टोल प्लाजा पार करने के कितनी देर तक संभालकर रखें रसीद? NHAI का रूल
Toll Receipt Rule:एन एच आई नियम के मुताबिक अगर वाहन 24 घंटे के भीतर उसी टोल प्लाजा से दोबारा गुजरे तो टोल नहीं देना पड़ता, इसलिए रसीद कम से कम 24 घंटे तक जरूर संभालकर रखें.

Toll Receipt Rule:हाईवे पर सफर करते वक्त टोल चुकाने के बाद ज्यादातर लोग रसीद को तुरंत फेंक देते हैं, यह सोचकर कि अब इसकी कोई जरूरत नहीं. लेकिन एन एच आईके नियमों के मुताबिक, यह रसीद कुछ समय तक संभालकर रखना फायदे का सौदा हो सकता है.
रसीद है काम की चीज
एन एच आई के नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन 24 घंटे के भीतर उसी टोल प्लाजा से दोबारा गुजरता है, तो दोबारा टोल टैक्स नहीं देना पड़ता. इसे रिटर्न ट्रिप रूल कहा जाता है, और इसी वजह से पहली बार मिली रसीद को कम से कम 24 घंटे तक जरूर संभालकर रखना चाहिए, ताकि दोबारा भुगतान से बचा जा सके.
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जीएनएस सिस्टम से बदल रहा है पूरा नियम
टोल कलेक्शन को और स्मार्ट बनाने के लिए अब कई हाईवे पर जीएनएसएस यानी सैटेलाइट आधारित सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है, जो वाहन की लोकेशन को ट्रैक करता है. नए नियम के मुताबिक, अगर कोई गाड़ी 24 घंटे के भीतर उसी हाईवे पर 20 किलोमीटर से कम दूरी तय करता है, तो उसे टोल में छूट मिल सकती है. यानी अब सिर्फ रसीद ही नहीं, बल्कि गाड़ी की ट्रैवल हिस्ट्री भी टोल कैलकुलेशन में मायने रखने लगी है.
यह मीटर का नियम भी जानना जरूरी
रसीद के अलावा टोल प्लाजा से जुड़े दो और नियम काफी काम के हैं. एन एच आई के मुताबिक, अगर टोल बूथ पर गाड़ी 10 सेकंड से ज्यादा फंसी रहे, तो बिना टोल दिए आगे बढ़ने की इजाजत है. इसके साथ ही टोल प्लाजा पर वेटिंग लाइन 100 मीटर से ज्यादा लंबी नहीं होनी चाहिए, अगर ऐसा हो तो भी यात्री मुफ्त में निकल सकते हैं.
रसीद न रखने पर उठाना पड़ सकता है नुकसान
अगर रसीद न संभाली जाए और गाड़ी 24 घंटे के भीतर दोबारा उसी टोल से गुजरे, तो सिस्टम में विवाद होने पर यात्री के पास कोई सबूत नहीं बचता, और उसे दोबारा पूरा टोल चुकाना पड़ सकता है. खासकर उन लोगों के लिए यह जरूरी है, जो एक ही दिन में एक हाईवे पर बार बार आना जाना करते हैं, जैसे ट्रांसपोर्टर या डेली कम्यूटर.
फिर भी सावधानी जरूरी
आजकल ज्यादातर टोल भुगतान फासटैग के जरिए ऑटोमैटिक हो जाता है, जिससे सिस्टम खुद ही रिटर्न ट्रिप की पहचान कर लेता है. लेकिन कभी-कभी तकनीकी गड़बड़ी या नेटवर्क इश्यू के चलते सिस्टम में एंट्री सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाती, ऐसे हालात में रसीद या ऐप पर मौजूद ट्रांजैक्शन डिटेल ही सबसे बड़ा सबूत बनती है.
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