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मेडिकल कॉलेजों के लिए NMC की सख्ती, 70 संस्थानों को नोटिस; तुरंत लगानी होगी CCTV व्यवस्था

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 70 मेडिकल कॉलेजों को अनिवार्य CCTV और NVR नियमों का पालन नहीं करने पर नोटिस जारी किया है.

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  • एनएमसी ने 70 मेडिकल कॉलेजों में नियम उल्लंघन पाया.
  • अनिवार्य 25 सीसीटीवी, एनवीआर और रिकॉर्डिंग नियम नहीं माने गए.
  • आयोग ने तुरंत इन नियमों का पालन करने का निर्देश दिया.
  • ये नियम कॉलेजों में पारदर्शिता और निगरानी के लिए हैं.

अगर आपका मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो अब मुश्किल बढ़ सकती है. आयोग ने ऐसे 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों की पहचान की है, जिन्होंने अब तक अनिवार्य CCTV कैमरे और निगरानी प्रणाली से जुड़े नियम पूरे नहीं किए हैं. एनएमसी ने इन सभी संस्थानों को तुरंत नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है.

एनएमसी की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस में साफ कहा गया है कि उसके दायरे में आने वाले सभी मेडिकल कॉलेजों को तय मानकों के मुताबिक परिसर में 25 सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे. इसके साथ ही नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (NVR) लगाना और कम से कम 30 दिनों तक कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखना भी जरूरी है. इतना ही नहीं, कॉलेजों को अपने एनवीआर की फीड आयोग के साथ भी साझा करनी होगी.

आयोग ने बताया कि यह कोई नया नियम नहीं है. इन निर्देशों को पहले भी अलग-अलग नियमों और अधिसूचनाओं के जरिए जारी किया जा चुका है. इनमें यूजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (UGMSR-2023), पीजी मेडिकल एजुकेशन स्टैंडर्ड रेगुलेशंस (PGMSR-2023 संशोधन) और एमएआरबी रेगुलेशंस-2023 शामिल हैं. इसके बावजूद कई मेडिकल कॉलेज अब तक इनका पालन नहीं कर पाए हैं.

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NMC ने क्या कहा?

एनएमसी के मुताबिक, जिन संस्थानों ने अभी तक अपने सीसीटीवी सिस्टम और एनवीआर को आयोग से नहीं जोड़ा है, उनसे लगातार संपर्क किया गया. कई बार याद दिलाने के बाद भी कुछ कॉलेजों ने आवश्यक व्यवस्था नहीं की. इसी वजह से अब आयोग ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संस्थानों को तुरंत नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं.

आयोग का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में सीसीटीवी व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इससे संस्थानों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है और नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है.

नोटिस में उन 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों का जिक्र किया गया है, जो अभी तक निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं. आयोग ने इन संस्थानों से बिना देरी किए सीसीटीवी कैमरे लगाने, एनवीआर स्थापित करने और उसकी फीड साझा करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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