EV महंगी या पेट्रोल कार, लंबी रेस में कौन पड़ेगी सस्ती?
EV vs Petrol Car Long Term Cost: EV और पेट्रोल कार में लंबी रेस में कौन सस्ती है? वियतनामी ईवी कंपनी विनफास्ट के नए कॉस्ट कैलकुलेटर से जानिए खरीद, रनिंग कॉस्ट और मेंटेनेंस का पूरा गणित.

EV vs Petrol Car Long Term Cost: भारत में अब लोग ऐसी कार खरीदना चाहते हैं जो की उनकी पैसों के मामले में बचत कराए. क्योंकि, आज के समय में जब भी कोई नई कार खरीदने का मन बनाता है तो उसके दिमाग में सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि पेट्रोल कार ली जाए या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल पर दांव लगाया जाए. शोरूम में देखने पर पेट्रोल गाड़ियां शुरुआती कीमत के मामले में काफी सस्ती और बजट में लगती हैं. वहीं इलेक्ट्रिक कारें अपनी ज्यादा कीमत की वजह से कई बार आम ग्राहकों को झिझकने पर मजबूर कर देती हैं.
लेकिन जब बात रोजाना सड़क पर चलने, हर महीने फ्यूल का बिल भरने और सालों-साल सर्विसिंग संभालने की आती है तो कुल खर्च का पूरा गणित एकदम उल्टा पड़ जाता है. इसी उलझन को सुलझाने के लिए भारत में कदम रख चुकी मशहूर वियतनामी इलेक्ट्रिक कार कंपनी विनफास्ट ने एक नया कॉस्ट कैलकुलेटर टूल लॉन्च किया है. यह टूल ग्राहकों को सीधे आंकड़े दिखाकर यह समझने में मदद करता है कि 5 या 8 साल की लंबी रेस में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार में से कौन सी गाड़ी जेब पर भारी पड़ती है और कौन सी बचत कराती है. तो चलिए जानते हैं इस पूरे गणित का हिसाब-किताब कि असल में लंबी दूरी में कौन सी राइड सबसे ज्यादा किफायती साबित होगी.
कीमत और ऑन-रोड टैक्स का बड़ा अंतर
बता दें कि, अगर किसी एक ही कैटेगरी की पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार की एक्स-शोरूम कीमत की तुलना की जाए तो ईवी अमूमन 3 से 5 लाख रुपये तक महंगी नजर आती है. उदाहरण के तौर पर अगर 10 से 12 लाख रुपये की पेट्रोल कार आप चुनते हैं तो उसी साइज की इलेक्ट्रिक कार आपको 14 से 16 लाख रुपये के आसपास पड़ती है.
लेकिन इस शुरुआती अंतर को कम करने के लिए सरकार कई राज्यों में ईवी पर 100 परसेंट रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर देती है. इसके अलावा पेट्रोल कारों पर लगने वाले 28 परसेंट से ज्यादा टैक्स की तुलना में ईवी पर सिर्फ 5 परसेंट जीएसटी लगता है. यह सरकारी छूट ईवी की ऑन-रोड कीमत को काफी हद तक बैलेंस करने का काम करती है.

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प्रति किलोमीटर का खर्च
आपको बता दें कि, शुरुआती शोरूम कीमत में भले ही पेट्रोल कार बाजी मारती दिखे लेकिन असली खेल गाड़ी सड़क पर उतरने के बाद शुरू होता है. आज के समय में पेट्रोल कारों का माइलेज और ईंधन के रेट मिलाकर प्रति किलोमीटर चलाने का खर्च लगभग 6 से 8 रुपये तक बैठता है.
जबकि दूसरी तरफ अगर आप अपनी इलेक्ट्रिक कार को घर पर नॉर्मल चार्जर से चार्ज करते हैं तो उसका खर्च महज 1 से 1.5 रुपये प्रति किलोमीटर ही आता है. विनफास्ट के कैलकुलेटर आंकड़ों के मुताबिक अगर आपकी रोजाना की रनिंग 40 से 50 किलोमीटर है तो आप सिर्फ फ्यूल के नाम पर हर महीने पेट्रोल कार के मुकाबले ईवी से 6,000 से 8,000 रुपये तक की सीधी नकद बचत कर सकते हैं.
मेंटेनेंस खर्च में किसका पलड़ा भारी?
जानकारी के लिए बता दें कि, इंजन की जटिल बनावट के कारण पेट्रोल गाड़ियों को हर 10 हजार किलोमीटर पर नियमित सर्विसिंग की जरूरत होती है. पेट्रोल कार में इंजन ऑयल, ऑयल फिल्टर, स्पार्क प्लग, क्लच प्लेट और गियरबॉक्स जैसे सैकड़ों मूविंग पार्ट्स होते हैं. जिनकी घिसावट पर हर साल काफी मोटा पैसा खर्च होता है.
वहीं, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में कोई जटिल इंजन नहीं होता जिससे इनमें 60 परसेंट तक कम पार्ट्स होते हैं. ईवी में न तो कभी मोबिल ऑयल बदलने का झंझट होता है और न ही गियर ऑयलिंग की जरूरत पड़ती है. इस वजह से ईवी की सालाना सर्विसिंग और मेंटेनेंस का खर्च पेट्रोल कार के मुकाबले आधा या उससे भी कम रहता है.
कौन सी कार कराएगी बचत?
बात करते हैं अब सबसे अहम सवाल कि आखिर कितने सालों के बाद ईवी अपने ज्यादा दाम की पूरी भरपाई करके मुनाफा देना शुरू कर देती है. अगर आप हर साल औसतन 15,000 से 18,000 किलोमीटर गाड़ी चलाते हैं. तो लगभग 3 से 4 सालों के भीतर ईवी का फ्यूल और मेंटेनेंस में बचा पैसा उसकी महंगी शुरुआती कीमत को पूरी तरह बराबर कर देता है.

इसके बाद यानी 5 से 8 सालों की लंबी अवधि में एक इलेक्ट्रिक कार आपको पेट्रोल कार के मुकाबले करीब 3 से 5 लाख रुपये तक की भारी बचत करा सकती है. इसलिए अगर आपकी डेली रनिंग ज्यादा है और आप गाड़ी को कम से कम 5 साल रखने का प्लान रखते हैं तो लंबी रेस में ईवी ही सबसे सस्ती और समझदारी भरी पसंद साबित होगी.
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