UP Fuel Rule : यूपी में इस कागज के बिना नहीं मिलेगा पेट्रोल, इस तारीख से लागू होने जा रहा नियम
UP Fuel Rule : एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम करने के लिए वाहनों पर कार्रवाई से लेकर इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने और इंडस्ट्रीज की ऑनलाइन निगरानी तक कई बड़े फैसले लिए गए हैं.

UP Fuel Rule : दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सरकारें लगातार नए कदम उठा रही हैं. हर साल सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस चुनौती से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अब सख्त कदम उठाए हैं. जिसमें एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को काफी हद तक कम करने के लिए पुराने वाहनों पर कार्रवाई से लेकर इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने और इंडस्ट्रीज की ऑनलाइन निगरानी तक कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इसी कड़ी में अब एक नया नियम भी लागू होने जा रहा है, जिसका सीधा असर लाखों वाहन चालकों पर पड़ेगा. इस नियम के तहत एक जरूरी सर्टिफिकेट के बिना पेट्रोल- डीजल नहीं मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि यूपी में किस कागज के बिना पेट्रोल नहीं मिलेगा और किस तारीख से यह नियम लागू होने जा रहा है.
यूपी में किस कागज के बिना पेट्रोल नहीं मिलेगा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर नो पीयूसीसी, नो फ्यूल नियम लागू किया जाएगा. इसका मतलब है कि जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र यानी Pollution Under Control Certificate (PUCC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा. इस नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे. ये कैमरे वाहनों की जानकारी को सिस्टम से जोड़कर चेक करेंगे कि वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट वैध है या नहीं.
किस तारीख से यह नियम लागू होने जा रहा है?
यूपी सरकार 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर के सभी पेट्रोल पंपों पर नया नियम लागू करने जा रही है. इसके तहत सभी को फ्यूल भरवाने के लिए वैध पीयूसीसी सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होगा. बिना पीयूसीसी वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा. उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों ने इस साल एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया है. बैठक में निर्देश दिए गए कि पॉल्यूशन कंट्रोल से जुड़ी सभी एक्टिवीटीज की निगरानी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए की जाए. इसके लिए मोबाइल ऐप, जीपीएस ट्रैकिंग, ऑनलाइन पोर्टल और डैशबोर्ड आधारित सिस्टम लागू किए जाएंगे, जिससे हर एक्टिविटी पर रियल टाइम नजर रखी जा सके.
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एनसीआर में चलेंगी 975 इलेक्ट्रिक बसें
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा साफ और एनवायरमेंट फ्रेंडली बनाने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक बसों पर भी जोर दे रही है. गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है. फिलहाल इन शहरों में लगभग 100 ई- बसों को चलाया हुआ है. सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले समय में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का यूज बढ़ाया जाए.
हवा की क्वालिटी पर रखी जाएगी नजर
एनसीआर क्षेत्र में हवा की क्वालिटी की निगरानी को मजबूत करने के लिए 43 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं. जिसमें 25 स्टेशन पहले से चलाया हुआ है और 18 नए स्टेशन अक्टूबर 2026 तक शुरू कर दिए जाएंगे. इन स्टेशनों की मदद से हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों की लगातार निगरानी की जाएगी, जिससे समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें. इसके साथ ही इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए 725 प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज की पहचान की गई है. इनमें से 613 इंडस्ट्रीज में ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) लगाया जा चुका है. इन सिस्टमों को सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सर्वर से जोड़ा गया है. इससे फैक्ट्रियों से निकलने वाले पॉल्यूशन की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी.
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