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UPSC ने छात्रों को दी बड़ी राहत, 3 नए एग्जाम सेंटर बने उम्मीद की नई राह, 23 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने किया चयन

UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़कर लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है.

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  • दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई.

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिने जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा को लेकर इस बार लाखों युवाओं में अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है. कोई गांव से तैयारी कर रहा है तो कोई बड़े शहर में किराए के कमरे में दिन-रात किताबों में डूबा है. इसी बीच संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए तीन नए परीक्षा केंद्र जोड़ दिए हैं. खास बात यह है कि इन नए सेंटरों को छात्रों ने हाथों हाथ लिया और 23 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने इन्हें अपनी पसंद बनाया.

अब सिविल सेवा परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों की कुल संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है. इस बार भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ को नए परीक्षा केंद्र के रूप में शामिल किया गया है. UPSC का कहना है कि इससे पुराने केंद्रों पर बढ़ती भीड़ कम होगी और छात्रों को यात्रा में भी आसानी मिलेगी.

लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर

UPSC की ओर से जारी बयान के अनुसार, करीब 23 हजार उम्मीदवारों ने इन नए सेंटरों को चुना है. इससे आसपास के शहरों में पड़ने वाले दबाव में काफी कमी आई है. हर साल बड़ी संख्या में छात्र दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं, जिससे सफर, रहने और खर्च की परेशानी बढ़ जाती है. लेकिन इस कदम के बाद हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है.

UPSC चेयरमैन अजय कुमार ने कहा कि आयोग परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा आसान, सुविधाजनक और छात्र हित में बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. उनका कहना है कि नए सेंटर जोड़ने का मकसद सिर्फ भीड़ कम करना नहीं, बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधा देना भी है.

किस सेंटर को कितने छात्रों ने चुना?

नए जोड़े गए तीनों सेंटरों को छात्रों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला. भुवनेश्वर सेंटर को सबसे ज्यादा 10,656 आवेदन मिले. इससे कटक सेंटर पर दबाव कम हुआ. कानपुर सेंटर को 6,938 छात्रों ने चुना, जिससे लखनऊ सेंटर पर भीड़ कम हुई. मेरठ सेंटर को 5,902 उम्मीदवारों ने चुना. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छात्रों को खास फायदा मिला और उन्हें अब गाजियाबाद पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

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इस रविवार होगी प्रारंभिक परीक्षा

UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा इस रविवार को आयोजित होने जा रही है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही उम्मीदवारों को मिलती है. इस परीक्षा के जरिए IAS, IPS, IFS समेत कई बड़ी सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है. इस बार UPSC को कुल 8,19,372 आवेदन मिले हैं. यह संख्या दिखाती है कि देश के युवाओं में सिविल सेवा को लेकर कितना आकर्षण है.

दिव्यांग छात्रों के लिए भी खास व्यवस्था

UPSC ने इस बार दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है. आयोग ने कहा कि जिन छात्रों को विशेष सुविधा की जरूरत थी, उन्हें उनकी पसंद के सेंटर देने की कोशिश की गई. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सीटें भी बनाई गईं. दिल्ली क्षेत्र में ही करीब 805 PwBD (दिव्यांग) उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र मिला. इसे UPSC का बड़ा और संवेदनशील कदम माना जा रहा है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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