क्या After Market सनरूफ लगाने से घट जाती है कार की वारंटी, क्या हैं नियम?
अगर आप अपनी कार में After Market सनरूफ लगवाने का प्लान कर रहे हैं, तो जानें इससे जुड़े जरूरी नियम और जानकारी. लूक बदलने के लिए छत काटने से वारंटी, सुरक्षा और इंश्योरेंस पर पड़ता है असर.

आजकल कार को अपनी पसंद के हिसाब से मॉडिफाई कराने का चलन बढ़ रहा है. कोई नई लाइट लगवाता है तो कोई बड़ा इंफोटेनमेंट सिस्टम, अलॉय व्हील या सनरूफ. खासतौर पर जिन कारों में कंपनी की तरफ से सनरूफ नहीं मिलता, उनके मालिक आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने के बारे में सोचते हैं. लेकिन कई लोग नहीं जानते हैं कि बात सिर्फ कार के लुक का नहीं, बल्कि वारंटी और सुरक्षा का भी है.
आफ्टरमार्केट सनरूफ लगाने के लिए आमतौर पर कार की रूफ में कटिंग करनी पड़ती है. यही वजह है कि यह सामान्य प्लग-एंड-प्ले एक्सेसरी से काफी अलग है. कई वाहन निर्माता बॉडी में कटिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग या दूसरे स्ट्रक्चरल बदलाव को वारंटी के लिए जोखिम मानते हैं. ऐसे में जानिए यह कितना सही है और इसके लिए क्या नियम है.
सनरूफ लगवाने से पूरी वारंटी खत्म नहीं होती
आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने से आमतौर पर सबसे बड़ा सवाल उस हिस्से से जुड़ी वारंटी पर होता है, जिस पर मॉडिफिकेशन का सीधा असर पड़ता है. अगर सनरूफ लगाने के दौरान कार की रूफ काटी गई और बाद में वहां से पानी रिसने लगा, रूफ में जंग लग गई या बॉडी से जुड़ी कोई समस्या आई, तो कंपनी उस नुकसान को वारंटी में लेने से मना कर सकती है. हालांकि इससे जरूरी नहीं कि इंजन या किसी ऐसे हिस्से की वारंटी भी अपने आप खत्म हो जाए जिसका इस मॉडिफिकेशन से कोई संबंध नहीं है.
रूफ की कटिंग बन सकती है बड़ी समस्या
फैक्ट्री से आने वाली कार की बॉडी और रूफ को एक खास स्ट्रक्चरल डिजाइन के हिसाब से तैयार किया जाता है. आफ्टरमार्केट सनरूफ के लिए इसमें कटिंग करने पर कैर बॉडी में बदलाव होता है. इसके अलावा सनरूफ की फिटिंग के दौरान सीलिंग और ड्रेनेज सिस्टम में भी बदलाव किया जाता है. अगर फिटिंग सही तरीके से न हो तो बारिश के पानी के केबिन में आने का खतरा बढ़ सकता है. वहीं लंबे समय में नमी के कारण कार के अंदर के इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स को भी नुकसान पहुंचने का भी खतरा रहता है.
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कंपनियों की वारंटी पॉलिसी पर दें ध्यान
अलग-अलग कंपनियों की शर्तें अलग होती हैं. कई कंपनियां FAQ में कहती है कि स्टैंडर्ड फिटमेंट में बदलाव वारंटी को प्रभावित कर सकता है. वहीं कई कंपनियों की वारंटी पॉलिसी में भी modifications, alterations, tampering या improper repair से होने वाले नुकसान को कवरेज से बाहर रखा जाता है. कुछ कंपनियां तो वारंटी शर्तों में भी एक्सेसरीज और मॉडिफिकेशन से होने वाली खराबी को कवर नहीं करती. इसका यह मतलब नहीं है कि हर आफ्टरमार्केट सनरूफ लगवाने पर पूरी कार की वारंटी खत्म हो जाएगी, लेकिन सनरूफ से जुड़े या उसके कारण होने वाले नुकसान पर वारंटी क्लेम खारिज होने का खतरा जरूर रहता है.
कंपनी से लें लिखित जानकारी
अगर आप नई कार में ऐसा बदलाव कराने की सोच रहे हैं, तो सबसे सुरक्षित तरीका है कि पहले अपनी कंपनी के डीलर से लिखित में जानकारी लें. सिर्फ किसी एक्सेसरी शॉप के यह कहने पर भरोसा न करें कि वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कंपनी की लिखित अनुमति, एक्सेसरी की मंजूरी और फिटमेंट की शर्तों को संभालकर रखना बेहतर है.
इंश्योरेंस पर भी पड़ सकता है असर
सनरूफ लगाने से सिर्फ वारंटी ही नहीं, इंश्योरेंस का मामला भी सामने आ सकता है. कार में बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव कराने के बाद बीमा कंपनी को इसकी जानकारी देना जरूरी होता है. इसलिए मॉडिफिकेशन कराने से पहले अपनी पॉलिसी की शर्तें और इंश्योरर से जानकारी जरूर लें.
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