क्या पेट्रोल से सस्ता पड़ता है एथेनॉल से कार चलाना? समझ लीजिए पूरे खर्च का गणित
Is Ethanol Cheaper than Petrol: क्या ₹20 सस्ता होने के बाद भी एथेनॉल से कार चलाना पेट्रोल के मुकाबले महंगा है? जानिए एनर्जी डेंसिटी, माइलेज में गिरावट और प्रति किलोमीटर होने वाले खर्च का पूरा गणित.

Is Ethanol Cheaper than Petrol: भारत सरकार देश में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E85 और E100) को बहुत तेजी से प्रमोट कर रही है. दिल्ली जैसे शहरों में E85 फ्यूल करीब ₹82.12 प्रति लीटर की कीमत पर लॉन्च भी हो चुका है, जो नॉर्मल पेट्रोल से करीब ₹20 सस्ता है. पंप पर लगे इस रेट को देखकर हर किसी को लग रहा है कि अब गाड़ी चलाना बेहद सस्ता होने वाला है.
लेकिन भाई, पिक्चर जितनी सिंपल दिखती है, उतनी है नहीं. सिर्फ लीटर के दाम कम होने से आपकी जेब की बचत तय नहीं होती. जब आप एथेनॉल से गाड़ी चलाने के पूरे खर्च का गणित समझेंगे, तो आपको समझ आएगा कि सस्ता दिखने वाला यह फ्यूल असल में आपकी जेब पर क्या असर डाल रहा है. तो चलिए समझते हैं पूरा गणित.
क्यों घट जाता है माइलेज?
एथेनॉल से कार चलाने का गणित समझने के लिए सबसे पहले आपको 'एनर्जी डेंसिटी' को समझना होगा. साइंस के हिसाब से, एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले करीब 30 से 35 परसेंट कम एनर्जी होती है. इसका मतलब यह है कि 1 लीटर पेट्रोल जलने पर इंजन को जितनी ताकत देता है, 1 लीटर एथेनॉल उतनी पावर नहीं बना पाता.
इसी वजह से फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को उतनी ही ताकत पैदा करने के लिए ज्यादा मात्रा में एथेनॉल फूंकना पड़ता है. जिसका मतलब है एथेनॉल (E85 या E100) पर चलते ही गाड़ी का माइलेज 20 से 30 परसेंट तक सीधे नीचे गिर जाता है.
यह भी पढ़ें: सिर्फ लुक ही नहीं, साइज में भी बड़ी होगी नई Creta, जानिए क्या-क्या बदलेगा
अब जरा सीधे आंकड़ों पर बात करते हैं. मान लीजिए आपकी कार पेट्रोल (E20) पर 18 किमी/लीटर का माइलेज देती है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब ₹102 प्रति लीटर है, तो आपका प्रति किलोमीटर का खर्च आता है लगभग ₹5.67. अब अगर आप उसी गाड़ी में ₹82.12 वाला E85 फ्यूल डलवाते हैं, तो कम एनर्जी डेंसिटी के कारण माइलेज घटकर करीब 13.5 किमी/लीटर रह जाएगा.
अब इस कम माइलेज के हिसाब से जब आप कैलकुलेट करेंगे, तो E85 पर आपकी कार का प्रति किलोमीटर खर्च ₹6.08 आएगा. यानी पंप पर ₹20 सस्ता मिलने के बावजूद, दूरी तय करने के मामले में एथेनॉल आपको पेट्रोल से थोड़ा महंगा ही पड़ेगा.
कब फायदेमंद होगा एथेनॉल?
दुनिया में एथेनॉल का सबसे बड़ा मार्केट ब्राजील है. वहां के लोग गाड़ी में फ्यूल भरवाते समय एक बहुत ही सिंपल फॉर्मूला अपनाते हैं, जिसे '70% रूल' कहा जाता है. इस नियम के मुताबिक, एथेनॉल से गाड़ी चलाना तभी फायदेमंद होता है जब इसकी कीमत पेट्रोल के मुकाबले 70% या उससे कम हो.
भारत की बात करें तो अभी E85 की कीमत पेट्रोल के मुकाबले करीब 80% के आस-पास है. यानी जब तक सरकार एथेनॉल के दामों को घटाकर ₹70 से ₹72 प्रति लीटर के बीच नहीं लाती, तब तक आम जनता को इससे कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं मिलने वाला है. हालांकि, भविष्य में अगर कच्चे तेल के दाम बढ़े, तो यह समीकरण बदल सकता है.
यह भी पढ़ें: Electric vs Hydrogen Car: रेंज, खर्च और परफॉर्मेंस में कौन है किससे आगे? समझिए दोनों में अंतर


























