Petrol से ज्यादा होगी Toll की टेंशन, Round Trip में 6000 रुपये का खर्च
एनएच 66 पर नए टोल प्लाजा शुरू होने से ड्राइवरों की जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है. कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के राउंड ट्रिप पर अब पेट्रोल से ज्यादा टोल टैक्स पर खर्च होंगे 6000 रुपये.

हमारे देश में अब लगभग हर राज्य में एक्सप्रेसवे और हाईवे बन चुका है. जिससे लोगों के लिए लंबा सफर बेहद ही आसान हो गया है. हालांकि, बढ़ते सुविधा के साथ लोगों को अपनी जेब भी ढीली करनी पड़ रही है. इस बीच एक बेहद ही बड़ी खबर सामने आई है. क्योंकि, अब केरल राज्य में नेशनल हाईवे 66 के 6-लेन चौड़ीकरण का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है. लेकिन इसके पूरा होते ही हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को अब पेट्रोल और डीजल से भी ज्यादा बड़ी सिरदर्दी टोल टैक्स को लेकर होने वाली है.
ऐसा इस लिए है क्योंकि, एनएच 66 के पूरी तरह शुरू होने के बाद कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक की एक तरफ की यात्रा में ड्राइवरों को लगभग 3,000 रुपये तक का टोल देना पड़ सकता है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप इस दूरी का राउंड ट्रिप तय करते हैं तो आपकी जेब से केवल टोल टैक्स के रूप में भारी-भरकम 6,000 रुपये ढीले हो जाएंगे. चलिए विस्तार से जानतें हैं खबर के बारें में.
नए टोल प्लाजा बढ़ाएंगे जेब का बोझ
आपको बता दें कि, NHAI की योजनाओं के अनुसार कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक लगभग 576 किलोमीटर के इस पूरे कॉरिडोर में कुल 11 नए टोल प्लाजा बनाए जा रहे हैं. हर 50 से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित होने वाले इन टोल बूथों पर गाड़ियों से टैक्स वसूला जाएगा. अभी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल नियमों के हिसाब से प्रति किलोमीटर दर लगभग 2.20 रुपये बैठती है.
वहीं, इसके अलावा पेरियार और भरतपुझा जैसी बड़ी नदियों पर बने पुलों और बाईपास के निर्माण की भारी लागत के कारण इन दरों को और भी अधिक बढ़ाया गया है. यही कारण है कि दूरी के हिसाब से जुड़ने वाली यह रकम अंत में जाकर एक बड़ा वित्तीय झटका बन जाती है.

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भारी पड़ेगा टोल टैक्स
जानकारी दें दे कि, इस नए टोल ढांचे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब लंबी दूरी के सफर में गाड़ियों में लगने वाले फ्यूल की तुलना में टोल का खर्च काफी ज्यादा निकल रहा है. एक सामान्य माइलेज देने वाली पेट्रोल कार से कासरगोड से तिरुवनंतपुरम आने-जाने में लगभग 4,500 से 5,000 रुपये का पेट्रोल लगता है.
लेकिन अब उसी सफर के लिए ड्राइवरों को 6,000 रुपये केवल टोल प्लाजा पर चुकाने होंगे. इस असामान्य आर्थिक अंतर ने आम कार मालिकों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है. इससे लोगों के लिए निजी वाहन से लंबी दूरी का सफर तय करना बेहद खर्चीला सौदा साबित होने लगा है.

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बस किराए पर भी दिखेगा असर
वहीं, एनएच 66 पर लगने वाले इस भारी-भरकम टोल का सीधा असर केवल निजी कार चालकों तक ही सीमित नहीं रहेगा. अंतरराज्यीय बस सेवाओं, प्राइवेट ट्रैवल ऑपरेटरों और माल ढोने वाले ट्रकों का परिचालन खर्च भी काफी बढ़ जाएगा.
जिसका मतलब है कि, आने वाले समय में बसों के टिकट महंगे होंगे और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की माल ढुलाई लागत बढ़ने से महंगाई का असर सीधे आम जनता की थाली पर पड़ेगा. लॉजिस्टिक कंपनियों का कहना है कि इतने अधिक टोल के साथ काम करना बेहद मुश्किल होगा और वे इसका अंतिम बोझ ग्राहकों पर ही ट्रांसफर करने के लिए मजबूर होंगे.
पास और छूट की मांग
बता दें कि, टोल दरों में इस उछाल की खबर सामने आने के बाद से ही स्थानीय निवासियों और व्यापारी संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है. लोगों की मांग है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले इन अत्यधिक शुल्कों पर सरकार को तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए.
विशेष रूप से टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए रियायती मासिक पास की व्यवस्था को पारदर्शी और आसान बनाया जाना चाहिए. इसके साथ ही बार-बार सफर करने वाले व्यावसायिक वाहनों को भी विशेष छूट दी जानी चाहिए ताकि आम जनता और व्यापार क्षेत्र दोनों को इस भारी वित्तीय दबाव से थोड़ी राहत मिल सके.
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