Car में Extra Passenger बैठाना पड़ेगा भारी, जानें कितना कटेगा Challan
कार में क्षमता से ज्यादा पैसेंजर बैठाना पड़ सकता है भारी. जानें ओवरलोडिंग पर कितना कटता है चालान और बीमा क्लेम पर क्या पड़ता है असर.

हमारे देश में चालान नियमों को हमेशा बहुत हल्के में लिया गया है. जिसके चलते अब सरकार नियम न मानने वालों पर कड़ी कार्यवाही कर रही है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि, जब भी लोग कई घूमने या किसी शादी-समारोह में जाते हैं तो 5 सीटर गाड़ी में 6-7 लोग जबकि 7 सीटर गाड़ी में 8-9 लोग को बैठाकर सफर पर निकल लेते हैं. लेकिन ऐसा करना कानून के नजर में अपराध है और इसपर आपके ऊपर चालान भी किया जा सकता है.
क्योंकि, भारतीय ट्रैफिक नियमों और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार में ओवरलोडिंग करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है. इसलिए अपनी फैमिली या दोस्तों के साथ सफर पर निकलने से पहले यह जान लेना बेहद जरूरी है कि कार की सीटिंग कैपेसिटी से जुड़ी कानूनी शर्तें क्या हैं और नियम तोड़ने पर आपकी जेब पर कितना भारी असर पड़ सकता है.
कितना कटता है चालान?
बता दें कि, भारतीय मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 194A के तहत यदि कोई चालक अपनी गाड़ी में उसकी आरसी में दर्ज स्वीकृत सीटिंग कैपेसिटी से ज्यादा सवारियां बैठाता हुआ पाया जाता है तो उस पर सख्त पेनल्टी लगाई जाती है. जबकि नियम के अनुसार प्रति अतिरिक्त सवारी 2000 रुपये का चालान काटा जा सकता है.
जिसका इसका मतलब यह हुआ कि यदि आपकी 5-सीटर कार में 2 अतिरिक्त लोग बैठे हैं तो आपसे कुल 4000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा. इसके अलावा कुछ मामलों में ट्रैफिक पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस भी 3 महीने के लिए सस्पेंड कर सकती है या गाड़ी को मौके पर ही सीज कर सकती है.

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सीट बेल्ट न पहनने का भी अलग से लगेगा जुर्माना
वहीं, कार में ओवरलोडिंग का दूसरा सबसे बड़ा खतरा यह है कि अतिरिक्त पैसेंजर के लिए गाड़ी में सीट बेल्ट उपलब्ध नहीं होती. मोटर व्हीकल एक्ट के नए नियमों के तहत कार में बैठी हर सवारी के लिए सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है. अगर कार में बैठी सवारी ने सीट बेल्ट नहीं पहनी है तो प्रति व्यक्ति 1000 रुपये का अलग से चालान काटा जाएगा. यानी अगर आपने एक्स्ट्रा सवारी बैठाई है तो आप पर ओवरलोडिंग और बिना सीट बेल्ट के यात्रा करने- दोनों का दोहरा जुर्माना एक साथ लग जाएगा. जिससे आपके जेब पर काफी भारी असर पड़ सकता है.
खारिज हो जाएगा कार इंश्योरेंस क्लेम
जानकारी दें दे कि, सड़क चालान के अलावा ओवरलोडिंग का सबसे बड़ा नुकसान बीमा के समय उठाना पड़ता है. कार बीमा पॉलिसी के नियमों के मुताबिक यदि दुर्घटना के समय गाड़ी में उसकी क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे तो इंश्योरेंस कंपनी आपकी कार के नुकसान के क्लेम को पूरी तरह रद्द कर सकती है.
इतना ही नहीं थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में मिलने वाला वित्तीय कवर भी खतरे में पड़ जाता है. बीमा कंपनियां ओवरलोडिंग को पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन मानती हैं जिसकी वजह से हादसे के बाद होने वाले सभी बड़े मेडिकल और रिपेयरिंग के खर्चे आपको अपनी जेब से भरने पड़ सकते हैं.

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सेफ्टी पर पड़ता है बुरा असर
आपको बता दें कि, कानूनी और वित्तीय नुकसान के अलावा, कार में अतिरिक्त वजन का सीधा असर गाड़ी के मैकेनिकल पार्ट्स पर पड़ता है. तय वजन से ज्यादा सवारी बैठाने पर कार के सस्पेंशन, ब्रेक और टायरों पर अत्यधिक दबाव बनता है. इमरजेंसी ब्रेकिंग के दौरान गाड़ी रुकने में ज्यादा समय लेती है.
जिससे एक्सीडेंट होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. वहीं, इसके अलावा ओवरलोडिंग के कारण कार का माइलेज काफी गिर जाता है और इंजन को गाड़ी खींचने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. इसलिए हमेशा अपनी कार की RC में दर्ज लिमिट के हिसाब से ही सवारियों को बैठाकर सुरक्षित सफर करें.
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