CBSE Answer Sheet Photocopy: छात्रों को मिली धुंधली Answer Sheet, बड़ा सवाल- क्या टीचर्स ने भी चेक कीं ऐसी ही कॉपी?
CBSE OSM Update: सीबीएसई बोर्ड के छात्रों को आंसर शीट की बेहद धुंधली स्कैन कॉपी (Blurred Answer Sheet) मिली हैं. छात्रों का सवाल- क्या टीचर्स ने भी ऐसी ही कॉपी चेक की थीं? जानें पूरा विवाद.

सीबीएसई (CBSE) की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे घोषित हो चुके हैं. हर साल की तरह इस साल भी कई छात्र ऐसे हैं, जो अपने मार्क्स से संतुष्ट नहीं हैं. उन्हें लगता है कि उन्होंने परीक्षा में जितना अच्छा लिखा था, उसके अनुसार उन्हें नंबर नहीं मिले हैं. ऐसे छात्रों के लिए सीबीएसई एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाता है, जिसमें छात्र अपनी जांची हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी मंगा सकते हैं.
वहीं, सीबीएसई के 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई है. कई छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें मिली स्कैन कॉपी इतनी ज्यादा धुंधली (Blurry) है कि उसमें लिखा हुआ कुछ भी पढ़ा नहीं जा सकता. अब इस मामले ने बहुत बड़ा सवाल उठा दिया है.
CBSE Re-evaluation 2026: क्या है पूरा मामला?
अपने मार्क्स से असंतुष्ट छात्रों ने सीबीएसई के नियमों के अनुसार, फीस भरकर अपनी 'आंसर शीट' की फोटोकॉपी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था. प्रक्रिया के तहत, पोर्टल पर स्टूडेंट्स की कॉपियों की पीडीएफ (PDF) अपलोड कर दी गई. जब स्टूडेंट्स ने अपनी कॉपी डाउनलोड करके देखी तो उनके होश उड़ गए. छात्रों द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट्स में साफ दिख रहा है कि स्कैन की गई कॉपी की क्वालिटी बेहद खराब है. पन्ने काले और धुंधले नजर आ रहे हैं और छात्र अपनी ही हैंडराइटिंग नहीं पढ़ पा रहे हैं. एक स्टूडेंट ने अपनी धुंधली कॉपी का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल्स पर शेयर करते हुए नाराजगी जाहिर की.
CBSE Re-evaluation 2026: क्या टीचर्स ने भी चेक कीं ऐसी ही कॉपी?
दरअसल, सीबीएसई अब कॉपियों को मैनुअल (हाथों से) चेक करने के बजाय OSM (On-Screen Marking) तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इस धुंधली कॉपी को देखने के बाद सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या मशीन पर ऐसी धुंधली कॉपियां ही अपलोड की गईं, जिनकी वजह से मार्क्स कम आए हैं.
CBSE On-Screen Marking System: कैसे काम करता है OSM?
इस सिस्टम के तहत परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों की असली आंसर शीट को बड़े-बड़े स्कैनर्स के जरिए स्कैन करके PDF में बदल दिया जाता है. इसके बाद ये डिजिटल कॉपियां देश भर में बैठे चेकर्स (Teachers) की कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं. टीचर कंप्यूटर पर ही इस स्कैन कॉपी को पढ़ते हैं और डिजिटल तरीके से नंबर देते हैं. इससे टोटल करने में होने वाली गलतियां लगभग खत्म हो जाती हैं.
CBSE Re-evaluation 2026: तो फिर दिक्कत कहां है?
छात्र का सवाल बिल्कुल सीधा और तार्किक है. उसका कहना है कि अगर सीबीएसई के सर्वर से मुझे मेरी कॉपी इतनी धुंधली मिली है तो क्या जब टीचर इसे कंप्यूटर पर चेक कर रहे थे, तब उन्हें भी यह इतनी ही धुंधली दिखी होगी? अगर इसका जवाब 'हां' है तो यह लाखों छात्रों के भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है. अगर टीचर को स्क्रीन पर छात्र का लिखा हुआ जवाब पढ़ने में नहीं आया होगा तो उन्होंने नंबर किस आधार पर दिए? क्या उन्होंने बिना पढ़े ही अंदाज से औसत नंबर दे दिए? इस एक सवाल ने छात्रों और अभिभावकों में बेचैनी बढ़ा दी है.
CBSE Re-evaluation 2026: छात्रों के सामने री-इवैल्यूएशन (Re-evaluation) का संकट
सीबीएसई की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है.
- अंकों का सत्यापन (Verification of Marks): सिर्फ टोटल चेक होता है.
- फोटोकॉपी प्राप्त करना (Obtaining Photocopy): अपनी जांची हुई कॉपी देखना.
- पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation): अगर किसी खास सवाल की चेकिंग में गलती लगे तो उसे दोबारा चेक करने के लिए आवेदन करना. इसके लिए प्रति प्रश्न फीस लगती है.
ऐसे में जो स्टूडेंट्स Re-evaluation के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे बुरी तरह फंस गए हैं. नियम के मुताबिक, छात्र को बताना होता है कि उसे प्रश्न संख्या 4 या 5 में दिक्कत है. जब कॉपी इतनी धुंधली है कि न तो सवाल का नंबर दिख रहा है, न जवाब और न ही टीचर से मिले मार्क्स तो वह चैलेंज कैसे करे?
पैरेंट्स ने की ये डिमांड
इस स्थिति को देखते हुए स्टूडेंट्स और पैरेंट्स ने सीबीएसई से कुछ डिमांड की हैं.
- साफ कॉपी तुरंत भेजी जाए: जिन छात्रों को ब्लर या धुंधली स्कैन कॉपी मिली हैं, उनके पोर्टल पर तुरंत साफ पीडीएफ दोबारा अपलोड की जाए.
- समय सीमा बढ़ाई जाए: जब तक साफ कॉपी नहीं मिल जाती, तब तक री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ाया जाए.
ये भी पढ़ें: सॉफ्टवेयर क्रैश, ब्लर कॉपियां और भारी बैकलॉग', स्कैनिंग करने वाले टेक्निशियन का बड़ा खुलासा
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI
Source: IOCL

























