SUV के आगे Hatchback कारें फेल, बिक्री के आंकड़े कर देंगे हैरान
भारतीय ऑटो बाजार में हैचबैक कारों को पछाड़कर एसयूवी ने जमाया कब्जा. यूटिलिटी व्हीकल्स की हिस्सेदारी बढ़कर 67 फीसदी तक पहुंची. जानिए क्या हैं बड़े कारण.

हमारे देश में गाड़ियों की बिक्री में कोई भी गिरावट देखने को नहीं मिल रही है और उसकी सबसे बड़ी वजह है इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में एसयूवी का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है. ऐसा हम नहीं बल्कि आंकड़ें बता रहे हैं. क्योंकि, पैसेंजर व्हीकल मार्केट में अब स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल यानी एसयूवी और मल्टी पर्पज व्हीकल यानी एमपीवी का एकतरफा राज कायम हो चुका है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में यूटिलिटी व्हीकल्स की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 67 फीसदी तक पहुंच गई है.
बता दें कि, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद और कार खरीदारी का मिजाज अब पूरी तरह से बदल चुका है. एक समय था जब देश का कार बाजार सिर्फ छोटी और किफायती हैचबैक गाड़ियों के दम पर चलता था. कम कीमत, आसान ड्राइविंग और बेहतर माइलेज की वजह से ऑल्टो, स्विफ्ट और वैगनआर जैसी कारें लंबे समय तक खरीदारों की पहली पसंद बनी रहीं. लेकिन अब यह पुराना ट्रेंड पूरी तरह से टूट चुका है.
बिक्री में दर्ज हुई बंपर बढ़त
बता दें कि, कार खरीदारों के इस नए मिजाज का असर ऑटो कंपनियों के बिक्री आंकड़ों और उनके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर साफ देखा जा सकता है. देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अपने यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट जैसे ब्रेजा, फ्रोंक्स, अर्टिगा और ग्रैंड विटारा की बिक्री में 46.2 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है. कंपनी ने मांग को देखते हुए इनका उत्पादन भी 67 फीसदी तक बढ़ा दिया है.
वहीं दूसरी तरफ दिग्गज एसयूवी निर्माता कंपनी महिंद्रा ने भी अपनी थार, स्कॉर्पियो-एन और एक्सयूवी सीरीज के दम पर अपनी बिक्री में करीब 42 फीसदी का जबरदस्त उछाल हासिल किया है.

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ग्राउंड क्लीयरेंस बना सबसे बड़ी वजह
जानकारी दें दे कि, ग्राहकों के बीच एसयूवी गाड़ियों के इस कदर दीवानेपन के पीछे कई व्यावहारिक कारण शामिल हैं. भारत के कई छोटे-बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में आज भी खराब सड़कें, बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या बनी रहती है.
ऐसे रास्तों पर चलने के लिए एसयूवी गाड़ियों में मिलने वाला ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस सबसे ज्यादा काम आता है. जमीन से ऊंची होने के कारण यह गाड़ियां खराब रास्तों पर आसानी से निकल जाती हैं और नीचे से टकराती नहीं हैं. यही वजह है कि लोग अब हैचबैक की जगह कॉम्पैक्ट या माइक्रो एसयूवी चुन रहे हैं.

इन चीजों को प्राथमिकता दे रहे लोग
आपको यह भी बता दें कि, कार खरीदते वक्त ग्राहक अब सिर्फ कम कीमत या ज्यादा माइलेज देखकर फैसला नहीं ले रहे हैं. आज के समय में हर भारतीय खरीदार गाड़ी की सेफ्टी, उसकी मजबूती और रोड प्रेजेंस को सबसे ज्यादा तवज्जो दे रहा है. एसयूवी में बैठने के बाद मिलने वाली ऊंची ड्राइविंग पोजीशन और कमांडिंग व्यू ड्राइवर को सड़क पर एक अलग ही आत्मविश्वास देता है.
जबकि इसके अलावा कंपनियों द्वारा इन गाड़ियों में 6 एयरबैग्स, 360-डिग्री कैमरा और एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम जैसे हाई-टेक सेफ्टी फीचर्स दिए जा रहे हैं जो ग्राहकों को अपनी ओर तेजी से आकर्षित कर रहे हैं.
आसान लोन ने भी बदली सोच
वहीं, आज के समय में कारों को खरीदना और उनके लिए बजट बनाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. बैंकों की तरफ से मिल रहे आसान व्हीकल लोन, कम ब्याज दरों और ऑफर भरे ईएमआई ऑप्शंस ने आम आदमी की खरीदने की सोच को बदल के रख दिया है.
ग्राहक अब 5 से 6 लाख रुपये की बेसिक हैचबैक खरीदने के बजाय थोड़ा सा ज्यादा बजट बढ़ाकर 8 से 12 लाख रुपये की रेंज वाली फीचर-लोड कॉम्पैक्ट एसयूवी खरीदना ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं. यही कारण है कि भारतीय सड़कों पर अब छोटी कारें कम और एसयूवी ज्यादा नजर आ रही हैं.
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