Karnataka Election 2023: कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था कर्नाटक, पांच सालों में बदल गई तस्वीर, जानें सियासी मायने
Karnataka Election 2023 Date: कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटों पर एक चरण में मतदान होना है. बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस का काफी कुछ इन चुनावों में दांव में लगा नजर आ रहा है.

Karnataka Assembly Election: कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 (Karnataka Assembly Election 2023) के लिए बिगुल बज चुका है. 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा के लिए 10 मई को वोटिंग होगी और 13 मई को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे. नतीजे सामने आने के बाद तय हो जाएगा कि राज्य को अगला मुख्यमंत्री कौन मिलेगा. कर्नाटक में सभी राजनीतिक दलों ने जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ है. यह चुनाव इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा. चलिए आपको बताते हैं पिछले पांच सालों में कर्नाटक की राजनीति में कितनी उठापटक हुई है और कितने बदलाव देखने को मिले हैं.
2018 के चुनाव के बाद बनी जेडी-एस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के गिरने के बाद जुलाई 2019 में कर्नाटक में बीजेपी सत्ता में आई थी. कर्नाटक में वर्तमान में बीजेपी की ही सरकार है. 2019 में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के कई बागी विधायकों की बगावत का फायदा बीजेपी को मिला था. वो इन विधायकों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रही थी. वर्तमान में बीजेपी के 121 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 70 और जेडीएस के पास 30 विधायक हैं.
2018 से लेकर अब तक बदले कितने सीएम
कर्नाटक में साल 2018 के बाद से मुख्यमंत्रियों को लेकर खूब सियासी हलचल रही. 17 मई 2018 को बीएस येदियुरप्पा सीएम बने और 19 मई को उन्होंने बहुमत टेस्ट से पहले ही इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 23 मई 2018 से लेकर 26 जुलाई 2019 तक जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाया गया.
कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन वाली ये सरकार जुलाई 2019 में अल्पमत में आकर गिर गई. विधानसभा में कांग्रेस पार्टी और जनता दल के कई सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद बीजेपी ने राज्य सरकार का गठन किया. एक बार फिर कर्नाटक का मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को बनाया गया. 26 जुलाई 2019 से लेकर 28 जुलाई 2021 तक उन्होंने राज्य की कमान संभाली. उनके इस्तीफे के बाद फिर 28 जुलाई 2021 को बासवराज बोम्मई को सीएम बनाया गया.
कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था कर्नाटक
कुछ दशकों पहले तक कर्नाटक को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था. विधानसभा से लेकर लोकसभा तक सांसदों की अच्छी-खासी संख्या होती थी, लेकिन अब कांग्रेस पर सियासी ग्रहण लग गया है. नगर निगम चुनाव के बाद से तस्वीर और साफ हो गई है कि कांग्रेस को फिर से जगह बनाने के लिए खूब पसीना बहाना पड़ेगा. नगर निगम चुनाव में मेयर और उप मेयर का चुनाव भी बीजेपी ने जीत लिया था. यहां तक कि बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह जिले कलबुर्गी में महापौर और उप महापौर पद के चुनाव में जीत हासिल की. अब देखना ये होगा की कांग्रेस फिर से यहां अपनी पकड़ बनाने को लेकर सफल होती है या नहीं.
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Source: IOCL
















