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UPSC Success Story: तिरपाल की छत से आईएएस तक, गरीबी को मात देकर अफसर बने पवन कुमार

बुलंदशहर के गरीब मजदूर के बेटे पवन कुमार ने तमाम मुश्किलों और गरीबी के बावजूद हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में आईएएस बनकर अपने सपने को हकीकत में बदला.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना आसान नहीं. लाखों छात्र हर साल इस कठिन परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही अपने सपनों को सच कर पाते हैं. बुलंदशहर जिले के रघुनाथपुर गांव के रहने वाले पवन कुमार ने न केवल कठिन परिस्थितियों का सामना किया, बल्कि अपने हौसले और लगन के दम पर आईएएस बनने का सपना साकार किया. उनकी कहानी गरीबी, संघर्ष और उम्मीद की मिसाल है.

पवन का परिवार बेहद साधारण था. उनके पिता मुकेश कुमार, मनरेगा में मजदूरी करते थे. घर की हालत इतनी खराब थी कि दीवारें टूट चुकी थीं और छत की जगह तिरपाल और पॉलिथिन का सहारा लेना पड़ता था. बारिश या धूप में भी परिवार यही तिरपाल से खुद को ढकता था. इतने अभाव के बीच, पवन के अंदर पढ़ाई की गहरी लगन और कुछ कर गुजरने की चाह ने जन्म लिया.

पवन के परिवार ने उनके सपनों को पंख देने के लिए अपनी सारी हिम्मत और मेहनत लगा दी. पिता ने 3200 रुपये में सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदा ताकि पवन पढ़ाई कर सके. मां ने अपने थोड़े‑बहुत गहने बेच दिए और बहनों ने भी अपनी छोटी‑छोटी बचत को जोड़कर पवन को कोचिंग के खर्च में मदद की. यह परिवार की निस्वार्थ भक्ति और विश्वास था जिसने पवन को आगे बढ़ाया.

कठिनाइयों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी

पवन कुमार ने सिविल सेवा की तैयारी दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में शुरू की. शुरुआत में उन्हें लगातार असफलता मिली. पहले दो प्रयासों में सफलता हाथ नहीं लगी. लेकिन पवन ने हार नहीं मानी. उनके पास पीछे लौटने का कोई विकल्प नहीं था. उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की, ज्यादातर समय सेल्फ स्टडी में बिताया और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया. उनकी मेहनत रंग लाई. UPSC 2023 के नतीजे में पवन ने 239वीं रैंक हासिल की और आईएएस बनने में सफलता प्राप्त की. गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इतिहास रच दिया.

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शिक्षा का सफर

पवन ने अपने प्रारंभिक शिक्षा की पढ़ाई बुलंदशहर के नवोदय विद्यालय से की. इसके बाद ग्रेजुएशन इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरा किया. उन्होंने जेएनयू में एमए के लिए एडमिशन लिया, लेकिन एक साल बाद अपनी प्राथमिकता के अनुसार इसे छोड़ दिया.

2022 में पवन का चयन सिर्फ एक अंक की कमी के कारण नहीं हो पाया था. यह असफलता भी उनके हौसले को नहीं तोड़ पाई. गरीबी, कठिनाइयाँ और सीमित संसाधन उनके सपने की राह में बाधा नहीं बन पाए. उन्होंने अपने जुनून और आत्मविश्वास से आईएएस बनने का इतिहास रच दिया.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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