Xप्लेन: टाटा संस का अगला चेयरमैन कैसे चुना जाएगा? कौन-कौन हैं रेस में?
टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति किसी सामान्य कॉर्पोरेट कंपनी की तरह नहीं होती. इसके लिए कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में विस्तृत प्रक्रिया तय की गई है.

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरा कार्यकाल नहीं लेंगे. इसके साथ ही टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश औपचारिक रूप से शुरू हो गई है.
टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति किसी सामान्य कॉर्पोरेट कंपनी की तरह नहीं होती. इसके लिए कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) में विस्तृत प्रक्रिया तय की गई है. अंतिम नियुक्ति भले ही टाटा संस का बोर्ड करता हो, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स, जिनके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. आइए पहले समझते हैं टाटा संस का चेयरमैन कैसे चुना जाता है?
टाटा संस का चेयरमैन कैसे चुना जाता है?
चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया आर्टिकल 118 के तहत तय की गई है. इसके अनुसार, जब तक टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की पेड-अप ऑर्डिनरी शेयर कैपिटल का कम से कम 40% हिस्सा रहेगा, तब तक नए चेयरमैन के लिए उम्मीदवार का नाम सुझाने हेतु पांच सदस्यीय चयन समिति (Selection Committee) का गठन किया जाएगा.

इसके बाद समिति जिस उम्मीदवार की सिफारिश करेगी, उसे टाटा संस का बोर्ड नियुक्त करेगा. यह नियुक्ति आर्टिकल 121 के तहत होती है, जिसमें बोर्ड के निर्णयों पर टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी निदेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
चयन समिति में कौन-कौन होते हैं?
पांच सदस्यीय चयन समिति में शामिल होते हैं-
-सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से नामित तीन सदस्य
-टाटा संस बोर्ड द्वारा बोर्ड के सदस्यों में से नामित एक सदस्य
-टाटा संस बोर्ड द्वारा चुना गया एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य
समिति का अध्यक्ष (Chairman) भी ट्रस्ट्स द्वारा नामित तीन सदस्यों में से ही चुना जाता है. नियमों के अनुसार, समिति की बैठक तभी वैध मानी जाएगी जब ट्रस्ट्स द्वारा नामित सदस्यों का बहुमत उपस्थित हो.
हालांकि, यह समिति केवल उम्मीदवार की सिफारिश करती है. अंतिम नियुक्ति का अधिकार टाटा संस के बोर्ड के पास होता है.
क्या टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन टाटा संस का चेयरमैन बन सकता है?
इसका सीधा जवाब है नहीं. 2022 में टाटा संस ने अपने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में संशोधन कर दोनों पदों को अलग कर दिया था. अब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट या सर रतन टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन एक ही समय में टाटा संस का चेयरमैन नहीं बन सकता.
इस बदलाव का उद्देश्य मालिकाना (Ownership) और प्रबंधन (Management) के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना था. रतन टाटा 2012 तक टाटा संस के चेयरमैन रहे और बाद में टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख बने रहे. लेकिन उनके बाद साइरस मिस्त्री और एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस का नेतृत्व किया, जबकि ट्रस्ट्स का नेतृत्व अलग रहा.
इसी वजह से, नोएल टाटा फिलहाल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं, इसलिए मौजूदा नियमों के तहत वे टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन सकते जब तक वो उस पद पर रहते हैं.
रतन टाटा के बाद उत्तराधिकारी कैसे चुना गया था?
रतन टाटा के रिटायरमेंट से पहले भी टाटा संस ने पांच सदस्यीय चयन समिति बनाई थी. करीब एक वर्ष तक चली प्रक्रिया के बाद साइरस मिस्त्री को उत्तराधिकारी चुना गया. नवंबर 2011 में उन्हें डिप्टी चेयरमैन नियुक्त किया गया और दिसंबर 2012 में उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला.
हालांकि, अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड ने साइरस मिस्त्री को पद से हटा दिया और रतन टाटा को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद नए चेयरमैन की तलाश के लिए एक और पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की गई, जिसमें शामिल थे- रतन टाटा, वेणु श्रीनिवासन, अमित चंद्रा, पूर्व राजनयिक रोनेन सेन और अर्थशास्त्री लॉर्ड कुमार भट्टाचार्य.
करीब चार महीने की प्रक्रिया के बाद समिति ने एन. चंद्रशेखरन के नाम की सर्वसम्मति से सिफारिश की. 12 जनवरी 2017 को टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया और उन्होंने 21 फरवरी 2017 को कार्यभार संभाला.
अब आते हैं असल सवाल पर कि कौन कौन अब टाटा संस के अगले चेयरमैन की कुर्सी के रेस में है.
कौन-कौन हैं टाटा संस के अगले चेयरमैन की रेस में?
टाटा संस ने अभी तक किसी आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. आइए उनपर चर्चा कर लेते हैं.
1. टी. वी. नरेंद्रन
टाटा स्टील के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर टी. वी. नरेंद्रन को सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है. स्टील कारोबार में उनका लंबा अनुभव, वैश्विक नेतृत्व और टाटा समूह के भीतर मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड उनके पक्ष में माना जा रहा है.

