैं.
अपनी प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर, सनम उत्साहित होकर कहती हैं कि, ’’मुझे गुस्ताव क्लिम्त अपनी फिगर्स की सुंदरता के लिए, पाब्लो पिकासो अपने कलर पैलेट और रूपों को चित्रित करने में हासिल महारत के लिए, बास्कियात अपने विद्रोही स्वभाव और बैंक्सी अपनी एनॉनिमिटी के कारण बहुत प्रभावित करते हैं. इसके अलावा सादगी के प्रति अपने आदरभाव और पैटर्न्स के उपयोग के लिए- हेनरी मैटिस, अपने साहसिक मिनिमलिज़्म के लिए- रोथको और मानव शरीर विशेषकर स्त्री शरीर के चित्रण हेतु अपनी ग्रन्थियुक्त शैली के लिए- एगॉन शीलह भी मुझे बहुत प्रभावित करते हैं.’’
पहली मुलाकात में, सनम का व्यक्तित्व उस स्टेन्ड-ग्लास की आभा जैसा ही लगता है जिसे वह बेहद ख़ूबसूरती से संवारती हैं. उनकी कलात्मक प्रतिभा हर किसी का मन मोह लेने वाली है. प्रकृति की रक्षा करने का उनका संदेश, सनम को जहां एक नियमित कलाकार से अलग पहचान देता है तो वहीं नैतिकता के साथ समझौता न करने की ज़िद- सनम को एक सम्पूर्ण कलाकर बनाती है. वीगन जीवनशैली को चुनने वाली सनम, इसे कभी-कभार अपनी कला में भी दर्शाती हैं. कला जगत में एक बड़े वर्ग के बीच सनम अपनी इसी संवेदनशीलता के कारण भी जानी-पहचानी जाती हैं. सनम का मानना है कि उनका काम दुनिया को वीगन जीवनशैली अपनाने के लिए एक शांतिपूर्ण लेकिन शक्तिशाली निमंत्रण है.
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