BJP Social Media Convener: कितने पढ़े-लिखे हैं दीपक म्हस्के? अमित मालवीय की जगह संभालेंगे BJP का IT Cell
BJP Social Media Convener: दीपक म्हस्के छत्तीसगढ़ से जुड़े बीजेपी नेता और पूर्व केमिस्ट्री प्रोफेसर हैं. अब उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय सोशल मीडिया और डिजिटल मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है.

BJP Social Media Convener: भारतीय जनता पार्टी में एक बड़ा बदलाव हुआ है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है, जिसमें डिजिटल और सोशल मीडिया के मोर्चे पर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. साल 2015 से बीजेपी के आईटी सेल की कमान संभाल रहे अमित मालवीय की जगह अब छत्तीसगढ़ के नेता दीपक म्हस्के को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. यानी करीब 11 साल बाद पार्टी के इस अहम डिजिटल पद पर नया चेहरा आया है. इस बदलाव के बाद से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दीपक म्हस्के कौन हैं और वे पढ़ाई-लिखाई में कितने आगे हैं.
पेशे से केमिस्ट्री के प्रोफेसर रहे हैं दीपक म्हस्के
दीपक म्हस्के का ताल्लुक छत्तीसगढ़ से है और वे लंबे समय से राज्य में बीजेपी के संगठन से जुड़े हुए हैं. राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने केमिस्ट्री यानी रसायन विज्ञान के प्रोफेसर के तौर पर काम किया था. पढ़ाने के साथ-साथ उन्हें डेटा को समझने और उसका विश्लेषण करने का भी अच्छा अनुभव है, खासकर चुनावी आंकड़ों और सरकारी योजनाओं से जुड़े डेटा को समझने में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में उनके प्रोफेसर वाले अनुभव की तारीफ की थी और कहा था कि इससे उनके कामकाज में वैज्ञानिक सोच का फायदा मिलेगा. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे राजनीति और संगठन के काम में दिलचस्पी लेनी शुरू की और आगे चलकर पार्टी के डिजिटल मोर्चे पर एक अहम चेहरा बन गए.
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आईटी सेल का पुराना अनुभव और नई जिम्मेदारी
दीपक म्हस्के के लिए आईटी और सोशल मीडिया का काम नया नहीं है. वे इससे पहले भी छत्तीसगढ़ बीजेपी के आईटी संगठन में काम कर चुके हैं और साल 2018 में वे राज्य की आईटी सेल के समन्वयक भी रह चुके हैं. इस अनुभव के आधार पर ही अब उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर सोशल मीडिया कन्वीनर के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. बीजेपी ने इस बदलाव के साथ-साथ कई राज्यों में सोशल मीडिया सह-समन्वयक भी नियुक्त किए हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी अपने डिजिटल नेटवर्क को और मजबूत और व्यापक बनाना चाहती है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया रणनीति को और असरदार बनाना चाहती है.
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