कार के घिसे टायर बिगाड़ सकते हैं माइलेज और परफॉर्मेंस, जानें इंजन और सेफ्टी पर असर
घिसे हुए टायर को नजरअंदाज करना एक बड़ी गलती हो सकती है. इससे न सिर्फ आपकी कार का माइलेज कम होता है, बल्कि इंजन, ब्रेक और सस्पेंशन पर भी बुरा असर पड़ता है. आइए विस्तार से जानते हैं.

कार चलाना सिर्फ ड्राइविंग नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है. अक्सर लोग इंजन या फीचर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन टायर की हालत को नजरअंदाज कर देते हैं. यही गलती आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है. टायर ही वह हिस्सा है जो कार को सड़क से जोड़ता है. अगर टायर सही हालत में नहीं हैं, तो पूरी कार की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. घिसे हुए टायर न सिर्फ आपकी ड्राइविंग को असुरक्षित बनाते हैं, बल्कि इंजन और माइलेज पर भी बुरा असर डालते हैं.
टायर की ग्रिप खत्म होने से क्या होता है?
जब टायर ज्यादा घिस जाते हैं तो उनकी पकड़ यानी ग्रिप कम हो जाती है. ऐसे टायर को “बॉल्ड टायर” कहा जाता है. इनकी सतह चिकनी हो जाती है, जिससे सड़क पर पकड़ कमजोर हो जाती है. ऐसी स्थिति में कार चलाते समय टायर आसानी से फिसल सकते हैं, खासकर बारिश या गीली सड़क पर. जब टायर सही से पकड़ नहीं बना पाते, तो कार को आगे बढ़ाने के लिए इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इस वजह से इंजन पर दबाव बढ़ता है और कार का माइलेज कम हो जाता है. यानी आपको ज्यादा पेट्रोल या डीजल खर्च करना पड़ता है.
इंजन और गियरबॉक्स पर बढ़ता दबाव
घिसे हुए टायर सिर्फ बाहर से खराब नहीं दिखते, बल्कि अंदर से कार के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हैं. जब टायर सड़क पर ठीक से नहीं चलते, तो इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. इससे इंजन ज्यादा आरपीएम पर काम करता है और जल्दी गर्म होने लगता है. इसका असर गियरबॉक्स पर भी पड़ता है, जिससे उसकी लाइफ कम हो सकती है. इसके अलावा एक बड़ा खतरा हाइड्रोप्लेनिंग का होता है. जब सड़क पर पानी होता है और टायर घिसे हुए होते हैं, तो टायर और सड़क के बीच पानी की परत बन जाती है. इस स्थिति में ब्रेक और स्टीयरिंग काम करना बंद कर सकते हैं, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है.
ब्रेकिंग और सस्पेंशन पर असर
घिसे हुए टायर के साथ कार चलाने से ब्रेक लगाने में ज्यादा दूरी लगती है. यानी अगर आपको अचानक ब्रेक लगाना पड़े, तो कार जल्दी नहीं रुकेगी. यह बहुत खतरनाक स्थिति हो सकती है. इसके अलावा ऐसे टायर कार में कंपन (वाइब्रेशन) भी पैदा करते हैं. इससे सस्पेंशन सिस्टम पर असर पड़ता है और धीरे-धीरे वह भी खराब होने लगता है. इसलिए यह जरूरी है कि आप समय-समय पर टायर की जांच करते रहें और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदल दें.
कब बदलने चाहिए टायर?
अगर आपके टायर की थ्रेड गहराई 1.6 मिलीमीटर से कम हो गई है, तो यह साफ संकेत है कि अब टायर बदलने का समय आ गया है. समय पर टायर बदलना न सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह आपकी कार की परफॉर्मेंस और माइलेज को भी बेहतर बनाए रखता है.
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