Prateek Yadav Death: सियासत के साए में पले प्रतीक कैसे बने बॉडी बिल्डर, जानें कौन-कौन सी डिग्रियां थीं उनके पास?
प्रतीक यादव का जन्म भले ही पावरफुल राजनीतिक परिवार में हुआ, लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा बहुत ही अनुशासित माहौल में हुई. उनकी शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में हुई.

उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सियासी घराने 'यादव परिवार' की जब बात होती है तो चर्चा अक्सर दांव-पेच और चुनाव तक सीमित रह जाती है. हालांकि, मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने ऐसी राह चुनी, जो इस परिवार के लिए बिल्कुल अलग थी. लोग उन्हें उनकी 'लेम्बोर्गिनी' या उनकी 'मस्कुलर बॉडी' के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि प्रतीक यादव के पास कौन-कौन सी डिग्रियां थीं और उन्होंने अपनी पढ़ाई कहां से की थी?
राजनीति और जिम से हटकर आज हम बात करेंगे प्रतीक यादव की एजुकेशन प्रोफाइल की. दरअसल, वह एक ऐसे स्टूडेंट थे, जिसने दुनिया के बेहतरीन संस्थानों से पढ़ाई की, लेकिन बाद में अपने जुनून को अपना पेशा बना लिया.
लखनऊ से लंदन तक का सफर
प्रतीक यादव का जन्म भले ही पावरफुल राजनीतिक परिवार में हुआ, लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा बहुत ही अनुशासित माहौल में हुई. उनकी शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में हुई. स्कूल के दिनों से ही प्रतीक पढ़ाई में काफी होनहार थे, हालांकि उस वक्त उनका वजन बड़ी चुनौती था. स्कूलिंग के बाद प्रतीक ने हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाने का फैसला किया. उन्होंने दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में से एक लंदन विश्वविद्यालय (University of London) का रुख किया.
कौन-सी डिग्रियां थीं प्रतीक यादव के पास?
प्रतीक यादव की शैक्षणिक योग्यता आपको हैरान कर सकती है. उन्होंने किसी छोटे-मोटे कोर्स के बजाय बेहद गंभीर विषय को अपनी पढ़ाई के लिए चुना था. प्रतीक ने लंदन के मशहूर स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) से डिग्री हासिल की. बता दें कि यह संस्थान दुनिया भर में अपनी बेहतरीन शिक्षा और ग्लोबल लीडर्स तैयार करने के लिए जाना जाता है. प्रतीक ने पढ़ाई के दौरान मैनेजमेंट और बिजनेस की बारीकियों को सीखा. उनकी पढ़ाई का फोकस इकोनॉमिक डिवेलपमेंट और ग्लोबल बिजनेस पर रहा. यही कारण है कि आज वह रियल एस्टेट बिजनेस और जिम चेन को पेशेवर तरीके से संभालते थे.
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पढ़ाई के दौरान ही बदला 'फिटनेस' का नजरिया
अक्सर लोग सोचते हैं कि प्रतीक लंदन सिर्फ डिग्री लेने गए थे, लेकिन सच तो यह है कि उनकी 'फिटनेस' की असल शुरुआत भी वहीं से हुई. विदेश में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने देखा कि वहां के स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ अपनी हेल्थ को लेकर कितने गंभीर रहते हैं. लंदन की यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते वक्त ही उन्होंने जिम जाना शुरू किया. वहां उन्हें फिटनेस के प्रति जो अप्रोच मिला, उसने उनकी सोच बदल दी. उन्होंने सिर्फ पसीना बहाना नहीं सीखा, बल्कि शरीर की बनावट, डाइट और कैलोरी का गणित भी पढ़ा.
क्या डिग्री के बाद भी जारी रही पढ़ाई?
प्रतीक यादव का मानना था कि सीखना कभी बंद नहीं होता. डिग्री लेने के बाद जब वह भारत लौटे तो उन्होंने अपने बिजनेस के साथ-साथ फिटनेस ट्रेनिंग में भी कई प्रोफेशनल सर्टिफिकेट्स हासिल किए. वह सिर्फ एक जिम मालिक नहीं थे, बल्कि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि कौन-सी एक्सरसाइज शरीर के किस हिस्से पर कैसे काम करती है. उनकी 'एजुकेटेड' फिटनेस ही उन्हें बाकी बॉडीबिल्डर्स से अलग बनाती थी.
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Source: IOCL


























