Guru Gochar 2026: क्यों इस साल का नौतपा माना जा रहा है 'खंडित'? 27 वर्षों बाद बने त्रिग्रही योग से मौसम में बड़े उलटफेर की आशंका
Guru Gochar 2026: कर्क राशि में अतिचारी बृहस्पति का प्रवेश और 27 साल बाद बना त्रिग्रही योग लाएगा मौसम में भारी बदलाव.ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास के अनुसार, अगस्त-सितंबर में बाढ़ व सूखे के मिश्रित योग.

Guru Gochar & Monsoon Prediction 2026: देवगुरु बृहस्पति (Guru) 2 जून 2026 को अपनी उच्च राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश कर चुके हैं. गुरु इस राशि में 31 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे, जिसके बाद वे सिंह राशि में गोचर करेंगे. वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु को देवताओं का गुरु माना जाता है, जो सामान्यतः एक राशि में करीब 13 महीने रहते हैं. हालांकि, वर्तमान में गुरु 'अतिचारी चाल' (तेज गति) से चल रहे हैं, जिसके कारण वे जल्दी-जल्दी राशि परिवर्तन कर रहे हैं.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान (जयपुर-जोधपुर) के निदेशक और प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु की इस अतिचारी चाल और हाल ही में समाप्त हुए 'खंडित नौतपा' का देश के मौसम, महंगाई और राजनीति पर गहरा असर देखने को मिलेगा.
अतिचारी गुरु का देश-दुनिया पर असर: महंगाई और प्राकृतिक प्रकोप की आशंका
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, गुरु की तेज चाल (अतिचार) शुभ संकेत नहीं है. इसके प्रभाव से:
महंगाई और युद्ध के हालात: वैश्विक स्तर पर तनाव और देश में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आ सकती है.
प्राकृतिक प्रकोप: भूकंप, आंधी-तूफान और मौसम में अचानक बदलाव की घटनाएं बढ़ सकती हैं.
असामान्य मौसम: नौतपा के खंडित होने से वर्षा ऋतु प्रभावित होगी. देश में कहीं अत्यधिक भारी बारिश (बाढ़) तो कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है. इसके साथ ही बेमौसम ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है.
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से कब मिलेगी राहत?
मेदिनी ज्योतिष के अनुसार राशियों को दो मुख्य तत्वों में बांटा गया है:
- जल तत्व की राशियां: कर्क, वृश्चिक, मकर और मीन.
- शुष्क (सूखी) राशियां: मेष, सिंह, धनु, मिथुन और कन्या.
वर्तमान में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. डा. अनीष व्यास ने बताया कि 1 जून की रात को गुरु शुष्क राशि मिथुन को छोड़कर जैसे ही जल तत्व की राशि कर्क में आए हैं, वैसे ही गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
केरल में मानसून की दस्तक: गोचर में जब गुरु और शुक्र मिथुन राशि में थे और तुला के चंद्रमा से त्रिकोण बना रहे थे, उसी प्रभाव के कारण 28 मई को ही दक्षिण भारत के तटीय प्रदेश केरल में वर्षा की शुरुआत हो गई.
जून में मानसून की रफ्तार और प्रमुख शहरों में बारिश का अलर्ट
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, जून महीने में ग्रहों की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
शनि पर गुरु की दृष्टि: कर्क राशि में बैठे गुरु वर्तमान में मीन राशि में चल रहे शनि को अपनी नवम दृष्टि से देख रहे हैं. इसके प्रभाव से जून के पहले पखवाड़े (First Fortnight) में उत्तर और मध्य भारत के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होगी, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलेगी.
मानसून की तेज रफ्तार: 2 जून के बाद से दक्षिण और मध्य भारत में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा.
गुरु-शुक्र की युति: 8 जून को कर्क राशि में शुक्र भी प्रवेश कर जाएंगे, जिससे गुरु और शुक्र की शुभ युति बनेगी.
