नई गाड़ियों में क्यों नहीं आता हेडलाइट्स ऑफ करने का फीचर, क्यों सरकार की मजबूरी बन गया यह?
नई बाइक और स्कूटर में हेडलाइट बंद करने का विकल्प क्यों नहीं दिया जाता, AHO नियम क्या है और सड़क सुरक्षा के लिए इसे लागू करने की वजह क्या है?

अगर आपने भी कभी कोई नई बाइक या स्कूटर खरीदी है तो आपने जरूर नोटिस किया होगा कि उसकी हेडलाइट गाड़ी स्टार्ट होते ही अपने आप जल जाती है, चाहे दिन हो या रात. पुराने वाहनों में हेडलाइट को अपने मन के अनुसार चालू और बंद करते थे, लेकिन आज की नई गाड़ियों में ऐसा नहीं देखने को मिलता. बहुत से लोगों को यह बात अजीब लगती है और वे सोचते हैं कि क्या यह कंपनियों की कोई गलती है. लेकिन हकीकत में इसके पीछे सरकार का एक सोचा-समझा नियम है, जिसे जानना हर वाहन चालक के लिए जरूरी है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
क्या है ऑटोमेटिक हेडलैंप ऑन (AHO) नियम?
दरअसल, यह सब हुआ सरकार के एक खास नियम की वजह से, जिसे ऑटोमेटिक हेडलैंप ऑन यानी AHO कहा जाता है. सरकार ने यह नियम लागू किया कि अब बिकने वाले हर नए दो पहिया वाहन में ऑटोमेटिक हेडलैंप ऑन का फीचर देना जरूरी होगा. यानी गाड़ी स्टार्ट होते ही हेडलाइट खुद-ब-खुद जल जाएगी, चाहे दिन का समय हो या रात का. हालांकि, यह नियम सिर्फ नई बनने वाली गाड़ियों पर लागू होता है. पुरानी गाड़ियों को इस नियम से छूट दी गई है. यही वजह है कि आज के समय में नई गाड़ियां खरीदने वाले लोगों को हेडलाइट बंद करने का कोई बटन या स्विच नहीं मिलता.
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सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया यह नियम
अब सवाल यह आता है कि सरकार को यह नियम बनाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी? इसका सीधा जवाब है सड़क सुरक्षा. कम रोशनी वाली सड़कों पर बिना हेडलाइट जलाए गाड़ी चलाना बहुत खतरनाक हो जाता है, क्योंकि ऐसी स्थिति में दूसरे वाहन चालकों को आपकी गाड़ी ठीक से नजर नहीं आती, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है. सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि सुबह-शाम की हल्की रोशनी, बारिश, धुंध या कोहरे जैसी स्थितियों में भी विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे सामने से आती गाड़ी साफ नजर नहीं आती. ऐसे हालात में अगर हेडलाइट हमेशा जली रहे तो दूसरे चालकों, पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को वाहन की मौजूदगी का पता चलता रहता है, जिससे हादसों की आशंका काफी कम हो जाती है.
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