किन-किन देशों में एथेनॉल से चल रहीं गाड़ियां, वहां कितना कामयाब रहा यह सिस्टम?
Ethanol Fuel: ब्राजील, अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां कितनी कामयाब रहीं? जानिए एथेनॉल फ्यूल का पूरा ग्लोबल गणित.

Ethanol Fuel: अभी हर तरफ एथेनॉल की जमकर चर्चा चल रही है क्योंकि, पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों और प्रदूषण को कम करने के लिए एथेनॉल को एक बड़े गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है. बता दें कि, भारत में भी तेजी से E85 और E100 फ्यूल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को लाने की तैयारी चल रही है. लेकिन आज हम बात करेंगे कि दुनिया के कई देशों में यह सिस्टम सालों से न सिर्फ चल रहा है बल्कि बेहद कामयाब भी रहा है.
ब्राजील से लेकर अमेरिका तक कई देशों ने अपने यहां एथेनॉल को मेनस्ट्रीम फ्यूल बना दिया है. चलिए जानतें हैं कि दुनिया के बड़े देशों में एथेनॉल का यह सफर कैसा रहा और वहां के लोगों के लिए यह फ्यूल कितना फायदेमंद रहा है.
ब्राजील है सबसे आगे
बता दें कि, जब भी बात एथेनॉल से गाड़ी चलाने की आती है तो इस लिस्ट में ब्राजील सबसे ऊपर आता है. ब्राजील ने 1970 में ही ऑयल क्राइसिस से बचने के लिए गन्ने से एथेनॉल बनाना शुरू कर दिया था. आज के समय में ब्राजील की सड़कों पर दौड़ने वाली 80 परसेंट से ज्यादा कारें फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर चलती हैं.
वहां के पेट्रोल पंपों पर E100 यानी 100% शुद्ध एथेनॉल मिलता है. सबसे खास बात यह है कि वहां का नॉर्मल पेट्रोल भी बिना 27% एथेनॉल मिक्स किए नहीं बिकता. वहां के लोग एथेनॉल और पेट्रोल की कीमतों को देखकर खुद तय करते हैं कि उन्हें कौन सा फ्यूल चुनना है.
यह भी पढ़ें: Delhi EV Policy 2026: दिल्ली में नई EV खरीदने पर कितने की मिलेगी सब्सिडी, जानें नई पॉलिसी में क्या है खास?
लिस्ट में अमेरिका का भी नाम है
एथेनॉल के प्रोडक्शन और इस्तेमाल के मामले में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. लेकिन ब्राजील की तरह वहां गन्ने से नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर मक्के से एथेनॉल तैयार किया जाता है. अमेरिका के लगभग हर पेट्रोल पंप पर मिलने वाले रेगुलर फ्यूल में 10% एथेनॉल पहले से मिक्स होता है और अब वहां E15 का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है.
इसके अलावा वहां फ्लेक्स-फ्यूल कारों के लिए E85 फ्यूल पंप्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क मौजूद है. अमेरिका में लाखों गाड़ियां इस क्लीन फ्यूल पर चल रही हैं जिससे वहां कच्चे तेल का इम्पोर्ट काफी कम हुआ है.
फ्रांस और थाईलैंड भी रेस में आगे
बता दें कि, फ्रांस एथेनॉल का सबसे बड़ा मार्केट बनकर उभरा है. फ्रांस में लगभग 4,000 पेट्रोल पंपों पर E85 फ्यूल आसानी से मिल जाता है. जो उनके कुल नेटवर्क का करीब 42 परसेंट है. वहां की सरकार एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों पर टैक्स में भारी छूट देती है.
जिससे यह आम लोगों के लिए काफी किफायती हो जाता है. वहीं एशिया में थाईलैंड इस रेस में सबसे आगे है. थाईलैंड में E20 और E85 फ्यूल को प्रमोट करने के लिए सरकार ने बाहर से एथेनॉल मंगाना बैन कर रखा है. वहां सिर्फ लोकल किसानों द्वारा उगाए गए मक्के और गन्ने से ही एथेनॉल बनाया जाता है.
यह भी पढ़ें: 5 साल पुराना हेलमेट बन सकता है जान का दुश्मन, जानिए कब बदलना है जरूरी

























