पेट्रोल की खोज से पहले एथेनॉल से ही चलती थीं गाड़ियां, फिर अब इतना बवाल क्यों?
क्या आप जानते हैं कि पेट्रोल से पहले कारें एथेनॉल से ही चलती थीं? जानिए पहले का इतिहास और आज एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर छिड़े विवाद की असली वजह.

भारत में अभी एथेनॉल को लेकर हर तरफ चर्चा है और अब सरकार ने इस फ्यूल को हर पंप पर मिलना अनिवार्य कर दिया है. लेकिन एथेनॉल जैसे ही पुरे भारत में मिलने लगा अब लोगों के बीच इस फ्यूल को लेकर एक अलग तरह का गुस्सा देखने को मिल रहा है. कुछ लोगों का मानना है कि, यह बेहद ही बेकार फ्यूल है और इससे हमारी गाड़ियां खराब हो जाएंगी.
जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल पैदा हो रहा है कि, एथेनॉल को लेकर इतना गुसा क्यों है. बता दें कि, जब पेट्रोल की खोज नहीं हुई थी उस जमाने से एथेनॉल का यूज़ गाड़ियों में हो रहा है. तो आज हम आपको इस खबर में बताते हैं कि, एथेनॉल का इतिहास क्या रहा है और अभी एथेनॉल को लेकर इतना बवाल क्यों मचा है.
पहले एथेनॉल से ही चलती थी गाड़ियां
आपको बता दें कि, पहले के दौर में जब गाड़ियां बननी शुरू हुई थीं तब एथेनॉल ही सबसे पसंदीदा फ्यूल था. लेकिन 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में कच्चे तेल की खोज के बाद पूरा समीकरण बदल गया. क्योंकि, जमीन से पेट्रोल निकालना और उसे रिफाइन करना एथेनॉल बनाने के मुकाबले काफी सस्ता पड़ने लगा.
जबकि इसके अलावा तेल कंपनियों ने बड़े पैमाने पर लॉबिंग शुरू कर दी और अमेरिका जैसे देशों में एथेनॉल पर भारी टैक्स लगा दिए गए. सस्ते पेट्रोल और मजबूत बिजनेस मॉडल की वजह से एथेनॉल धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में दब गया और दुनिया पूरी तरह पेट्रोल-डीजल के भरोसे हो गई.
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क्यों मच रहा है इतना बवाल?
वहीं, आज के जमाने में जब प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं तो सरकारें दोबारा एथेनॉल की तरफ भाग रही हैं. लेकिन इस वापसी पर बवाल होने की पहली वजह है गाड़ियों के इंजन की सेहत. एथेनॉल में नमी सोखने की प्रवृत्ति होती है जो कार के पुराने इंजनों में जंग लगा सकती है और उनके पाइप और रबर के पार्ट्स को गला सकती है.
जबकि दूसरी बड़ी चिंता माइलेज को लेकर भी है.क्योंकि एथेनॉल का एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होता है, इसलिए एथेनॉल मिक्स पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ियों का माइलेज करीब 3 से 5% तक गिर जाता है जिससे सीधे तौर पर आपकी गाड़ी का माइलेज कम होना लाजमी है और इसका सीधा असर आम जनता के जेब पर पड़ेगा. इस लिए भारत में एथेनॉल को लेकर इतना बवाल मचा हुआ है.
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