महिलाओं के बीच पावर गेम्स की कहानी दिखाएगी ‘एक्यूज्ड’, कोंकणा सेन शर्मा नें कहा- 'ये फिल्म सोच बदल देगी'
Accused: कोंकणा सेन शर्मा अपनी फिल्म ‘एक्यूज्ड’ को लेकर काफी एक्साइटेड हैं. ये फिल्म ऑफिस में महिलाओं के बीच पावर, यौन शोषण के आरोप और उलझे हुए रिश्तों की कहानी दिखाती है.

एक्ट्रेस कोंकणा सेन शर्मा अपनी अपकमिंग फिल्म ‘एक्यूज्ड’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने खुलकर बात की और कहा कि ऐसी कहानियां सामने आनी चाहिए जो अक्सर दब जाती हैं या जिन पर ज्यादा चर्चा नहीं होती है. उनके मुताबिक जो कहानियां कम सुनी जाती हैं वही असल में समाज को आईना दिखाती हैं.
फिल्म में दिखेगा पावर गेम और रिश्तों की उलझन
‘एक्यूज्ड’ कार्यस्थल पर महिलाओं के बीच पावर डायनामिक्स, यौन उत्पीड़न के आरोप और इंसानी रिश्तों की जटिलताओं को गहराई से दिखाती है. कोंकणा का मानना है कि ऐसी स्टोरी इसलिए जरूरी है क्योंकि समाज को हर एंगल से चीजें देखनी चाहिए. ये फिल्म सिर्फ एंटरटेन नहीं करती बल्कि लोगों को सोचने पर मजबूर भी करती है. ये लोगों के नजरिए को चैलेंज करती है और आसान जवाब नहीं देती है.
कब और कहां होगी रिलीज
ये फिल्म 27 फरवरी को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है. ‘एक्यूज्ड’ एक ऐसी महिला की कहानी है जिस पर उसके ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगता है.
आईएएनएस से बातचीत में कोंकणा ने कहा कि फिल्म की स्क्रिप्ट आम सोच को पूरी तरह पलट देती है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर वक्त हम महिलाओं को पीड़ित या सर्वाइवर के तौर पर देखते हैं लेकिन आरोपी के रूप में बहुत कम ही देखते है. आंकड़े बताते हैं कि अपराध ज्यादातर पुरुष करते हैं ये सही है लेकिन महिलाएं भी ऐसा कर सकती हैं और ऐसा होता भी है.
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सिक्के का दूसरा पहलू दिखाती है कहानी
कोंकणा ने आगे कहा कि फिल्म की सबसे खास बात ये है कि ये उन कहानियों को सामने लाती है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. इसमें कार्यस्थल पर दो महिलाओं के बीच पावर का खेल, उनके रिश्ते में असमानता और उम्र का बड़ा अंतर दिखाया गया है. कहानी पूरी तरह से सिक्के का दूसरा पहलू सामने रखती है. यहां आरोपी भी महिला है और पीड़ित भी महिला ही है. उम्र का फर्क, नौकरी की पोजीशन और रिश्ते की जटिलता ये सब चीजें हमारे अपने पूर्वाग्रहों को सामने लाती हैं.
ब्लैक-व्हाइट नहीं ग्रे शेड्स की है कहानी
एक्ट्रेस का कहना है कि जब किसी महिला पर शोषण का आरोप लगता है तो समाज के लिए उस पर विश्वास करना आसान नहीं होता है खासकर तब जब आरोपी ताकतवर पोजीशन में हो और रिश्ते में बराबरी न हो. कोंकणा ने साफ कहा कि ये फिल्म लोगों को सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा नजरिया कैसे काम करता है. ये कोई ब्लैक और व्हाइट कहानी नहीं है बल्कि ग्रे शेड्स में चलती है. इसमें कोई किरदार पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं है और यही बात इसे ज्यादा असली और रियल बनाती है.
Source: IOCL


























