JPSC में लगे धांधली के ये आरोप, जानें परीक्षा के बाद कैसे भरवाते थे OMR शीट?
JPSC की अलग-अलग परीक्षा की जांच में सामने आए बयानों में ओएमआर शीट, ऑन स्क्रीन मार्किंग, मेरिट से जुड़े डाटा और मुख्य परीक्षा के अंकों में बदलाव का दावा किया गया है.

JPSC की अलग-अलग परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर चल रही सीआईडी जांच में परीक्षा प्रक्रिया के कई स्तरों पर हेरफेर के आरोप भी सामने आए हैं. जांच में सामने आए बयानों में ओएमआर शीट, ऑन स्क्रीन मार्किंग, मेरिट से जुड़े डाटा और मुख्य परीक्षा के अंकों में बदलाव का दावा किया गया है. इनमें सबसे गंभीर आरोप यह है कि परीक्षा खत्म होने के बाद खाली छोड़े गए ओएमआर के गोले कथित तौर पर सही उत्तर के तौर पर भरे जाते थे और इसके बाद अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने का प्रयास किया जाता था. हालांकि इन सभी आरोपों की सीआईडी जांच कर रही है.
JPSC में किस-किस तरह की धांधली के आरोप?
सीआईडी के सामने दर्ज बयानों के अनुसार फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, 14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षा समेत कुछ अन्य परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के पैसे लेकर पास कराने का आरोप लगाया गया है. आरोपियों में शामिल उस्मान के बयान के अनुसार FRO परीक्षा में करीब 100, 14वीं JPSC में 100 से ज्यादा और बैकलॉग परीक्षा में 50 से 100 अभ्यर्थियों को पैसे देकर परीक्षा पास करने का दावा किया गया है. सीआईडी इन दावों का सत्यापन कर रही है. इसके अलावा जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के कर्मचारियों और अधिकारियों पर ओएमआर और OMS सिस्टम में हेरफेर करने के आरोप लगाए गए हैं. तकनीकी सपोर्ट स्टाफ उस्मान के बयान के अनुसार ओएमआर से जुड़ा काम प्रदीप कुमार सिंह और ओएमएस से संबंधित काम हेमंत देखता था. हेमंत और संजय दोनों पर सिस्टम में कथित टेंपरिंग और मैनिपुलेशन का आरोप लगाया गया है.
परीक्षा के बाद कैसे भरवाते थे OMR शीट?
आरोपियों के बयानों के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों को मार्कशीट में सवालों के जवाब वाले गोले खाली छोड़ने के लिए कहा जाता था. परीक्षा खत्म होने के बाद इन ओएमआर शीट को प्रोसेसिंग के लिए लाया जाता था. आरोप है कि खाली छोड़े गए गोलों के बाद में सही उत्तर के रूप में भरा जाता था. TDPL के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह के बयान में भी इस तरह मार्कशीट में बदलाव किए जाने का जिक्र है. FRO प्रारंभिक परीक्षा के बाद करीब 15 अभ्यर्थियों की लिस्ट दिए जाने और उनकी ओएमआर शीट में सही उत्तर भरकर उन्हें परीक्षा में सफल करने का बयान भी सामने आया है. इसके बदले प्रति अभ्यर्थियों 8 से 10 लाख रुपये लेने का दावा किया गया है.
ये भी पढ़ें-झारखंड छात्र आंदोलन के बीच 2 और JPSC परीक्षाएं रद्द, जानें अब तक कितने एग्जाम रद्द?
OMS सिस्टम में भी हेरफेर का आरोप
जांच में सिर्फ ओएमआर शीट तक ही मामला सीमित नहीं बताया गया. बयानों में ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OMS सिस्टम में भी बदलाव किए जाने की बात कही है. इसके अलावा ओएमआर स्कैनिंग, मेरिट के अंकों से जुड़े डेटा, मुख्य परीक्षा के अंक और इंटरव्यू के लिए कोड तैयार करने की प्रक्रिया में भी हेर फेर का आरोप है. इससे परीक्षा में अभ्यर्थियों के उत्तर रिकॉर्ड होने से लेकर उनके अंक मेरिट में शामिल होने तक की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए. हालांकि OMS सिस्टम में हुई छेड़छाड़ के दावों की भी सीआईडी जांच कर रही है और अभी इन्हें जांच के दौरान सामने आए आरोपों के तौर पर ही देखा जा रहा है.
आंसर की पहले शेयर करने का भी आरोप
कुछ परीक्षाओं के आंसर की मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही संबंधित कर्मचारियों के साथ साझा किए जाने का दावा किया गया है. आरोप है कि इससे ओएमआर और OMS प्रक्रिया में हेरफेर करने में मदद मिली. जांच के अनुसार अभ्यर्थियों के रोल नंबर के आधार पर उनकी ओएमआर शीट की पहचान की जाती थी और खाली छोड़े गए जवाबों में बाद में सही उत्तर दर्ज करने का आरोप है.
मुख्य परीक्षा में भी सेटिंग का आरोप
मामला सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है. एसीएफ और FRO की मुख्य परीक्षा में भी अभ्यर्थियों को चयन दिलाने के लिए कथित तौर पर पैसे लेने और परीक्षा के उत्तर लिखवाने की व्यवस्था करने के आरोप भी सामने आए. बयानों के अनुसार रांची के हजारीबाग में कई जगह पर अभ्यर्थियों के लिए उत्तर लिखने की व्यवस्था की गई थी. यहां दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर अभ्यर्थियों के उत्तर लिखवाने का आरोप भी लगाया गया है.
ये भी पढ़ें-UPSC NDA-NA 2 परीक्षा की तारीख घोषित, 13 सितंबर को दो शिफ्ट में होगा एग्जाम
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI






















