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सरकार का सपोर्ट, फिर भी EV क्यों हो रही हैं महंगी?

Electric Vehicle Prices Rising India: सरकार के सपोर्ट और सब्सिडी के बावजूद भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियां क्यों महंगी मिल रही हैं? जानिए बैटरी की लागत, इम्पोर्ट और सब्सिडी में कटौती से जुड़ी असली वजहें.

Electric Vehicle Prices Rising India: भारत में पिछले कुछ सालों से प्रदुषण बढ़ता ही जा रहा है और साथ ही पेट्रोल-डीजल के दाम भी आसमान पर हैं. इन सभी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार इलेक्ट्रिक  गाड़ियों को लगातार बढ़ावा दे रही है. टैक्स में छूट और कई तरह के इन्सेंटिव्स के बावजूद जब ग्राहक शोरूम पहुंचते हैं तो ईवी की कीमत देखकर उनका बजट गड़बड़ा जाता है. 

बता दें कि, पेट्रोल कारों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारें और बाइक्स आज भी काफी महंगी बिक रही हैं. आखिर ऐसा क्यों है कि सरकारी सब्सिडी और भारी सपोर्ट मिलने के बाद भी ईवी की शुरुआती कीमत आम खरीदार की पहुंच से बाहर बनी हुई है. तो चलिए इसके पीछे की असली वजहों को आसान शब्दों में समझते हैं.

धीरे-धीरे सख्त होते सरकारी नियम

बता दें कि, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के महंगी होने की सबसे पहली और बड़ी वजह सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में की गई कटौती है. शुरुआत में सरकार ने FAME योजना के तहत वाहन कंपनियों को भारी छूट दी थी. जिससे गाड़ियां काफी सस्ती मिल रही थीं. 

लेकिन अब सरकार धीरे-धीरे इस सब्सिडी को घटा रही है. सब्सिडी कम होते ही कंपनियों ने सीधे गाड़ियों के दाम बढ़ा दिए हैं. इसके अलावा ईवी में बैटरी सुरक्षा और फायर सेफ्टी के नए और सख्त स्टैंडर्ड लागू होने से भी गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई है. 

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बैटरी की महंगी लागत 

आपको यह भी बता दें कि, इलेक्ट्रिक गाड़ी की कुल कीमत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा अकेले उसकी बैटरी का होता है. भारत में भले ही गाड़ियां असेंबल हो रही हों लेकिन अभी भी बैटरी में इस्तेमाल होने वाले लिथियम-आयन सेल्स और लिथियम, कोबाल्ट जैसे कच्चे माल के लिए देश आज भी चीन और अन्य देशों पर निर्भर है. 

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और इम्पोर्ट ड्यूटी की वजह से बैटरी की लागत ऊंची बनी रहती है. जब तक भारत में सेल का निर्माण बड़े पैमाने पर शुरू नहीं होता तब तक गाड़ियों की कीमत नीचे आना मुश्किल है.

एडवांस टेक्नोलॉजी का इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट

जानकारी दें दे कि, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में केवल मोटर और बैटरी ही नहीं होती बल्कि उनमें हाई-टेक सॉफ्टवेयर, सेंसर्स और एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं. इन सभी कंपोनेंट्स की रिसर्च और डेवलपमेंट में कार कंपनियों को भारी पैसा लगाना पड़ता है. 

जबकि इसके अलावा ईवी खरीदने के साथ घर में फास्ट चार्जर लगाने, 3-फेज बिजली कनेक्शन लेने और महंगे इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे कई छुपे हुए खर्च भी खरीदार पर भारी पड़ते हैं. ये सभी चीजें मिलकर एक इलेक्ट्रिक कार को साधारण पेट्रोल कार के मुकाबले काफी महंगा बना देती हैं.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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