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UPSC में डिसेबल कैंडिडेट्स के लिए हैं ये खास अधिकार, जानें क्या मिलती हैं सुविधाएं

UPSC दिव्यांग उम्मीदवारों को 4% आरक्षण, उम्र में छूट और परीक्षा में विशेष सुविधाएं देता है. आइए जानते हैं क्या-क्या सुविधाएं कैंडिडेट्स को मिलती हैं.

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कई तरह के अधिकार और रियायतें सुनिश्चित की हैं. सरकारी नौकरी में समान अवसर देने के लिए आयोग ने 4% रिक्तियों को बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले उम्मीदवारों (कम से कम 40% अक्षमता वाले) के लिए आरक्षित किया है. इसके अलावा आयोग ने उम्र सीमा में छूट, अतिरिक्त प्रयास और परीक्षा में विशेष सुविधाएं जैसी रियायतें भी दी हैं.

रिक्तियों में आरक्षण और पात्रता

UPSC में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कुल 4% आरक्षण तय किया गया है. इस आरक्षण का वितरण विभिन्न डिसेबिलिटी कैटेगरी में किया गया है. 1% आरक्षण उन उम्मीदवारों के लिए जो पूरी या आंशिक दृष्टिहीन (Blindness / Low Vision) रखते हैं. 1% आरक्षण श्रवण (Hearing Impairment) वाले उम्मीदवारों के लिए. इसके अलावा मल्टीपल डिसेबिलिटी वाले उम्मीदवारों के लिए एक अलग श्रेणी बनाई गई है. इस श्रेणी के उम्मीदवार अन्य व्यक्तिगत श्रेणियों में आरक्षण के लिए पात्र नहीं होते.

क्या है पात्रता?

किसी भी आरक्षण का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार के पास मान्य डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है. यह सर्टिफिकेट केंद्र या राज्य सरकार के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया गया होना चाहिए.

उम्र सीमा और प्रयासों में रियायत

दिव्यांग उम्मीदवारों को UPSC में उम्र सीमा में विशेष छूट दी जाती है. इसके साथ ही, सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में अधिक प्रयासों की अनुमति भी है. इसका उद्देश्य उन उम्मीदवारों को परीक्षा का पर्याप्त मौका देना है, जिनकी अक्षमता के कारण सामान्य उम्मीदवारों की तुलना में तैयारी और प्रदर्शन में समय लग सकता है.

परीक्षा में विशेष सुविधाएं और मदद

स्क्राइब/लेखक का विकल्प: उम्मीदवार परीक्षा से 7 दिन पहले तक अपने स्क्राइब का नाम बदल सकते हैं. यह सुविधा दृष्टिहीन या लिखने में असमर्थ उम्मीदवारों के लिए है.
स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर: दृष्टिहीन उम्मीदवारों के लिए UPSC को निर्देशित किया गया है कि वे स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का पूरा प्लान तैयार करें.
इन सुविधाओं का उद्देश्य परीक्षा में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना और उन्हें तकनीकी मदद के जरिए स्वतंत्र रूप से उत्तर देने में सक्षम बनाना है.

कानूनी ढांचा और अधिकार

दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकार संविधान और सिविल सेवा नियमों के तहत संरक्षित हैं. UPSC ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट और मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को भी लागू किया है. आयोग का लक्ष्य है कि परीक्षा प्रक्रिया सभी उम्मीदवारों के लिए निष्पक्ष और समावेशी हो.

कौन-कौन से लाभ मिलते हैं

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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