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दूसरे प्रयास में सफलता, मोतिहारी के विवेक कुमार ने UPSC में हासिल की 882 वीं रैंक, IIT बॉम्बे से किया है बीटेक

बिहार के मोतिहारी के रहने वाले विवेक कुमार ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में दूसरे प्रयास में 882वीं रैंक हासिल की है. उन्होंने IIT बॉम्बे से पढ़ाई की है, आइए उनका सफर जानते हैं...

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है. आज यूपीएससी ने सिविल सर्विस एग्जाम का रिजल्ट जारी किया. इसमें बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी निवासी विवेक कुमार ने अपने दूसरे प्रयास में 882वीं रैंक हासिल कर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है.

दूसरे प्रयास में मिली सफलता
विवेक कुमार ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में दूसरे प्रयास में 882वीं रैंक हासिल की है. ABP Live से बातचीत में उन्होंने बताया कि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी. लगातार मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति के कारण उन्हें दूसरे प्रयास में यह बड़ी सफलता मिली.

2024 में दिया था पहला प्रयास
विवेक कुमार ने साल 2024 में UPSC परीक्षा का पहला प्रयास दिया था. हालांकि उस प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना और तैयारी में सुधार किया. इसके बाद 2025 में दिए गए दूसरे प्रयास में उन्होंने 882वीं रैंक हासिल कर अपनी मेहनत को सफल बना दिया.

2022 में IIT बॉम्बे से किया BTech
विवेक कुमार ने वर्ष 2022 में IIT बॉम्बे से BTech की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पैदा हुआ. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ UPSC की तैयारी शुरू कर दी.

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एक साल की कोचिंग से मिली दिशा
UPSC की तैयारी के दौरान विवेक कुमार ने लगभग एक साल तक कोचिंग भी ली. कोचिंग के माध्यम से उन्हें परीक्षा के पैटर्न, सिलेबस और सही रणनीति को समझने में मदद मिली. इसके साथ ही उन्होंने सेल्फ-स्टडी पर भी काफी जोर दिया और नियमित रूप से मॉक टेस्ट व रिवीजन करते रहे.

साधारण परिवार से रखते हैं ताल्लुक
विवेक कुमार बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के रहने वाले हैं. उनके पिता अवधेश बैठा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं और उनकी माता का नाम सोनी कुमारी है. साधारण परिवार में पले-बढ़े विवेक को बचपन से ही पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया गया. परिवार के सहयोग और समर्थन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

माता-पिता और दोस्तों को दिया सफलता का श्रेय
विवेक कुमार अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और दोस्तों को देते हैं. उन्होंने खास तौर पर अपने दोस्तों रवि और मनोज कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि तैयारी के कठिन समय में दोनों ने उनका मनोबल बढ़ाया और हमेशा उनका साथ दिया.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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