बैन के बाद खुला राज! 2022 से जम्मू यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में मौजूद थी विवादित किताब
जम्मू-कश्मीर में विवादित किताबों के सरकारी स्कूलों तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया है.

- प्रशासन ने सभी शैक्षणिक सामग्री की व्यापक ऑडिट भी सुनिश्चित की.
जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित तौर पर विवादित सामग्री वाली किताबें मिलने के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. मामले में तीन प्रकाशकों की गिरफ्तारी के साथ-साथ अब विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की भी जांच शुरू कर दी गई है. प्रशासन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी किसी भी सामग्री की जगह नहीं हो सकती, जो आतंकवाद, अलगाववाद या देश विरोधी विचारों को बढ़ावा देती हो.
जांच के दौरान सामने आया कि 'Personalities and Legends of J&K' नाम की किताब पिछले कुछ वर्षों से जम्मू विश्वविद्यालय की केंद्रीय लाइब्रेरी में भी मौजूद थी. यह किताब राजनीतिक विज्ञान विभाग की मांग पर पुस्तकालय के लिए खरीदी गई थी. विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इसे लाइब्रेरी से हटाकर सील कर दिया है. विभाग की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
क्यों उठे किताब पर सवाल?
इस किताब पर आरोप है कि इसमें कुछ अलगाववादी नेताओं और उग्रवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है. पुलिस ने इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रकाशकों को गिरफ्तार किया. अधिकारियों का कहना है कि किताब की सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इसे स्कूलों और पुस्तकालयों तक किस प्रक्रिया के तहत पहुंचाया गया.
कैसे पहुंची पुस्तक विश्वविद्यालय तक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह किताब पहली बार वर्ष 2017 में प्रकाशित हुई थी. बाद में छात्रों और शोधार्थियों की मांग के आधार पर इसे विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी के लिए खरीदा गया. विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि किताबों की खरीद निर्धारित नियमों के तहत होती है. विभाग पहले मांग भेजते हैं, फिर अधिकृत विक्रेताओं से पुस्तकें खरीदी जाती हैं. अधिकारियों ने यह भी बताया कि संबंधित किताब को बहुत कम छात्रों ने इश्यू कराया था.
अब पूरे अकादमिक सिस्टम की होगी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सभी सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में मौजूद शैक्षणिक सामग्री का व्यापक ऑडिट शुरू कर दिया है. इस जांच में किताबों के अलावा शोध पत्र, जर्नल, थीसिस, डिसर्टेशन और डिजिटल सामग्री भी शामिल होगी. उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संस्थान में ऐसी सामग्री मौजूद न हो, जो आतंकवाद, उग्रवाद, कट्टरपंथ या अलगाववाद को बढ़ावा देती हो.
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि पुस्तक खरीदने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी किताबें अधिकृत विक्रेताओं से खरीदी जाती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हजारों पुस्तकों की सामग्री को खरीद से पहले पूरी तरह पढ़ पाना संभव नहीं होता. आमतौर पर प्रकाशकों की कैटलॉग और छात्रों या शोधार्थियों की मांग के आधार पर किताबों का चयन किया जाता है.
स्कूलों तक कैसे पहुंचीं विवादित किताबें?
जांच में सामने आया है कि विश्वविद्यालय में मौजूद संस्करण और सरकारी स्कूलों में पहुंचा संस्करण अलग-अलग प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किया गया था. स्कूलों में भेजी गई प्रतियां केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत वितरित की गई थीं. इन्हीं प्रतियों को लेकर विवाद सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की.
250 से ज्यादा प्रतियां पहुंचीं सरकारी स्कूलों
अधिकारियों के अनुसार दोनों विवादित पुस्तकों की 250 से अधिक प्रतियां जम्मू, उधमपुर, रामबन और बारामूला समेत कई जिलों के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची थीं. इसके बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी.
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