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UPSC में AIR-2 हासिल करने के बाद भी IAS नहीं चुनेंगी राजेश्वरी सुवे, जानें क्यों चुनी अलग राह?

UPSC AIR-2 Rajeshwari Suve: यूपीएससी 2025 में AIR-2 हासिल करने वाली राजेश्वरी सुवे ने आईएएस के बजाय इस सर्विस चुनने का फैसला किया है. जान लीजिए इस बड़े फैसले के पीछे की कहानी.

UPSC AIR-2 Rajeshwari Suve: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिनी जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट सामने आ चुका है. इस बार भी कई शानदार कहानियां सामने आई हैं. राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर टॉप किया. तो वहीं तमिलनाडु की राजेश्वरी सुवे एम ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की है. आम तौर पर इतनी ऊंची रैंक पाने वाले उम्मीदवार IAS सर्विस चुनना पसंद करते हैं. 

लेकिन राजेश्वरी का सपना थोड़ा अलग है. उन्होंने साफ कहा है कि उनका लक्ष्य प्रशासनिक कुर्सी नहीं है. इसलिए इतनी शानदार रैंक मिलने के बाद भी वह आईएएस के बजाय IAS की बजाए इस सर्विस में जाने का फैसला कर चुकी हैं. जानें क्या है राजेश्वरी सुवे की कहानी और आखिर क्यों लिया उन्होंने IAS न बनने का फैसला.

जाॅब करते हुए हासिल की UPSC टॉप रैंक 

राजेश्वरी सुवे एम तमिलनाडु के मदुरई की रहने वाली हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्रेजुएशन किया है और पढ़ाई के दौरान ही सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी. फिलहाल वह डिप्टी कलेक्टर के तौर पर ट्रेनिंग ले रही हैं. प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी जारी रखी. य

ही उनकी मेहनत और अनुशासन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. देशभर के लाखों उम्मीदवार हर साल इस परीक्षा में बैठते हैं. लेकिन बहुत कम लोग ही टॉप रैंक तक पहुंच पाते हैं. ऐसे में काम के साथ तैयारी कर AIR-2 हासिल करना उनकी मेहनत और लगन को दिखाता है. 

यह भी पढ़ें: UPSC सिविल सर्विस में 958 कैंडिडेट्स सफल, जानें इसमें कितने बनेंगे IAS-IPS और IFS-IRS?

इस वजह से IAS नहीं बनेंगी

यूपीएसी में सेकेंट टाॅपर होने के बावजूद भी राजेश्वरी सुवे आईएएस नहीं बनना चाहती हैं. जबकि बहुत से लोग आईएस न बन पाने के चलते दोबारा अटेंप्ट देते हैं. अपने इस फैसले के पीछे राजेश्वरी ने एक इंटरव्यू में बताती हैं कि वर्दी वाली नौकरी का सपना उनका कॉलेज के दिनों से ही है. उस समय वह एनसीसी कैडेट थीं और वहीं से उन्हें डिसिप्लिन, लीडरशिप और सर्विस का एक्सपीरिएंस मिला. एनसीसी के दौरान उन्होंने पुलिस और सुरक्षा सेवाओं से जुड़े काम को करीब से समझा. 

इसी एक्सपीरिएंस ने उनके मन में आईपीएस बनने का लक्ष्य तय कर दिया. उनका मानना है कि पुलिस सेवा में रहकर समाज के बीच सीधे काम करने और बदलाव लाने का मौका मिलता है. यही वजह है कि शानदार रैंक मिलने के बाद भी उन्होंने आईएएस नहीं बल्कि आईपीएस को ही अपनी पहली पसंद बताया है.

यह भी पढ़ें: Anuj Agnihotri UPSC Topper: कौन हैं अनुज अग्निहोत्री और कहां के रहने वाले, जिन्हें यूपीएससी की टॉपर लिस्ट में मिला पहला नंबर?

 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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