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CBSE School Opening Process: कैसे खोला जाता है सीबीएसई स्कूल, कितना आता है खर्च और कैसे मिलती है मान्यता? जान लीजिए

CBSE School Opening Process : सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी मंजूरी, स्टाफ नियुक्ति और सीबीएसई एफिलिएशन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है.

CBSE School Opening Process: सीबीएसई (CBSE) से जुड़े स्कूलों की मांग लगातार बढ़ रही है. बेहतर शिक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय स्तर का सिलेबस और पूरे देश में मान्यता मिलने की वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों को सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं. यही कारण है कि कई लोग शिक्षा के क्षेत्र में निवेश कर अपना सीबीएसई स्कूल शुरू करने की योजना बनाते हैं. हालांकि सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी मंजूरी, स्टाफ नियुक्ति और सीबीएसई एफिलिएशन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. सीबीएसई ने पिछले कुछ सालों में एफिलिएशन से जुड़े नियमों को आसान बनाया है, लेकिन स्कूल खोलने के लिए तय नियमों को पूरा करना आज भी जरूरी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि सीबीएसई स्कूल कैसे खोला जाता है, कितना खर्च आता है और कैसे मान्यता मिलती है? 

सीबीएसई स्कूल कैसे खोला जाता है?

सीबीएसई स्कूल शुरू करने के लिए सबसे पहले एक ट्रस्ट, सोसायटी या कंपनी एक्ट की धारा 8 के तहत संस्था का गठन करना जरूरी होता है. कोई भी व्यक्ति सीधे अपने नाम से सीबीएसई स्कूल नहीं चला सकता है. स्कूल का संचालन किसी रजिस्टर्ड संस्था के माध्यम से ही किया जाता है. इसके बाद स्कूल के लिए जमीन की व्यवस्था करनी होती है और संबंधित स्थानीय नियमों के अनुसार लैंड यूज की मंजूरी लेनी पड़ती है. 

स्कूल के लिए कितनी जमीन जरूरी होती है?

सीबीएसई के नियमों के अनुसार, स्कूल के पास तय लैंड होना जरूरी है. सामान्य तौर पर न्यूनतम लैंड जरूरत लगभग 6,000 वर्ग मीटर (करीब 1.5 एकड़) मानी जाती है, हालांकि यह स्थान और क्षेत्र के अनुसार अलग भी हो सकती है. कई मामलों में शहरों और महानगरों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं. जमीन स्कूल ट्रस्ट या संस्था के नाम पर होनी चाहिए या फिर लंबे समय की लीज पर ली गई होनी चाहिए. 

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स्कूल बनाने में कितना खर्च आ सकता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1000 छात्रों की क्षमता वाले एक सामान्य सीबीएसई स्कूल को बनाने में खर्च उसकी लोकेशन, जमीन और सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. स्कूल का निर्माण आमतौर पर तीन चरणों में किया जाता है, जिसमें पहले 20,000 से 25,000 वर्ग फुट, फिर 12,000 से 15,000 वर्ग फुट और बाद में 6,000 से 10,000 वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण किया जाता है. वहीं निर्माण और फर्नीचर की लागत लगभग 1,000 से 1,400 रुपये प्रति वर्गफुट तक मानी जाती है. इसके अलावा खेल सुविधाएं, कंप्यूटर और तकनीकी उपकरण, स्कूल बसें, मार्केटिंग, लैंडस्केपिंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर भी अलग से खर्च करना पड़ता है. यही वजह है कि विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य सीबीएसई स्कूल शुरू करने के लिए शुरुआती स्तर पर करीब 2 से 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा निवेश की जरूरत पड़ सकती है, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ यह लागत और भी बढ़ सकती है. 

राज्य सरकार से मान्यता क्यों जरूरी है?

स्कूल शुरू करने के लिए सबसे पहले संबंधित राज्य सरकार या शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करनी होती है. स्कूल, स्टाफ और जरूरी सुविधाएं तैयार होने के बाद स्थानीय शिक्षा विभाग के तहत निरीक्षण किया जाता है. सभी शर्तें पूरी होने पर राज्य स्तर पर स्कूल को अनुमति दी जाती है.राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही आगे सीबीएसई एफिलिएशन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. 

सीबीएसई स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही

सीबीएसई के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 तक देश और विदेश में 30,786 से ज्यादा स्कूलों को एफिलिएशन दिया जा चुका है. पिछले कुछ सालों में एफिलिएशन नियमों को आसान बनाने के बाद नए सीबीएसई स्कूलों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 

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