'SIR का कोई मतलब नहीं, EC की छवि हो रही खराब', ABP से बोले पूर्व आयुक्त अशोक लवासा
एसआईआर पर विवाद के बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि दुख हुआ कि इलेक्शन कमीशन की इमेज इस तरह से खराब हो रही है.

चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा. पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने एबीपी न्यूज' से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि चुनाव आयोग की छवि खराब हो रही है, इसका दुख है. लवासा ने कहा कि एसआईआर करवाने का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने इसके साथ-साथ फॉर्म 6 को लेकर भी बात की.
जनवरी 2018 से अगस्त 2020 तक चुनाव आयुक्त रहे अशोक लवासा ने कहा, ''पहले तो अफसोस हुआ कि ये सारी चीजें चल रही हैं. दूसरा दुख हुआ कि इतनी अच्छी संस्था इलेक्शन कमीशन है, उसकी इमेज इस तरह से खराब हो रही है और तीसरा जितनी तकलीफ लोगों को एसआईआर की वजह से थी, वो कहीं न कहीं जाहिर हुआ कि इलेक्शन कमीशनर्स भी चिंतित थे. जिस तरह से ये किया जा रहा है, उसमें सारी चीजें जायज तरीके से नहीं हो रही हैं.''
उन्होंने कहा, ''टेक्नोलॉजी अपनी जगह है और कानून अपनी जगह है. टेक्नोलॉजी कानूनी प्रक्रिया को सपोर्ट करने के लिए बनाई जाती है. उसमें अड़चन डालने के लिए नहीं बनाई जाती है.''
फॉर्म-6 में क्यों जोड़ा गया सवाल
फॉर्म-6 में माता-पिता वाला सवाल पहले नहीं था, इसे क्यों जोड़ा गया होगा? इस पर अशोक लवासा ने कहा, ''ये सवाल आपको ईसीआई से पूछना चाहिए. मैं तो शुरू से कह रहा हूं कि सारी जो एसआईआर की एक्सरसाइज है ये परपसलेस है. जो आप एसआईआर के जरिए अचीव करना चाहते थे वो आप एक आसान तरीके से भी अचीव कर सकते थे.''
उन्होंने कहा, ''SIR जिस तरह से इस बार अडोप्ट किया गया है ये जो मेथोलॉजी इस्तेमाल की गई है वो पहले कभी इस्तेमाल नहीं की गई है. आप ही बताइए आज भी लॉजिकल डिसक्रिपेंसी के क्या मायने हैं. क्या उसके पैरामीटर्स हैं. मैपिंग करने की क्यों आवश्यकता है. चुनाव आयोग हमेशा से जो भी प्रणाली लागू करता है. उसके विस्तृत गाइडलाइन्स जारी करता है. ट्रांसपेरेंट्ली लोगों को समझाता है. देखिए ये तरीका हम अपनाएंगे और हम इस वजह से अपना रहे हैं. ये क्या तरीका हुआ कि मेरी उम्र 60 साल है और मैं 20-25 साल से इलैक्ट्रोल वोट में हूं. उसे आप मैप नहीं कर सकते, लेकिन उससे मेरे अधिकार पर क्यों प्रभाव पड़ना चाहिए.''
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