Electric Vehicle Resale Value: 3 साल बाद कौड़ियों के दाम बिकती हैं EV कारें? जानें इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रीसेल वैल्यू का सच
Electric Vehicle Resale Value : टाटा नेक्सन EV, एमजी ZS EV और महिंद्रा XUV400 जैसी कारों ने हजारों लोगों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर अट्रैक्ट किया है.

Electric Vehicle Resale Value : इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग के बीच ज्यादातर लोग खरीदते समय बैटरी रेंज, चार्जिंग टाइम, रनिंग कॉस्ट और सरकारी सब्सिडी जैसी चीजों पर ध्यान देते हैं, लेकिन उसकी रीसेल वैल्यू पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते हैं. पिछले कुछ साल में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री तेजी से बढ़ी है. टाटा नेक्सन EV, एमजी ZS EV और महिंद्रा XUV400 जैसी कारों ने हजारों लोगों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर अट्रैक्ट किया है. हालांकि, अब सेकेंड हैंड मार्केट में इन कारों की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर 3 साल बाद कई EV कारों की रीसेल वैल्यू क्यों कम हो जाती है और इसके पीछे की असली वजह क्या है?
3 साल बाद कई EV कारों की रीसेल वैल्यू क्यों कम हो जाती है ?
EV टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, हर कुछ साल में नई बैटरी, ज्यादा ड्राइविंग रेंज, तेज चार्जिंग, बेहतर सॉफ्टवेयर और एडवांस फीचर्स वाले मॉडल बाजार में आ जाते हैं. ऐसे में 2 से 3 साल पुरानी इलेक्ट्रिक कार नए मॉडल की तुलना में कम वैल्यूएबल और अट्रैक्टिव लगने लगती है. यही कारण है कि कई खरीदार पुरानी EV खरीदते समय कम कीमत लगाने की कोशिश करते हैं.
पेट्रोल कारों की तुलना में EV की कीमत ज्यादा क्यों गिरती है?
पेट्रोल कारों में इंजन और ड्राइविंग तकनीक लंबे समय तक लगभग एक जैसी रहती है. इसलिए पुरानी पेट्रोल कार खरीदने वाले लोगों को यह अंदाजा रहता है कि उन्हें क्या मिलने वाला है. वहीं इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय लोगों के मन में बैटरी की स्थिति, उसकी उम्र, चार्जिंग हिस्ट्री और फ्यूचर की परफॉर्मेंस को लेकर कई सवाल रहते हैं. यही वजह है कि सेकेंड हैंड EV की कीमत को प्रभावित करती है.
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3 साल बाद कितनी बचती है कार की कीमत??
सेकेंड हैंड बाजार के अनुसार पेट्रोल हैचबैक और कॉम्पैक्ट SUV आमतौर पर 3 साल बाद अपनी लगभग 70 से 75 प्रतिशत कीमत बनाए रखती हैं. वहीं कई मास-मार्केट इलेक्ट्रिक कारें जैसे टाटा नेक्सन EV और एमजी ZS EV लगभग 50 से 55 प्रतिशत कीमत तक ही पहुंच जाती हैं. हालांकि असली कीमत कार की स्थिति, माइलेज, शहर और मांग पर निर्भर करती है.
इलेक्ट्रिक कार में बैटरी क्यों होती है सबसे महंगी?
इलेक्ट्रिक कार का सबसे महंगा हिस्सा उसकी बैटरी होती है. पेट्रोल कार में इंजन की स्थिति को काफी हद तक आसानी से जांचा जा सकता है, लेकिन बैटरी की असली हेल्थ का अंदाजा हर खरीदार नहीं लगा पाता है. अगर बैटरी की आधिकारिक State of Health (SoH) रिपोर्ट उपलब्ध न हो तो कई खरीदार जोखिम मानकर कम कीमत ऑफर करते हैं. जबकि मॉर्डन EV बैटरियां पहले की तुलना में ज्यादा टिकाऊ साबित हो रही हैं. पिछले कुछ सालों में बैटरी की लागत कम हुई है. इसके कारण कंपनियां पहले से ज्यादा रेंज, बेहतर फीचर्स और कॉम्पिटिशन कीमत वाली नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च कर रही हैं. जब नई कार कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं देने लगे, तो पुराने मॉडल की कीमत अपने आप तेजी से कम होने लगती है.
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