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चीन में रोबोट्स की वजह से बढ़ी बेरोजगारी, जानें किन सेक्टरों में छिन रहीं नौकरियां?

चीन में AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल से फैक्ट्रियों, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में रोबोट तेजी से इंसानों की जगह ले रहे हैं, जिससे पारंपरिक नौकरियों पर खतरा बढ़ता जा रहा है.

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  • लॉजिस्टिक्स, परिवहन में भी मशीनें मानव नौकरियों को घटा रही.

दुनिया की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था माने जाने वाले चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का तेजी से विस्तार हो रहा है. नई तकनीक ने जहां उत्पादन की रफ्तार बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर लाखों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा कर दिया है. असेंबली लाइन, फैक्ट्री वर्क, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में मशीनें धीरे-धीरे इंसानों की जगह ले रही हैं.

चीन की कई बड़ी कंपनियां अब ऐसी फैक्ट्रियों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिन्हें 'डार्क फैक्ट्री' कहा जाता है. इन फैक्ट्रियों की खास बात यह है कि यहां उत्पादन के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत नहीं पड़ती. रोबोट और ऑटोमेटेड मशीनें दिन-रात बिना रुके काम करती हैं. चूंकि इन मशीनों को रोशनी, आराम या छुट्टी की जरूरत नहीं होती, इसलिए इन्हें डार्क फैक्ट्री कहा जाता है. उद्योग जगत का मानना है कि इससे उत्पादन लागत कम होती है और काम की गति भी बढ़ती है, लेकिन इसका असर मानव श्रमिकों की नौकरियों पर साफ दिखाई देने लगा है.

सबसे बड़ा बदलाव कहां?

रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे ज्यादा बदलाव इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर उद्योग में देखने को मिल रहा है. पहले जिन फैक्ट्रियों में हजारों कर्मचारी मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की असेंबली करते थे, वहां अब रोबोट बड़ी संख्या में वही काम कर रहे हैं. कई बड़े असेंबली प्लांट्स में मशीनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण असेंबली लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों की मांग पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है.

ऑटोमोबाइल और मशीन निर्माण क्षेत्र भी तेजी से ऑटोमेशन की ओर बढ़ रहा है. खासकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बनाने वाली कंपनियां अपनी फैक्ट्रियों में अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ आधुनिक उत्पादन इकाइयों में 98 प्रतिशत तक काम मशीनों के जरिए किया जा रहा है. वेल्डिंग, पेंटिंग, मेटल फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और कई अन्य प्रक्रियाएं अब पूरी तरह ऑटोमेटेड होती जा रही हैं. इससे उत्पादन तो तेज हुआ है, लेकिन पारंपरिक फैक्ट्री कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर घटे हैं.

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इन पर भी मार

टेक्सटाइल और गार्मेंट उद्योग भी इस बदलाव से अछूता नहीं है. कपड़ा उद्योग में अब एआई आधारित कैमरे और रोबोटिक मशीनें कपड़ों की सिलाई, गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग जैसे काम तेजी से कर रही हैं. मशीनें लगातार काम कर सकती हैं और उनसे गलती की संभावना भी कम रहती है. यही वजह है कि कई फैक्ट्रियां मानव श्रमिकों की संख्या घटाकर मशीनों पर ज्यादा भरोसा कर रही हैं.

लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस सेक्टर में भी तकनीक का असर तेजी से दिखाई दे रहा है. बड़े गोदामों में सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, छंटाई करने और पैकेज तैयार करने का काम अब ऑटोमेटेड रोबोट कर रहे हैं. वहीं, लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए भी सर्विस रोबोट्स और स्मार्ट सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ने लगा है. इससे इस क्षेत्र में पारंपरिक नौकरियों की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है.

वहीं, दूसरी तरफ चीन के कई शहरों में ड्राइवरलेस कारों और रोबोटैक्सी का परीक्षण और संचालन बढ़ रहा है. यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो टैक्सी और राइड-हेलिंग सेवाओं से जुड़े लाखों ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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