Red Light से गलत लेन तक, दिल्ली में हर घंटे 34 हजार लोग तोड़ रहे नियम
दिल्ली के दो प्रमुख चौराहों पर हर घंटे 34,722 ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज हुए. Red Light Jump, बिना हेलमेट और गलत लेन जैसे मामले सबसे बड़ी चिंता बने

दिल्ली में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी किस स्तर तक पहुंच गई है, इसका अंदाजा दक्षिणी दिल्ली के दो बड़े चौराहों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) की एक हालिया स्टडी के मुताबिक, गोविंदपुरी और कोटला मुबारकपुर चौराहों पर मिलाकर हर घंटे करीब 34,722 ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज किए गए. गोविंदपुरी से हर घंटे करीब 26,000 वाहन गुजरते हैं और यहां लगभग 16,791 उल्लंघन दर्ज हुए.
वहीं, कोटला मुबारकपुर से करीब 24,000 वाहन प्रति घंटे गुजरते हैं और यहां लगभग 17,931 उल्लंघन सामने आए. यहां यह समझना जरूरी है कि 34 हजार का आंकड़ा चालान की संख्या नहीं, बल्कि दर्ज किए गए ट्रैफिक नियमों के उल्लंघनों का है. एक ही वाहन या चालक से अलग-अलग तरह के उल्लंघन भी दर्ज हो सकते हैं.
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Red Light Jump और बिना हेलमेट के मामले भी ज्यादा
स्टडी में कई तरह के ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन सामने आए हैं. कोटला मुबारकपुर में हर घंटे करीब 4,808 Red Light Jump दर्ज किए गए, जबकि गोविंदपुरी में यह आंकड़ा करीब 1,731 रहा. बिना हेलमेट वाहन चलाने या सवारी के हेलमेट न पहनने के मामले भी बड़ी संख्या में सामने आए. कोटला मुबारकपुर में करीब 3,068 और गोविंदपुरी में करीब 3,725 ऐसे मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा Wrong Lane Selection और Lane Discipline से जुड़े उल्लंघन भी सामने आए. कोटला मुबारकपुर में Wrong Lane Selection के करीब 1,840 मामले और गोविंदपुरी में करीब 1,632 मामले दर्ज किए गए. ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल Red Light Jump तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क पर लेन अनुशासन और सुरक्षित ड्राइविंग भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.
Wrong Side Driving और गलत U-Turn भी चिंता की वजह
रिपोर्ट में Wrong Direction में वाहन चलाने और गलत तरीके से U-Turn लेने जैसे व्यवहार भी सामने आए हैं. कोटला मुबारकपुर में प्रति घंटे करीब 782 वाहन Wrong Direction में चलते पाए गए. वहीं गोविंदपुरी में करीब 365 Wrong U-Turn के मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन की गति कम नहीं करने जैसे उल्लंघन भी सामने आए. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे व्यवहार सड़क हादसों का खतरा बढ़ा सकते हैं, खासकर व्यस्त चौराहों पर. IRTE का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए केवल हादसों या चालान की संख्या गिनने के बजाय यह समझना जरूरी है कि सड़क पर खतरनाक व्यवहार किस तरह और कहां हो रहा है.
सड़क व्यवस्था में सुधार की भी जरूरत
स्टडी में केवल वाहन चालकों के व्यवहार को ही समस्या नहीं माना गया है. कुछ जगहों पर सड़क निर्माण, कमजोर या गायब रोड मार्किंग, फीकी Zebra Crossing, पर्याप्त Give-Way Sign की कमी और खराब ट्रैफिक सिग्नल जैसी समस्याएं भी ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थानों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान कर सड़क डिजाइन, सिग्नल व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार किया जाना चाहिए. साथ ही Dangerous Lane Changes, Rash Driving और सुरक्षित दूरी न रखने जैसे व्यवहार पर भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. सबसे अहम बात यह है कि 34,722 का आंकड़ा इन दो चौराहों पर दर्ज उल्लंघनों का है, इसे पूरे दिल्ली शहर में हर घंटे होने वाले उल्लंघनों या जारी किए गए चालानों का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.
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