5 मिनट में समझें: रेपो रेट का महंगाई से क्या है रिश्ता? क्या दूध, राशन और रोजमर्रा का सामान हो जाता है सस्ता?
रेपो रेट महंगाई को कंट्रोल करने वाला हथियार है, लेकिन ये कोई जादुई बटन नहीं है जिसे दबाते ही दूध, राशन या सब्जियां सस्ती हो जाएं. आइये यहां से समझते हैं कि रेपो रेट का महंगाई से क्या और कैसा रिश्ता है.

Repo Rate And Inflation: महंगाई बढ़ती है तो सबसे पहले असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है. दूध, दाल, आटा, सब्जियां, गैस सिलेंडर और रोज की जरूरतों का खर्च बढ़ जाता है. ऐसे समय में अक्सर खबर आती है कि RBI ने रेपो रेट बढ़ा दिया या रेपो रेट घटा दिया. इसके बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या इससे महंगाई कम होगी? क्या दूध, राशन और रोजमर्रा का सामान सस्ता हो जाएगा? आइए यहां से डिटेल में समझते हैं कि रेपो रेट क्या होता है, इसका महंगाई से क्या रिश्ता है और रेपो रेट का आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है.
रेपो रेट क्या है?
सबसे पहले समझिए, रेपो रेट क्या होता है. रेपो रेट वो ब्याज दर है जिसपर भारतीय रिजर्व बैंक देश के बैंकों को के लिए कर्ज देता है. इसे RBI की मौद्रिक नीति का सबसे अहम हथियार माना जाता है. रेपो रेट बढ़ता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है. रेपो रेट घटता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है. इसके बाद बैंक अपनी लोन की ब्याज दरों में बदलाव करते हैं, जिसका असर होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन पर पड़ता है.
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रेपो रेट और महंगाई का क्या संबंध है?
मान लीजिए बाजार में लोगों के पास खर्च करने के लिए बहुत ज्यादा पैसा है. लोग ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, मांग बढ़ रही है और कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं. इससे महंगाई बढ़ने लगती है. ऐसे समय RBI रेपो रेट बढ़ा देता है. इसका असर कुछ इस तरह होता है कि बैंकों को महंगा कर्ज मिलता है. बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगे कर देते हैं. EMI बढ़ जाती है. लोग कम लोन लेते हैं. बाजार में खर्च थोड़ा कम होता है और मांग घटने लगती है. धीरे-धीरे महंगाई पर दबाव कम होता है. यानी रेपो रेट बढ़ाने का मकसद लोगों की जेब से पैसा निकालना नहीं, बल्कि बाजार में जरूरत से ज्यादा नकदी के प्रवाह को कंट्रोल करना होता है.
अगर रेपो रेट घट जाए तो क्या होगा?
जब RBI रेपो रेट कम करता है तो इसके बाद बैंक सस्ता लोन देने लगते हैं EMI घट सकती है. लोग घर, कार और बिजनेस के लिए ज्यादा लोन लेते हैं. खर्च बढ़ता है. कंपनियों की बिक्री बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है. हालांकि, अगर जरूरत से ज्यादा पैसा बाजार में आ जाए तो आगे चलकर महंगाई बढ़ने का खतरा भी हो सकता है.
क्या रेपो रेट घटते ही दूध और राशन सस्ता हो जाता है?
नहीं, ये तो सबसे बड़ी गलतफहमी है. रेपो रेट का असर सीधे दूध, आटा, दाल, चावल या सब्जियों की कीमतों पर नहीं पड़ता. इनकी कीमतें कई दूसरी चीजों से तय होती हैं, जैसे मानसून कैसा रहा? फसल का उत्पादन कितना हुआ? डीजल, बिजली की कीमत, कमोडिटी, सरकार की नीतियां, सप्लाई चेन और अगर फसल खराब हो जाए तो रेपो रेट कम होने के बावजूद सब्जियां महंगी रह सकती हैं.
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रेपो रेट से फायदा किसे होता है?
1.होम लोन वाले- अगर आपका फ्लोटिंग रेट होम लोन है तो रेपो रेट घटने पर EMI कम हो सकती है.
2.कार लोन लेने वाले- नई कार खरीदना थोड़ा सस्ता पड़ सकता है.
3.बिजनेस- सस्ता कर्ज मिलने से कंपनियां निवेश बढ़ा सकती हैं.
4.नौकरी- जब कंपनियां निवेश करती हैं तो रोजगार बढ़ने की संभावना भी बढ़ती है.
RBI महंगाई कितनी रखना चाहता है?
भारत में RBI का महंगाई को 4% के आसपास रखना चाहती है. कानून के मुताबिक इसे 2% से 6%.के दायरे में रखना होता है. अगर महंगाई लगातार 6% से ऊपर चली जाए तो RBI आमतौर पर रेपो रेट बढ़ाना पड़ जाता है.
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