Digital Education In India: स्कूलों में डिजिटल एजुकेशन का बढ़ता ट्रेंड, क्या आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल जाएगी पढ़ाई?
Digital Education In India: पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल तकनीक का तेजी से विस्तार हुआ है. बैंकिंग, एंटरटेनमेंट और सरकारी सेवाओं की तरह अब शिक्षा भी डिजिटल माध्यमों पर तेजी से शिफ्ट हो रही है.

Digital Education In India: भारत में शिक्षा का रूप तेजी से बदल रहा है, अब पढ़ाई केवल ब्लैक बोर्ड, किताबों और क्लास रूम तक नहीं रही. स्मार्टफोन, इंटरनेट, एआई और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म ने सीखने के तरीकों को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि डिजिटल एजुकेशन और एड टेक सेक्टर देश की शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई का मिक्स मॉडल यानी हाइब्रिड एजुकेशन सामान्य व्यवस्था बन सकती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि क्या स्कूलों में डिजिटल एजुकेशन का बढ़ता ट्रेंड आने वाले वर्षों में पूरी तरह पढ़ाई बदल देगा.
मोबाइल और इंटरनेट ने बदली पढ़ाई की तस्वीर
पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल तकनीक का तेजी से विस्तार हुआ है. बैंकिंग, एंटरटेनमेंट और सरकारी सेवाओं की तरह अब शिक्षा भी डिजिटल माध्यमों पर तेजी से शिफ्ट हो रही है. स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ती पहुंच ने शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए भी क्वालिटी से भरपूर शिक्षा की पहुंच आसान बनाई है. कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूल बंद हुए, तब ऑनलाइन पढ़ाई ने शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई. डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है और आज लाखों छात्र नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं.
एआई से मिल रही सीखने की सुविधा
एआई शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है. एआई आधारित लर्निंग सिस्टम अब छात्रों की पढ़ाई का विश्लेषण कर उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं. इससे कमजोर छात्रों को एक्स्ट्रा सहायता मिल रही है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को एडवांस स्तर की पढ़ाई उपलब्ध कराई जा रही है. एआई के जरिए छात्रों के सवालों का जवाब, टेस्ट एनालिसिस, प्रदर्शन का मूल्यांकन और व्यक्तिगत सुझाव देना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. इससे पढ़ाई ज्यादा प्रभावी और छात्रों की जरूरत के अनुसार बनने लगी है.
नई शिक्षा नीति ने भी बढ़ाया डिजिटल लर्निंग पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा में तकनीक के उपयोग को विशेष महत्व दिया है. सरकार पहले से ही दीक्षा, स्वयं और ई पाठशाला जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों को फ्री स्टडी सामग्री उपलब्ध करा रही है. इसके अलावा सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने और आधुनिक तकनीक को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कई पहल शुरू की है.
स्कूलों में एआई और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की होगी पढ़ाई
देशभर के स्कूलों में अब कक्षा 3 से 8 तक के स्टूडेंट्स के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की बुनियादी शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है. इस पहल का उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों से परिचित कराना, उनमें तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है. इसके लिए नई शिक्षण सामग्री तैयार की जा रही है और शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे छात्रों को सरल तरीके से इन विषयों की जानकारी दे सकें.
क्या आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल जाएगी पढ़ाई?
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्यूचर में केवल ऑनलाइन या केवल ऑफलाइन पढ़ाई के बजाय दोनों का हाइब्रिड मॉडल ज्यादा प्रभावी साबित होगा. छात्र क्लासरूम में पढ़ाई करने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए एक्स्ट्रा पढ़ाई से जुड़ी चीजें, रिकॉर्डेड लेक्चर, ऑनलाइन टेस्ट और व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी प्राप्त कर सकेंगे. इसके अलावा वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी, गेमीफिकेशन और माइक्रो क्रैडेंशियल्स जैसी नई तकनीक का उपयोग भी धीरे-धीरे शिक्षा का हिस्सा बनता जा रहा है, जिससे पढ़ाई ज्यादा इंटरएक्टिव और व्यावहारिक बन सकती है. हालांकि डिजिटल शिक्षा के विस्तार के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई है. देश के ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट कनेक्टिविटी पर्याप्त नहीं है. सभी छात्रों के पास स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है.
ये भी पढ़ें-UPSC परीक्षा से पहले बड़ा एक्शन, AI से की फॉर्मों की जांच, 569 उम्मीदवारों के आवेदन हुए रद्द
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI























