क्या भारत में रुक जाएगा EV प्रोडक्शन? TVS, Bosch समेत 21 कंपनियों को चीन की एक ‘हां’ का इंतजार
Rare Earth Magnets from China: भारत की प्रमुख कंपनियां जैसे बॉश इंडिया, टीवीएस मोटर और यूनो मिंडा चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट्स खरीदने की तैयारी में हैं और चीन की एक हां का इंतजार कर रही हैं.
Rare Earth Magnets from China: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का भविष्य चीन के एक लाइसेंस पर अटका हुआ है. Bosch India, TVS Motor, Uno Minda और Marelli Powertrain जैसी देश की दिग्गज कंपनियां अब चीन के रेयर अर्थ मैग्नेट एक्सपोर्ट के लिए मंजूरी का इंतजार कर रही हैं. पहले यह संख्या 11 थी, जो अब बढ़कर 21 कंपनियों तक पहुंच गई है.
चीन के रेयर अर्थ मैग्नेट्स पर क्यों है इतना भरोसा?
रेयर अर्थ मैग्नेट्स वे अहम सामग्री हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मोटर, ब्रेक सिस्टम और पावरट्रेन में होता है. 90% ग्लोबल प्रोडक्शन पर चीन का कब्जा है, इसलिए भारत समेत पूरी दुनिया चीन पर निर्भर है. इन चुंबकों के बिना EV का उत्पादन ठप हो सकता है. भारत सरकार और इंडस्ट्री जानती है कि यह सिर्फ एक तकनीकी आपूर्ति का मामला नहीं है, बल्कि देश के EV ट्रांज़िशन और नेट ज़ीरो गोल को भी प्रभावित कर सकता है.
कौन-कौन सी कंपनियां फंसी हैं?
चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट आयात करने के लिए जिन 21 भारतीय कंपनियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, उनमें Bosch India, TVS Motor, Uno Minda, Marelli Powertrain और Sona Comstar जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं. Sona Comstar का आवेदन पहले कुछ Documentary errors के कारण खारिज हो गया था, लेकिन अब कंपनी ने फिर से आवेदन किया है. गौरतलब है कि इस कंपनी के पूर्व प्रमुख संजय कपूर थे, जिनका हाल ही में निधन हो गया.
चीन का नया नियम क्या है?
4 अप्रैल 2025 को चीन ने एक नियम लागू किया जिसके तहत मीडियम और हेवी रेयर अर्थ मैग्नेट के एक्सपोर्ट से पहले लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया. यह लाइसेंस तभी मिलेगा जब खरीदने वाली कंपनी चीन को यह सुनिश्चित करेगी कि इन चुंबकों का इस्तेमाल Military या Destructive Weapons के निर्माण में नहीं किया जाएगा. इस नियम का मकसद अमेरिकी दबाव का जवाब देना था, लेकिन अब अमेरिकी कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है. भारत अभी भी इंतजार में है.
बता दें कि भारत सरकार ने चीन से बातचीत शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. यूरोप की कुछ कंपनियों को चीन ने चुंबक एक्सपोर्ट की अनुमति दे दी है, लेकिन भारत में मौजूद उन्हीं कंपनियों की शाखाओं को हरी झंडी नहीं मिली.
क्या जुलाई में थम जाएगा प्रोडक्शन?
Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) के अनुसार, भारत की 52 कंपनियां चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट आयात करती हैं. यदि अगले कुछ हफ्तों में लाइसेंस नहीं मिला, तो जुलाई की शुरुआत तक इनका स्टॉक खत्म हो सकता है. भारत ने 2024-25 में 306 करोड़ रुपये के 870 टन मैग्नेट आयात किए थे. इन चुंबकों की सप्लाई बंद होने से EV, हाइब्रिड और मोटर उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है.
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Source: IOCL





















