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22 साल बाद मिला कार बीमा क्लेम, गाजियाबाद के शख्स ने जीती लंबी कानूनी लड़ाई, जानें पूरा मामला
गाजियाबाद के पुनीत अग्रवाल को 22 साल बाद अपनी चोरी हुई कार का मुआवजा मिला है. उपभोक्ता आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस को 1.4 लाख देने का आदेश दिया. आइए जानें शख्स ने कैसे बीमा कंपनी के खिलाफ केस जीता.

कार चोरी केस में शख्स को 22 साल बाद मिला बीमा क्लेम
Source : freepik
22 साल की लंबी लड़ाई के बाद गाजियाबाद के पुनीत अग्रवाल को अपनी चोरी हुई कार के बीमा क्लेम में जीत मिली. उन्होंने 2003 में 1.9 लाख रुपये की एक नई ऑल्टो खरीदी थी, जिसका बीमा उसी दिन नेशनल इंश्योरेंस से कराया गया था. लेकिन महज एक महीने बाद, हरिद्वार में उनकी कार चोरी हो गई. इसके बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई, जो 2025 में जाकर खत्म हुई और आखिरकार उन्हें 1.4 लाख रुपये का मुआवजा मिला. आइए जाने शख्स ने कैसे बीमा कंपनी के खिलाफ केस जीता और आयोग का फैसला क्या था.
बीमा कंपनी ने दावा क्यों खारिज किया?
- पुनीत अग्रवाल ने बीमा कंपनी को सभी जरूरी दस्तावेज 2004 तक जमा कर दिए थे. लेकिन बीमा कंपनी ने उनका दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि उन्होंने कार को सुरक्षित तरीके से पार्क नहीं किया था और पर्याप्त सावधानी नहीं बरती थी. उन्होंने बीमा कंपनी को कई बार पत्र भी लिखा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
- बीमा कंपनी से निराश होकर, अग्रवाल ने गाजियाबाद जिला उपभोक्ता आयोग (DCDRC) में शिकायत दर्ज करवाई. लेकिन आयोग ने पहले यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि उनके पास इस मामले पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.
- इसके बाद 2011 में उन्होंने राज्य उपभोक्ता आयोग (SCDRC), लखनऊ में अपील की. 2025 में राज्य आयोग ने माना कि गाजियाबाद DCDRC को ही इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए. इसके बाद जुलाई 2025 में DCDRC ने आखिरकार अग्रवाल के पक्ष में फैसला सुनाया.
फैसले में क्या कहा गया?
- गाजियाबाद उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी अग्रवाल को 1.43 लाख का भुगतान करे, जो बीमा किए गए वाहन मूल्य (IDV) 1.9 लाख का 75% है. साथ ही मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 एक्स्ट्रा दिए जाएं. अगर यह राशि 45 दिनों में नहीं दी जाती, तो बीमा कंपनी को उस पर 6% सालाना ब्याज देना होगा.
चोरी की स्थिति में क्लेम खारिज करने की नीति पर सवाल
- बीमा मामलों के विशेषज्ञ राकेश कुमार का कहना है कि मोटर बीमा में चोरी के मामलों में अक्सर विवाद 'पर्याप्त सुरक्षा' की व्याख्या को लेकर होता है. बीमा कंपनियां अक्सर सामान्य लापरवाही को आधार बनाकर दावे खारिज करती हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक पुराने फैसले में साफ कहा है कि चोरी की स्थिति में वाहन की उपयोगिता या खड़ी करने की स्थिति को लेकर दावा खारिज नहीं किया जा सकता.
- इस केस में गाजियाबाद DCDRC ने भी सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने मामले – नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बनाम नितिन खंडेलवाल (2008) का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने कहा था कि वाहन की चोरी पर बीमा क्लेम को अस्वीकार नहीं किया जा सकता, भले ही वाहन किस उद्देश्य से उपयोग में लाया गया हो. ऐसे मामलों में दावा निपटान 'नॉन-स्टैंडर्ड' आधार पर किया जाना चाहिए.
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