India Imposes 12% Tariffs on Steel Imports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश का असर सीमित ही रहा और इसका उल्टा नतीजा देखने को मिला. भारत का निर्यात बढ़ा और देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी जीडीपी पर भी कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा. इसी बीच भारत ने अपने घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए चीन से डंप किए जा रहे सस्ते उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने विदेशी बाजारों से खासतौर पर चीन की ओर से आ रहे सस्ते स्टील आयात पर कार्रवाई करते हुए तीन साल के लिए टैरिफ लगाने का फैसला किया है.
स्टील पर तीन साल के लिए टैरिफ
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, स्टील उत्पादों पर यह सुरक्षा शुल्क चरणबद्ध तरीके से लागू होगा. पहले साल टैरिफ की दर 12 प्रतिशत रहेगी, दूसरे साल इसे घटाकर 11.5 प्रतिशत किया जाएगा और तीसरे साल यह 11 प्रतिशत होगी. सरकार का कहना है कि यह फैसला आयात के बढ़ते रुझान और उसके कारण घरेलू स्टील उद्योग पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
यह टैरिफ मुख्य रूप से चीन, वियतनाम और नेपाल से आने वाले स्टील शिपमेंट्स पर लागू होगा, क्योंकि इन देशों से सस्ते दामों पर स्टील का आयात तेजी से बढ़ा है. हालांकि, सरकार ने कुछ विकासशील देशों को इससे छूट दी है और साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि स्टेनलेस स्टील उत्पादों पर यह सुरक्षा शुल्क लागू नहीं होगा.
घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए कदम
सरकारी आदेश में बताया गया है कि आयात में हालिया तेज बढ़ोतरी के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की थी. जांच में सामने आया कि सस्ते आयात से घरेलू स्टील उत्पादकों को गंभीर नुकसान हो सकता है. इसके बाद DGTR ने तीन साल तक टैरिफ लगाने की सिफारिश की, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब सरकार इससे पहले अप्रैल में इन्हीं स्टील उत्पादों पर 200 दिनों के लिए 12 प्रतिशत का अस्थायी सुरक्षा शुल्क लगा चुकी है. स्टील मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कम कीमत और घटिया गुणवत्ता वाले स्टील आयात से भारतीय उद्योग, निवेश और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ता है, इसलिए घरेलू स्टील सेक्टर को बचाने के लिए यह फैसला जरूरी था.
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