8 जून के बाद इन शहरों में होगी भारी बारिश:
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मुंबई
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रायपुर
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नागपुर
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कोलकाता
27 साल बाद बना 'त्रिग्रही योग' और खंडित नौतपा का रहस्य
इस वर्ष का नौतपा (Nautapa 2026) बेहद विशेष और चर्चा में रहा. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, पूरे 27 वर्षों बाद मिथुन राशि में गुरु, शुक्र और बुध की युति से दुर्लभ 'त्रिग्रही योग' का निर्माण हुआ है.
क्या है नौतपा और इसका महत्व?
जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उसके शुरुआती 9 दिनों की अवधि को 'नौतपा' कहा जाता है. इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं, जिससे भीषण गर्मी होती है. सनातन परंपरा में मान्यता है कि नौतपा के 9 दिन जितने ज्यादा तपेंगे, आगामी मानसून उतना ही संतुलित और अच्छा रहेगा. इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहा.
क्यों कहलाया यह "खंडित नौतपा"?
इस बार नौतपा के दौरान कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और बादलों की आवाजाही देखी गई. ज्योतिष शास्त्र में इसे "खंडित नौतपा" कहा जाता है. डा. अनीष व्यास के मुताबिक, नौतपा का टूटना आगामी मानसून और कृषि उत्पादन (Farming & Agriculture) के लिए मिश्रित यानी मिले-जुले संकेत दे रहा है.
Monsoon 2026: कैसा रहेगा इस साल का मानसून? (95 से 100% वर्षा का अनुमान)
हर साल जब सूर्य मिथुन राशि के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं (प्रायः 21 या 22 जून), तब उस समय की कुंडली से आगामी 4 महीनों (जून से सितंबर) के मानसून का सटीक आकलन किया जाता है.
- आर्द्रा नक्षत्र प्रवेश: इस वर्ष सूर्य 22 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 26 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे.
- कुंडली का योग: इस समय कन्या लग्न उदय हो रहा होगा. लग्न में जलीय ग्रह चंद्रमा तो होंगे, लेकिन लग्न की राशि शुष्क है और उस पर शनि की सातवीं दृष्टि पड़ रही है.
- वर्षा का प्रतिशत: इस साल शनि और गुरु दोनों जल तत्व की राशियों में गोचर कर रहे हैं, जिसके कारण देश में 95% से 100% तक सामान्य वर्षा होगी.
- सकारात्मक पहलू: मानसून के दौरान शुष्क ग्रह मंगल, सूर्य से पीछे चलेंगे, जो अच्छी बारिश के लिए एक बेहतरीन योग है.
राज्यवार मानसून और मौसम का पूरा पूर्वानुमान (जून से सितंबर 2026)
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने आगामी महीनों के लिए क्षेत्रवार (Region-wise) भविष्यवाणी की है:
| समय अवधि / तिथि | प्रभावित क्षेत्र / राज्य | मौसम का सटीक पूर्वानुमान |
| 31 मई | दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) | आषाढ़ पूर्णिमा के दिन मानसून के पहुंचने के योग. |
| 22 जून के बाद | पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार | मानसून की धमाकेदार एंट्री और अच्छी वर्षा. |
| 16 जुलाई से 15 अगस्त | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा | गुरु और सूर्य की युति से अत्यधिक भारी बारिश और बाढ़ (Flood) का खतरा. |
| 22 अगस्त से 17 सितंबर | बंगाल, बिहार, झारखंड, असम | शुष्क ग्रहों के प्रभाव से सामान्य से कम वर्षा (सूखे जैसी स्थिति). |
| अगस्त और सितंबर | कर्नाटक और तमिलनाडु | कन्या राशि की पीड़ा के कारण दक्षिण के इन राज्यों में कम बारिश होगी (जबकि जून-जुलाई में यहाँ अच्छी वर्षा होगी). |
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, 26 जुलाई को शनि के वक्री होने और गुरु के अतिचार के कारण अगस्त और सितंबर के महीने में देश में असामान्य वर्षा (Unpredictable Rainfall) देखने को मिलेगी, जिससे कहीं बाढ़ तो कहीं अनावृष्टि (कम बारिश) के हालात बनेंगे.
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