2. नोएल टाटा
दूसरा प्रमुख नाम नोएल टाटा का है. वह वर्तमान में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं. चूंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है, इसलिए उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका होगी.
हालांकि, 2022 में नियमों में हुए बदलाव के बाद टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस का चेयरमैन एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता. इसलिए मौजूदा नियमों के तहत उनके स्वयं टाटा संस का चेयरमैन बनने की संभावना सीमित मानी जा रही है.
3. नेविल टाटा
नेविल टाटा, नोएल टाटा के बेटे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें समूह के दीर्घकालिक संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, फिलहाल उन्हें तत्काल चेयरमैन पद की दौड़ में सबसे आगे नहीं माना जा रहा है.
इन तीन नामों के अलावा भी कुछ दावेदार बताए जा रहे हैं. आइए उनके बारे में भी जान लेते हैं.
4- सौरभ अग्रवाल (ग्रुप चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, टाटा संस)
चंद्रशेखरन 2017 में सौरभ अग्रवाल को आदित्य बिड़ला ग्रुप से टाटा संस में लाए थे. तब से अग्रवाल लगभग एक दशक से इस ग्रुप के मुख्य फाइनेंशियल आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर रहे हैं.अग्रवाल ने ग्रुप की बैलेंस शीट को फिर से व्यवस्थित करने का काम किया, नॉन-कोर वायरलेस टेलीकॉम एसेट्स से बाहर निकलने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया और बड़े अधिग्रहणों में पूंजी के इस्तेमाल को मैनेज किया. अग्रवाल को चुनने का मतलब होगा फाइनेंशियल निरंतरता और अनुशासित पोर्टफोलियो मैनेजमेंट.
5-पुनीत छतवाल (मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड)
पुनीत छतवाल ने ताज होटल ब्रांड को चलाने वाली कंपनी, इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) में ज़बरदस्त बदलाव किया है. उनकी लीडरशिप में, IHCL एक ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाली और कम एसेट वाली तेज़ी से बढ़ने वाली कंपनी बन गई है. इसने महामारी की मुश्किलों का सामना करते हुए रिकॉर्ड मुनाफ़ा कमाया. ब्रांड को बनाए रखने और कमर्शियल काम को बेहतर ढंग से करने में छतवाल की कामयाबी उन्हें एक बेहतरीन एग्ज़ीक्यूटिव कैंडिडेट बनाती है.
6-के. कृतिवासन (मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़)
TCS — जो टाटा ग्रुप के लिए सबसे ज़्यादा कैश कमाने वाली कंपनी है उसके लीडर के तौर पर के. कृतिवासन के पास कामकाज से जुड़े बड़े फ़ैसले लेने का अधिकार है. TCS में तीन दशकों से ज़्यादा समय बिताने वाले कृतिवासन, ग्रुप की गहरी टेक्नोलॉजी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं. हालांकि, बोर्ड पर नज़र रखने वालों का मानना है कि 2023 में नियुक्ति के तुरंत बाद कृतिवासन को TCS से हटाने से इस प्रमुख IT कंपनी के कामकाज में बेवजह रुकावट आ सकती है.
आगे क्या होगा?
एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक रहेगा. इसके बाद टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार एक पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की जाएगी. यह समिति संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर बोर्ड को नामों की सिफारिश करेगी. अंतिम निर्णय टाटा संस का बोर्ड करेगा, जिसके बाद कंपनी को अपना नया चेयरमैन मिलेगा.





















