जयपुर में AI सिग्नल का ट्रायल पास, अब खाली सड़क देख खुद रंग बदल लेगी ट्रैफिक लाइट
देश में ट्रैफिक जाम की समस्या किसी से छिपी नहीं है. हर शहर में लोग रोजाना चौराहों पर लाल बत्ती के सामने खड़े होकर अपना वक्त और पेट्रोल दोनों बर्बाद करते हैं. अब इसका हल AI से निकलता दिख रहा है.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में AI से ट्रैफिक सिग्नल चलाने का ट्रायल पूरी तरह कामयाब रहा है और अब इसे पूरे शहर में लागू करने की तैयारी है. दरअसल, जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने शहर के सबसे व्यस्त चौराहे रामबाग सर्किल पर 39 दिन तक AI आधारित इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS का ट्रायल किया. यह ट्रायल 3 जून से 11 जुलाई के बीच चला. खास बात यह रही कि इस दौरान सिग्नल पर किसी ट्रैफिक पुलिसकर्मी की जरूरत नहीं पड़ी. कैमरों में लगा AI सिस्टम खुद ही देखता रहा कि किस सड़क पर कितनी गाड़ियां हैं और उसी हिसाब से हरी और लाल बत्ती का समय बदलता रहा.
अभी तक कैसे चलते हैं सिग्नल और नया सिस्टम कैसे अलग?
अभी देश के ज्यादातर चौराहों पर सिग्नल फिक्स टाइमर पर चलते हैं. इसका मतलब यह है कि हर सड़क को 60 या 90 सेकंड का तय समय मिलता है, चाहे उस सड़क पर एक भी गाड़ी न हो और बगल वाली सड़क पर एक किलोमीटर लंबा जाम लगा हो. नया AI सिस्टम इसी कमी को दूर करता है. चौराहे पर लगे स्मार्ट कैमरे 24 घंटे गाड़ियों की गिनती और कतार की लंबाई मापते रहते हैं. ऐसे में जिस सड़क पर ज्यादा गाड़ियां होती हैं, AI खुद वहां का ग्रीन टाइम बढ़ा देता है और खाली सड़क का समय घटा देता है.
ट्रायल में क्या नतीजे आए?
जयपुर पुलिस के मुताबिक, 39 दिन के ट्रायल में AI सिस्टम ने बिना किसी इंसानी दखल के 4.88 लाख से ज्यादा गाड़ियों को चौराहे से पार करवाया. हर लेन में गाड़ी चलाने वालों के 8 से 45 सेकंड तक बचे. समय बचने का सीधा मतलब है ईंधन की बचत और प्रदूषण में कमी. पुलिस का दावा है कि गाड़ियों के कम रुकने से 39 दिन में करीब 2535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम हुआ यानी रोजाना करीब 65 किलो की बचत.
चालान से भी नहीं बच पाएंगे लोग
यह सिस्टम सिर्फ जाम ही नहीं हटाएगा, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर भी नजर रखेगा. ट्रायल में सामने आया कि एक कैमरा रोजाना करीब 4200 गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ता है और औसतन 450 गाड़ियों के नियम तोड़ने की जानकारी खुद दर्ज कर लेता है. रेड लाइट जंप, ओवरस्पीडिंग, रॉन्ग साइड और लेन तोड़ने वालों का चालान अपने आप बनेगा. अगर किसी गाड़ी पर पहले से कोई चालान बकाया है तो कैमरा नंबर प्लेट स्कैन करते ही उसकी जानकारी कंट्रोल रूम को भेज देगा.
अब आगे क्या होगा?
ट्रायल की कामयाबी के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नरेट शहर के 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों को इस AI सिस्टम से जोड़ने जा रही है. अगले चरण में एक चौराहे का AI दूसरे चौराहे के AI से जुड़ेगा, ताकि पूरे रूट का ट्रैफिक अपने आप मैनेज हो सके. इसके बाद एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी गाड़ियों को अपने आप ग्रीन सिग्नल देने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि मरीज जाम में न फंसें.
बाकी शहरों के लिए भी बन सकता है मॉडल
दिल्ली-मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम रोज की परेशानी है. ऐसे में जयपुर का यह प्रयोग अगर बड़े स्तर पर कामयाब होता है तो यह देश के दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकता है. इसका एक और फायदा यह होगा कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को चौराहों पर खड़े रहने से छुट्टी मिलेगी और वे स्कूलों-बाजारों और दुर्घटना वाले संवेदनशील इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे.
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