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अब कैब के किराए में आसमान से सफर करेंगे आप! आ रही Air Taxi
eVTOL Air Taxi: इसकी टेक्नोलॉजी कुछ हद तक हेलीकॉप्टर जैसी है, लेकिन इसमें इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और अलग तरह का एयरक्राफ्ट डिजाइन इस्तेमाल किया जाता है. आइए डिटेल्स जान लेते हैं.

कैब के किराए में आसमान से सफर करेंगे आप
Source : Sarla Aviation
भारत में आने वाले समय में शहरों के अंदर सफर करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. जिस तरह आज लोग कैब या ऑटो से सड़क के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, उसी तरह भविष्य में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी के जरिए हवा में सफर करने का ऑप्शन मिल सकता है.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने एयर टैक्सी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में एयर टैक्सी जरूर उड़ेंगी और देश सिर्फ इनका इस्तेमाल ही नहीं करेगा, बल्कि इनके डिजाइन और निर्माण में भी जरूरी भूमिका निभाएगा.
सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट
- केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने हाल ही में Sarla Aviation को देश का तीसरा eVTOL Design Organisation Approval (DOA) सौंपा है. यह मंजूरी इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे भारत में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग यानी eVTOL एयरक्राफ्ट के डिजाइन और विकास की दिशा में काम को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. मंत्री ने खुद eVTOL एयरक्राफ्ट के सिम्युलेटर पर उड़ान का अनुभव भी लिया.

- मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगले दो साल के अंदर भारत न सिर्फ eVTOL का संचालन करेगा, बल्कि दुनिया के लिए एडवांस्ड एयर मोबिलिटी सॉल्यूशन का डिजाइन और निर्माण भी करेगा.इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार और कंपनियां 2028 के आसपास एयर टैक्सी को शुरू करने की दिशा में काम कर रही हैं.हालांकि, इसे आम यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले जरूरी सेफ्टी, सर्टिफिकेशन जैसी जरूरी चीजें पूरी करनी होगी.
क्या होती है eVTOL एयर टैक्सी?
- eVTOL का पूरा नाम Electric Vertical Take-Off and Landing है. आसान भाषा में इसे ऐसी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली गाड़ी समझ सकते हैं, जो बिना पारंपरिक रनवे के सीधे ऊपर उड़ान भर सकती है और उसी तरह नीचे उतर सकती है.
- इसकी टेक्नोलॉजी कुछ हद तक हेलीकॉप्टर जैसी है, लेकिन इसमें इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और अलग तरह का एयरक्राफ्ट डिजाइन इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि eVTOL को शहरी परिवहन के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है. अगर इन एयर टैक्सियों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाता है तो यात्रियों को हर बार बड़े एयरपोर्ट की जरूरत नहीं होगी.
- इन्हें खास वर्टिपोर्ट, हेलिपैड जैसी जगहों या निर्धारित जगहों से संचालित किया जा सकता है.हालांकि, यह कहना कि आम लोग इन्हें घर की छत या आंगन से सीधे उड़ा सकेंगे, मौजूदा व्यवस्था के हिसाब से सही निष्कर्ष नहीं होगा; इसके लिए निर्धारित ऑपरेशनल और सेफ्टी नियम जरूरी होंगे.
क्यों जरूरी है एयर टैक्सी?
- भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक की समस्या लगातार बढ़ रही है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई बार सड़क के रास्ते कुछ किलोमीटर का सफर करने में भी काफी समय लग जाता है. एयर टैक्सी का सबसे बड़ा उद्देश्य इसी तरह के शहरी ट्रैफिक और समय की समस्या को कम करना है.

- उदाहरण के तौर पर अगर किसी शख्स को शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना है और सड़क पर भारी ट्रैफिक है तो भविष्य में एयर टैक्सी हवा के रास्ते उस दूरी को कम समय में पूरा कर सकती है. इससे खास तौर पर बिजनेस ट्रैवल, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और जरूरी यात्राओं में समय बचाने की उम्मीद है.
- भारत में एयर टैक्सी को लेकर सिर्फ सरकार ही काम नहीं कर रही है.कई भारतीय स्टार्टअप इस तकनीक पर अपने-अपने एयरक्राफ्ट विकसित कर रहे हैं.Sarla Aviation उनमें प्रमुख नाम है.कंपनी का eVTOL प्रोजेक्ट ‘Shunya’ शहरी हवाई परिवहन को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है. कंपनी 2028 के आसपास एयर टैक्सी ऑपरेशन शुरू करने का लक्ष्य रख रही है.
किन कामों में यूज होगी एयर टैक्सी?
- eVTOL तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में केवल यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकता. इनका उपयोग मेडिकल इमरजेंसी, सामान की डिलीवरी, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और दूसरे शहरी परिवहन कार्यों में भी किया जा सकता है.
- अलग-अलग कंपनियां passenger और cargo दोनों तरह के eVTOL पर काम कर रही हैं. इससे खास तौर पर उन जगहों पर फायदा हो सकता है जहां सड़क के जरिए पहुंचना मुश्किल या समय लेने वाला होता है.हालांकि, हर तरह के इस्तेमाल के लिए अलग सेफ्टी और संचालन नियमों की जरूरत होगी.
- इस पूरे अपडेट की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत एयर टैक्सी के मामले में सिर्फ विदेशी कंपनियों से एयरक्राफ्ट खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता. नागरिक उड्डयन मंत्री ने साफ कहा है कि भारत eVTOL का डिजाइन और निर्माण भी करेगा.यानी सरकार की कोशिश देश में ऐसी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी विकसित करने की है, जिससे भविष्य में भारत इस क्षेत्र में एक बड़ा केंद्र बन सके.
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