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IIT बॉम्बे का ग्लोबल प्लान, 2030 तक अमेरिका में पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस; नई रणनीति से बदलेगी तकनीकी शिक्षा की तस्वीर

IIT बॉम्बे ने 2030 तक अमेरिका में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस खोलने की योजना बनाई है और नई रणनीति के जरिए वैश्विक तकनीकी शिक्षा में बड़ा कदम रखने की तैयारी कर रहा है.

देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल IIT बॉम्बे अब दुनिया में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी कर चुका है. संस्थान ने 2030 तक अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कैंपस शुरू करने का रोडमैप तैयार किया है, और इसका पहला कदम अमेरिका में एक IIT Bombay Centre की स्थापना हो सकता है. यह पहल संस्थान के ग्लोबल विस्तार को नई दिशा देने वाली होगी, जिसे हाल ही में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने मंजूरी दी है. यह पूरा प्लान “Strategy Plan 2026-2030 & Beyond” नाम से पेश किया गया है, जिसमें आने वाले वर्षों में IIT बॉम्बे को दुनिया की शीर्ष तकनीकी यूनिवर्सिटीज की लिस्ट में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.

इस रणनीति को तैयार करने में शिक्षकों, छात्रों, पूर्व छात्रों और उद्योग के विशेषज्ञों का योगदान शामिल है. नई योजना तीन मुख्य आधारों पर काम करेगी.  IIT बॉम्बे अब ऐसी शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जिसमें छात्रों को ज्यादा प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा, परियोजनाओं पर काम करने का मौका मिलेगा और सीखने के नए तरीके विकसित किए जाएंगे. इसी दिशा में संस्थान दुनिया की टॉप 50 यूनिवर्सिटीज के साथ 2+2 अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम, संयुक्त शोध, छात्र एक्सचेंज, डुअल डिग्री और अन्य ग्लोबल प्रोग्राम शुरू करने की योजना बना रहा है.

इनका बढ़ेगा इस्तेमाल

संस्थान का मानना है कि आने वाले समय में हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा. इसलिए IIT बॉम्बे इन विषयों को हर डिसिप्लिन का हिस्सा बनाने जा रहा है, ताकि जो छात्र यहां से निकलें वे अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ तो हों ही, साथ में AI और नई तकनीक का भी पूरा ज्ञान रखें. इसका उद्देश्य ऐसे तकनीकी प्रोफेशनल तैयार करना है, जो बदलती दुनिया के साथ एडॉप्ट कर सकें और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हों.

योजना का दूसरा बड़ा हिस्सा है सीमांत (फ्रंटियर) क्षेत्रों में शोध का नेतृत्व. इसमें AI और मशीन लर्निंग, जलवायु तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, मेडटेक, एडवांस्ड मटेरियल, स्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा रिसर्च सेटअप तैयार किया जाएगा. इसके लिए नए इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर बनाए जाएंगे और विशेषज्ञ फैकल्टी की भर्ती की जाएगी, ताकि IIT बॉम्बे इन क्षेत्रों में देश का नेता बन सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाए.

योजना का तीसरा हिस्सा है इंडस्ट्री और समाज से जुड़े नवाचार को बढ़ावा देना. इसका मकसद है कि IIT बॉम्बे में होने वाले शोध को सीधे उद्योग तक पहुंचाया जाए, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जाए और ऐसे आइडियाज को बढ़ावा दिया जाए जो समाज में सीधे बदलाव ला सकें. इसी सोच के साथ IIT बॉम्बे ने मंगलवार को एक बड़ी पहल करते हुए अपना डीप-टेक वेंचर कैपिटल फंड लॉन्च किया है.

IIT बॉम्बे ने की ये शुरुआत

IIT बॉम्बे ने 250 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि के साथ Y-Point Venture Capital Fund की शुरुआत की है, जिसे SINE के तहत संचालित किया जाएगा. यह फंड उन स्टार्टअप्स को समर्थन देगा जिनके आइडिया विज्ञान और तकनीक पर आधारित होते हैं और जिन्हें बाजार तक पहुंचने में ज्यादा समय और निवेश की जरूरत होती है. यह फंड 25-30 डीप-टेक स्टार्टअप्स को प्री-सीड से लेकर सीड स्टेज तक 15 करोड़ रुपये तक का निवेश दे सकेगा.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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