Red beacon rules: दबंगई दिखाने के लिए आपने भी गाड़ी में लगवा रखी है लाल बत्ती, जानें इस पर कितनी सजा?
केंद्र सरकार ने साल 2017 में वीआईपी कल्चर को खत्म करने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया था. इसके तहत मंत्रियों और बड़े अधिकारियों की गाड़ियों पर लगने वाली लाल बत्ती पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया.

Red beacon rules: हमारे देश में गाड़ियों को लेकर दबंगई दिखाने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. अपनी गाड़ियों पर अलग-अलग तरह से काम कराते हैं. ऐसे ही देश में गाड़ियों पर लाल और नीली बत्ती लगाने का चलन भी लंबे समय से देखा जाता रहा है. कई लोग इसे रुतबा मानकर अपनी प्राइवेट गाड़ियों पर भी लगवा लेते हैं. लेकिन ऐसा करने पर प्रशासन की तरफ से सख्त कार्रवाई की जा सकती है. अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी कार पर बत्ती लगाता है तो उसे भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है और उसकी गाड़ी जब्त की जा सकती है.
वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए बदले थे नियम
केंद्र सरकार ने साल 2017 में वीआईपी कल्चर को खत्म करने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया था. इसके तहत मंत्रियों और बड़े अधिकारियों की गाड़ियों पर लगने वाली लाल बत्ती पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद बड़े पदों पर बैठे लोग अपनी गाड़ियों पर लाल बत्ती का इस्तेमाल नहीं करते हैं.
अब किसे मिलती है लाल बत्ती लगाने की इजाजत?
मौजूदा नियमों के अनुसार आम नागरिक अपनी गाड़ी पर किसी भी तरह की लाल या नीली फ्लैशर लाइट नहीं लगा सकते हैं. यह सुविधा सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं और विशेष सरकारी कार्यों के लिए ही तय है. नीली बत्ती का इस्तेमाल मुख्य रूप से पुलिस एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं की गाड़ियों में किया जाता है. वहीं लाल फ्लैशर का उपयोग भी केवल इमरजेंसी सेवाओं या कुछ विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है. केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत प्राइवेट वाहनों पर मल्टी कलर या फ्लैशर लाइट्स का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंध है. वहीं अगर कोई वाहन अधिकृत व्यक्ति को लेकर नहीं चल रहा है, तो उस पर लगी बत्ती को कवर करना भी अनिवार्य है.
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गलत इस्तेमाल पर कितना लगता है जुर्माना?
अगर कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी में अवैध तरीके से लाल या नीली बत्ती या फिर फ्लैशर लाइट लगता है, तो ट्रैफिक पुलिस मोटर वाहन नियमों की धारा 108 के तहत कार्रवाई करते हुए चालान काट सकती है. कई मामलों में वाहन की जांच भी की जाती है और अवैध लाइट्स को तुरंत हटाया जाता है. अगर गाड़ी नियमों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो उसे सीज भी किया जा सकता है. वहीं सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी लाल, नीली और फ्लैशर लाइट और हूटर के गलत इस्तेमाल पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट का मानना है कि इस तरह से लाइट्स का दुरुपयोग लोगों में भ्रम और डर पैदा करता है, जिससे सड़क हादसे का खतरा बढ़ जाता है.
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